प्याज के खुदरा भाव में तेजीकंज्यूमर अफेयर्स सेक्रेटरी निधि खरे ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र के पास मौजूद प्याज का बफर स्टॉक "अच्छी" क्वालिटी का है. उन्होंने बताया कि इस साल पहली बार प्याज को लंबे समय तक ठीक रखने के लिए सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (CWC) को स्टोरेज का काम सौंपा गया था.
खरे ने उन खबरों को गलत बताया जिनमें कहा गया था कि सरकार के पास मौजूद 1.21 लाख टन प्याज के बफर स्टॉक का 30 प्रतिशत हिस्सा सड़ गया है. उन्होंने PTI से कहा, "ऐसा कुछ नहीं हुआ है. क्वालिटी अच्छी है."
सेक्रेटरी ने बताया कि पिछले सालों में प्याज का बफर स्टॉक व्यापारियों के पास रखा जाता था, लेकिन इस बार यह जिम्मेदारी CWC को दी गई और एक थर्ड पार्टी समय-समय पर स्टॉक की क्वालिटी की जांच करती रही.
प्याज को स्टोर करने के पीछे की साइंस के बारे में बताते हुए खरे ने कहा कि इस सब्जी में 90 प्रतिशत पानी होता है और कटाई के बाद तीन महीने तक इसकी क्वालिटी बनी रहती है. इसके बाद, पानी के भाप बनकर उड़ने के कारण यह हर महीने सिकुड़ने लगती है. उन्होंने कहा कि खराब होने की मात्रा स्टोरेज की स्थितियों और हवा के आने-जाने (वेंटिलेशन) पर निर्भर करती है.
उन्होंने बताया कि कुछ प्याज मई में खरीदा गया था, लेकिन बफर स्टॉक का अधिकतर हिस्सा जून-जुलाई में खरीदा गया, इसलिए इसकी क्वालिटी अच्छी बनी हुई है. उन्होंने आगे कहा कि इस साल प्याज की रिकवरी 72 प्रतिशत रहने का अनुमान है -- जो 2022 में 49 प्रतिशत, 2023 में 54 प्रतिशत और 2024 में 63 प्रतिशत थी.
प्याज की खरीद NAFED और NCCF जैसी एजेंसियों के जरिए की जाती है.
बफर स्टॉक को 'कांदा एक्सप्रेस' -- एक खास रेल रैक -- के जरिए बड़ी मात्रा में दिल्ली, चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी भेजा जा रहा है. शुक्रवार को 453 टन प्याज की एक खेप दिल्ली पहुंची. इस कदम से दिल्ली-NCR और आस-पास के शहरों में सप्लाई बढ़ने और कीमतों पर लगाम लगने की उम्मीद है. खुदरा कीमतों में गिरावट एक हफ्ते के भीतर दिखने की संभावना है.
खरे ने बताया कि इस पहल के बाद नासिक की मंडियों में कीमतें कम होने लगी हैं. उन्होंने कहा कि यह अजीब बात है कि 24 अगस्त को प्याज पैदा करने वाले केंद्र नासिक में मंडी का भाव 44 रुपये प्रति किलो था, जो उसी दिन दिल्ली जैसे खपत वाले केंद्र में 25 रुपये प्रति किलो के खुदरा भाव से अधिक था.
उन्होंने आगे कहा कि राजस्थान और मध्य प्रदेश धीरे-धीरे दिल्ली और उत्तर के दूसरे राज्यों में प्याज के बड़े सप्लायर के तौर पर उभर रहे हैं. उन्होंने कहा, "कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. स्टॉक अच्छा है."
खरे ने कहा कि खरीफ प्याज की फसल का आउटलुक भी अच्छा है, क्योंकि अब अल नीनो का डर खत्म हो गया है. उन्होंने रबी प्याज की फसल पर अल नीनो के असर को लेकर भी चिंता दूर करते हुए कहा कि सिंचाई में सुधार हुआ है और मुख्य जलाशयों में पानी का स्तर ठीक-ठाक है.
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को राजधानी में प्याज का खुदरा भाव 88 प्रतिशत बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो हो गया, जो एक साल पहले 33 रुपये प्रति किलो था. उसी दिन पूरे देश में औसत खुदरा भाव 46.58 रुपये प्रति किलो था, जबकि थोक भाव 38.29 रुपये प्रति किलो था.
कीमतों में उछाल के बावजूद, खरे ने कहा कि आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता ठीक रहेगी. इसके पीछे 2025-26 में 307.37 लाख टन के अनुमानित उत्पादन का सहारा है, जो मोटे तौर पर पिछले साल के 307.67 लाख टन उत्पादन के बराबर ही है.(PTI)
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