घूंघट से ड्रोन तक: ‘ड्रोन दीदी’ मेघा पाटीदार लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई कहानी

घूंघट से ड्रोन तक: ‘ड्रोन दीदी’ मेघा पाटीदार लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई कहानी

आगर-मालवा की मेघा पाटीदार ने नमो ड्रोन दीदी योजना का लाभ लेकर अपनी पहचान ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में बनाई है. निःशुल्क ड्रोन और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वे किसानों के खेतों में नैनो यूरिया व कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं.

धर्मेंद्र सिंह
  • Bhopal ,
  • Jun 08, 2026,
  • Updated Jun 08, 2026, 9:59 AM IST

कभी ग्रामीण महिलाओं की पहचान घर की चारदीवारी और पारंपरिक जिम्मेदारियों तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन आज वही महिलाएं आधुनिक तकनीक के सहारे कृषि क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर रही हैं.आगर-मालवा जिले के हिरणखेड़ी गांव की मेघा पाटीदार ऐसी ही एक महिला हैं, जिन्होंने केंद्र सरकार की नमो ड्रोन दीदी योजना का लाभ लेकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि पूरे क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण भी बन गई हैं. आज लोग उन्हें प्यार से ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से जानते हैं.

सरकारी योजना बनी बदलाव की सीढ़ी

मेघा पाटीदार बताती हैं कि उन्हें कृषि और तकनीक से जुड़कर कुछ नया करने की इच्छा थी. इसी दौरान उन्हें नमो ड्रोन दीदी योजना के बारे में जानकारी मिली.योजना के तहत उन्होंने ड्रोन संचालन और कृषि उपयोग से संबंधित विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वर्ष 2024 में उन्हें सरकार की ओर से निःशुल्क कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया गया.

ड्रोन मिलने के बाद मेघा ने इसे केवल एक उपकरण के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे अपने भविष्य और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाया. उन्होंने किसानों के खेतों में ड्रोन आधारित सेवाएं देना शुरू किया और देखते ही देखते क्षेत्र में उनकी पहचान बन गई.

खेतों में पहुंचा आधुनिक कृषि का नया साथी

आज मेघा पाटीदार किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, कीटनाशकों और अन्य कृषि रसायनों का छिड़काव कर रही हैं. आधुनिक तकनीक के उपयोग से वे कम समय में अधिक क्षेत्र में सटीक स्प्रे कर पाती हैं.

पारंपरिक तरीके से जहां एक हेक्टेयर खेत में छिड़काव करने में काफी समय और श्रम लगता है, वहीं ड्रोन की मदद से यह काम मात्र 5 से 10 मिनट में पूरा हो जाता है.इससे किसानों को मजदूरी लागत कम करने के साथ-साथ समय की भी बचत होती है.

प्रति हेक्टेयर भुगतान से बढ़ी आय

ड्रोन सेवाओं के बदले मेघा को प्रति हेक्टेयर के आधार पर भुगतान प्राप्त होता है. खरीफ और रबी दोनों सीजन में लगातार काम मिलने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं और अपने परिवार की आय में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं.

मेघा का कहना है कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे तकनीक आधारित कृषि सेवा से रोजगार प्राप्त कर सकेंगी, लेकिन आज ड्रोन संचालन उनके लिए सम्मानजनक आजीविका का माध्यम बन चुका है.

किसानों को भी दे रहीं आधुनिक खेती की जानकारी

मेघा केवल ड्रोन उड़ाने तक सीमित नहीं हैं. वे किसानों को नैनो यूरिया और नैनो पेस्टिसाइड के उपयोग के फायदे भी समझाती हैं. किसानों को बताती हैं कि संतुलित मात्रा में उर्वरकों और रसायनों के उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत भी कम की जा सकती है.

उनकी कोशिश रहती है कि अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं और वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ें.यही कारण है कि किसान भी उनकी सलाह को महत्व देने लगे हैं.

महिला सशक्तिकरण की बन रही मिसाल

मेघा पाटीदार मानती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए अवसरों की कमी नहीं है, आवश्यकता केवल सही मार्गदर्शन और संसाधनों की है. उनका कहना है कि पहले गांवों में महिलाएं घर और परिवार तक सीमित रहती थीं, लेकिन अब शिक्षा, तकनीक और सरकारी योजनाओं के माध्यम से वे हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं.

वे कहती हैं कि नमो ड्रोन दीदी योजना ने उन्हें केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान और समाज में एक नई पहचान भी दी है.आज वे अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित कर रही हैं.

ड्रोन तकनीक से किसानों को हो रहा फायदा

ड्रोन तकनीक के माध्यम से खाद और कीटनाशकों का छिड़काव अधिक सटीकता से किया जाता है. इससे रसायनों की बर्बादी कम होती है और फसलों को आवश्यक मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त होते हैं. साथ ही खेतों में मजदूरों की कमी की समस्या का समाधान भी हो रहा है.

विशेषज्ञों के अनुसार ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं भविष्य की खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं और इससे खेती अधिक लाभकारी एवं तकनीक आधारित बन रही है.

प्रधानमंत्री के प्रति जताया आभार

मेघा पाटीदार ने इस योजना के लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इस पहल ने उनके जीवन की दिशा बदल दी है. आज वे सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं और अनेक महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं.

नई सोच, नई तकनीक और नई पहचान

मेघा पाटीदार की कहानी यह साबित करती है कि जब महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और आधुनिक संसाधन मिलते हैं तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं.नमो ड्रोन दीदी योजना ग्रामीण भारत की महिलाओं को रोजगार, आत्मनिर्भरता और तकनीकी सशक्तिकरण की नई उड़ान देने का काम कर रही है. मेघा जैसी महिलाएं इस बदलाव की जीवंत तस्वीर बनकर उभर रही हैं, जो घूंघट से निकलकर अब ड्रोन उड़ाते हुए गांवों की तस्वीर बदल रही हैं. 

 

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