
मध्यप्रदेश में किसानों को डिजिटल पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है.प्रदेश में Farmer ID बनाने का अभियान जारी है.मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से अपनी फार्मर आईडी बनवाने की अपील की है.सरकार के अनुसार, यह आईडी किसानों के लिए आधार कार्ड की तरह एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान के रूप में काम करेगी.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश में डिजिटल क्रांति के चलते शासन और सरकारी सेवाओं के वितरण में तेजी से बदलाव आया है.इसी बदलाव को कृषि क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए डिजिटल कृषि मिशन के तहत कई पहल की जा रही हैं.
Farmer ID में किसानों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को एक साथ जोड़ा जाएगा। इसमें भूमि अभिलेख, पशुधन का स्वामित्व, बोई गई फसल और किसानों को मिले विभिन्न सरकारी लाभ जैसी जानकारियां शामिल होंगी. इससे किसानों की जानकारी डिजिटल रूप से एक जगह उपलब्ध हो सकेगी.
सरकार का उद्देश्य है कि कृषि से जुड़ी सेवाएं किसानों को समय पर, व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार और भरोसेमंद तरीके से उपलब्ध कराई जा सकें.
प्रदेश में Farmer ID बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत सरकारी दल किसानों तक पहुंचकर उनकी Farmer ID तैयार कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने सभी किसानों से इस अभियान में शामिल होकर अपनी डिजिटल पहचान बनवाने की अपील की है.
डिजिटल कृषि व्यवस्था के विस्तार से भविष्य में किसानों को डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का लाभ मिलने की उम्मीद है. इन तकनीकों के इस्तेमाल से खेती और किसानों से जुड़ी जानकारी का बेहतर विश्लेषण किया जा सकेगा.
इसके साथ ही सरकार डिजिटल फसल अनुमान सर्वेक्षण और डिजिटल सार्वजनिक अधोसंरचना के माध्यम से कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है.
किसान आईडी के निर्माण और डिजिटल फसल सर्वेक्षण की व्यवस्था को परखने के लिए पहले उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और तमिलनाडु में पायलट परियोजनाएं संचालित की गई थीं. अब मध्यप्रदेश में भी किसान-केंद्रित डिजिटल व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है.
कुल मिलाकर, Farmer ID बनने के बाद किसानों की जमीन, फसल, पशुधन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी एक डिजिटल पहचान से जुड़ सकेगी. इससे भविष्य में किसानों तक कृषि सेवाएं और योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को और आसान बनाने में मदद मिल सकती है.