
मध्यप्रदेश सरकार ने महिलाओं, बेटियों, किसानों और पर्यावरण से जुड़े कई बड़े फैसले लिए हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए 1 लाख 14 हजार 365 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई.यह राशि वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक योजना के लगातार संचालन पर खर्च होगी.इसके अलावा लाड़ली लक्ष्मी योजना, कृषि शिक्षा और अनुसंधान तथा नर्मदा नदी के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली है.
सरकार ने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने के लिए 1,14,365 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं. योजना का उद्देश्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार करना तथा परिवार के फैसलों में उनकी भूमिका को मजबूत करना है.योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में दी जा रही है. वर्तमान में प्रदेश की करीब 1.27 करोड़ महिलाएं इस योजना का लाभ ले रही हैं.नई स्वीकृति से आने वाले वर्षों में योजना के निरंतर संचालन का रास्ता साफ हो गया है.
बेटियों के भविष्य को मजबूत करने वाली मध्यप्रदेश लाड़ली लक्ष्मी योजना को भी वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 16,326.47 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं.अब तक करीब 50.99 लाख बालिकाएं इस योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं.
योजना के तहत बालिकाओं को कक्षा 6वीं में प्रवेश पर 2 हजार, 9वीं में 4 हजार, 11वीं और 12वीं में 6-6 हजार रुपये की सहायता दी जाती है. कॉलेज में प्रवेश पर प्रथम और अंतिम वर्ष में 12,500-12,500 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलती है.वहीं 21 वर्ष की आयु पूरी होने पर पात्र बालिका को 1 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है.
मंत्रि-परिषद ने कृषि क्षेत्र की शिक्षा, अनुसंधान और अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए 870 करोड़ 16 लाख रुपये की मंजूरी दी है. इसमें जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर की स्ववित्तीय पेंशन योजना के लिए 310.23 करोड़ रुपये, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर की ब्लॉक ग्रांट योजना के लिए 469.93 करोड़ रुपये और कृषि क्षेत्र में अधोसंरचना विकास के लिए 90 करोड़ रुपये शामिल हैं.इस राशि से कृषि विश्वविद्यालयों में वेतन-भत्तों, अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रयोगशालाओं और अन्य जरूरी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा.
सरकार ने जीवनदायिनी नर्मदा नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन और दीर्घकालीन प्रबंधन के लिए ‘निर्मल एवं अविरल मां नर्मदा मिशन’ यानी ‘नमन मिशन’ के गठन को भी मंजूरी दी है.
इस मिशन को वैज्ञानिक और बहु-विभागीय व्यवस्था के रूप में विकसित किया जाएगा.सरकार के अनुसार प्रदेश की करीब 33 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नर्मदा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर निर्भर है. ऐसे में नदी की स्वच्छता, प्रवाह और संरक्षण के लिए यह मिशन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.कुल मिलाकर मंत्रि-परिषद के इन फैसलों में महिला सशक्तिकरण, बेटियों के भविष्य, कृषि शिक्षा और नर्मदा संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है.