मोदी सरकार के 12 साल: सरकारी योजनाएं कितनी असरदार, क्‍या बोले महाराष्‍ट्र के किसान?

मोदी सरकार के 12 साल: सरकारी योजनाएं कितनी असरदार, क्‍या बोले महाराष्‍ट्र के किसान?

मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर सरकारी योजनाओं के जमीनी असर की पड़ताल में महाराष्ट्र के जालना और गडचिरोली से किसानों के अनुभव सामने आए. जालना में किसानों ने बागवानी, ड्रिप सिंचाई और सोलर पंप से खेती में बदलाव की बात कही, जबकि गढ़चिरौली में प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता को खेती के खर्च संभालने में मददगार बताया गया.

Jalna Farmer on modi govt 12 yearsJalna Farmer on modi govt 12 years
क‍िसान तक
  • जालना/गढ़चिरौली,
  • Jun 04, 2026,
  • Updated Jun 04, 2026, 4:48 PM IST

केंद्र में मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के मौके पर विभिन्न सरकारी योजनाओं के जमीनी असर को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभव सामने आ रहे हैं. कृषि क्षेत्र में भी योजनाओं के प्रभाव को लेकर चर्चा के बीच महाराष्ट्र के जालना और गढ़चिरोली जिलों के कुछ किसानों ने खेती में हुए बदलाव और राहत के अपने अनुभव साझा किए हैं. किसानों का कहना है कि सिंचाई, बागवानी, सौर ऊर्जा और प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता से जुड़ी योजनाओं ने उनकी जरूरतों के अनुसार खेती के तरीके और खर्च प्रबंधन पर असर डाला है.

बागवानी की ओर बढ़े जालना के किसान

जालना जिले के अंतरवाला गांव में कुछ किसानों ने पारंपरिक फसल पैटर्न से हटकर बागवानी को अपनाया है. किसान संताजी भोईटे के पास करीब साढ़े पांच एकड़ जमीन है. उन्‍हाेंने कहा कि पहले वे सोयाबीन और कपास की खेती करते थे, लेकिन योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने मौसंबी बाग लगाने का फैसला किया.

किसान ने बताया कि शुरुआती वर्षों में मिली सहायता से बाग तैयार करने की लागत संभालने में मदद मिली. वर्तमान में उनके खेत में मौसंबी, आम और सीताफल के बाग हैं. उन्होंने दावा किया कि एक एकड़ मौसंबी बाग से उन्हें सालाना करीब आठ लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है.

कृषि यंत्रीकरण योजना से हुआ फायदा

उन्होंने कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत ट्रैक्टर लिया, राष्ट्रीय बागवानी मिशन के जरिए खेत तालाब तैयार कराया और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप सिंचाई लगाई. पीएम किसान सम्मान निधि से मिलने वाली राशि का उपयोग खाद और कृषि कार्यों में किया जाता है. साथ ही मिट्टी परीक्षण से फसल के अनुसार उर्वरक उपयोग की जानकारी मिली.

इसी गांव के किसान भरत शिंदे ने प्रधानमंत्री कुसुम सोलर योजना के तहत सोलर पंप लगवाया. उनका कहना है कि पहले बिजली आपूर्ति के कारण सिंचाई प्रभावित होती थी, जबकि अब जरूरत के अनुसार खेतों में पानी दिया जा रहा है. उन्होंने मौसंबी और सीताफल की बागवानी भी शुरू की है और ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत होने की बात कही.

जालना जिला कृषि अधीक्षक गहिनीनाथ कापसे के अनुसार जिले में बड़ी संख्या में किसान पीएम किसान, फसल बीमा, सिंचाई, कुसुम और कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं से जुड़े हैं.

गढ़चिरौली में आर्थिक सहायता बनी खेती का सहारा

इधर, गढ़चिरौली जिले के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में किसानों ने प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता वाली योजनाओं को खेती के लिए उपयोगी बताया है. कृषि विभाग के अनुसार, जिले में करीब एक लाख 54 हजार किसान विभिन्न योजनाओं का लाभ ले रहे हैं.

मुडझा क्षेत्र की महिला किसान प्रतिभा प्रभाकर चौधरी और किसान गोविंद तुकाराम सुरपाम का कहना है कि उनकी खेती सीमित जमीन पर आधारित है और अतिरिक्त आय के अवसर सीमित हैं. ऐसे में सरकारी सहायता राशि खेती से जुड़े जरूरी खर्चों को संभालने में मदद करती है.

किसानों ने कहा कि खाते में आने वाली राशि का उपयोग बीज खरीदने, फसल सुरक्षा दवाओं की व्यवस्था करने और मजदूरी भुगतान जैसे कार्यों में किया जाता है. आर्थिक तंगी के समय यह सहायता खेती जारी रखने में मददगार बनती है. जालना से गौरव विजय साली/गढ़चिरौली से वेंकटेश दुदमवार की रिपोर्ट)

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