
महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए 2 लाख रुपये तक के कृषि लोन को माफ करने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई. सरकार का कहना है कि इस फैसले से राज्य के करीब 56 लाख किसानों को फायदा मिलेगा. इस योजना का नाम "पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ती योजना" रखा गया है.
सरकार के अनुसार जिन किसानों का अल्पकालीन फसल ऋण (शॉर्ट टर्म क्रॉप लोन) ब्याज समेत 2 लाख रुपये तक बकाया है, उनका पूरा कर्ज माफ किया जाएगा. इसके लिए जरूरी है कि यह ऋण 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 के बीच लिया गया हो और 30 सितंबर 2025 तक बकाया रहा हो. साथ ही किसान ने 31 मार्च 2026 तक उसका भुगतान नहीं किया हो.
जिन किसानों का बकाया लोन 2 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें भी राहत दी जाएगी. ऐसे किसानों को पहले 2 लाख रुपये से ऊपर की राशि खुद जमा करनी होगी. इसके बाद सरकार उनके 2 लाख रुपये तक के कर्ज को माफ कर देगी. किसानों को यह राशि जमा करने के लिए 31 मार्च 2027 तक का समय दिया गया है.
सरकार ने केवल बकाया कर्ज वाले किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए भी विशेष प्रोत्साहन की व्यवस्था की है. जो किसान वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में से कम से कम दो वर्षों में समय पर फसल लोन चुका चुके हैं, उन्हें अधिकतम 50 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.
हालांकि इसके लिए यह भी जरूरी होगा कि वर्तमान वित्त वर्ष में लिया गया ऋण भी समय पर चुकाया जाए.
सरकार ने एक और व्यवस्था की है जिसके तहत जिन किसानों का बकाया 50 हजार रुपये से अधिक है, वे अतिरिक्त राशि का भुगतान करके 50 हजार रुपये तक की सहायता प्राप्त कर सकते हैं. इससे उन्हें पूरी तरह कर्ज मुक्त होने में मदद मिलेगी.
सरकार ने कुछ वर्गों को इस योजना से बाहर रखा है. राजनीतिक दलों के पदाधिकारी, सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता और सहकारी संस्थाओं में 25 हजार रुपये से अधिक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी इस योजना के पात्र नहीं होंगे.
इस योजना की निगरानी मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति करेगी. लाभ पाने के लिए किसानों को आधार सत्यापन कराना होगा और एग्रीस्टैक प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण करना अनिवार्य होगा. सरकार इसके लिए एक अलग डिजिटल पोर्टल भी तैयार करेगी.
यह योजना राष्ट्रीयकृत बैंकों, निजी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों और प्राथमिक कृषि साख समितियों से लिए गए कृषि ऋणों पर लागू होगी.
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि योजना केवल घोषणा बनकर न रह जाए और इसका लाभ वास्तव में किसानों तक पहुंचे. विपक्ष का कहना है कि राज्य के सभी किसानों के लिए पूर्ण कर्जमाफी की व्यवस्था होनी चाहिए.
वहीं किसान संगठनों ने भी 2 लाख रुपये की सीमा बढ़ाने की मांग की है. उनका कहना है कि कई किसानों का कर्ज इससे अधिक है और उन्हें भी पूरी राहत मिलनी चाहिए. कुछ किसान नेताओं ने यह भी सुझाव दिया है कि समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को 50 हजार रुपये की बजाय 1 लाख रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाए.
महाराष्ट्र में लगातार बढ़ती खेती लागत, मौसम की मार और बाजार की अनिश्चितता के बीच यह योजना किसानों को आर्थिक राहत देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. यदि योजना का सही तरीके से क्रियान्वयन होता है तो लाखों किसानों को कर्ज के बोझ से राहत मिल सकती है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है.
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