
सोमवार को पटना में गन्ना आधारित उद्योगों की स्थापना और गन्ना विकास एवं विस्तार को लेकर गन्ना उद्योग विभाग और राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड (एनएफसीएसएफ), नई दिल्ली के बीच एमओयू किया गया. इस एमओयू को लेकर विभाग का मानना है कि यह गन्ना और चीनी उद्योग के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा. विभाग के संयुक्त ईखायुक्त जयप्रकाश नारायण सिंह और एनएफसीएसएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नायकनावरे ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए.
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने कहा कि यह एमओयू राज्य में गन्ना विकास, क्षेत्र विस्तार और चीनी उद्योग को दोबारा पटरी पर लाने के लिए किया गया है. इसे केवल एक औपचारिक दस्तावेज न माना जाए, बल्कि बिहार के किसानों, उद्योग और समग्र अर्थव्यवस्था के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प है. आगे उन्होंने कहा कि बिहार में गन्ना क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन अभी भी हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे गन्ने की कम उत्पादकता, बंद पड़ी चीनी मिलें और आधुनिक तकनीकों का सीमित उपयोग.
सात निश्चय-3 के अंतर्गत ‘समृद्ध उद्योग, सशक्त बिहार’ के तहत राज्य की कई बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर शुरू करने और नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए बिहार सरकार सक्रिय दिख रही है. वहीं, इस एमओयू को लेकर आयोजित कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने कहा कि नई सरकार बनने के साथ ही सरकार ने बंद मिलों को खोलने के साथ ही 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है. चीनी मिलों के लिए गन्ना जरूरी है, इसके लिए लगातार काम किए जा रहे हैं.
एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष हर्षबर्धन पाटिल ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जो सपना है, उसे पूरा करने के लिए गन्ना उद्योग विभाग काम कर रहा है. सकरी और रैयाम चीनी मिलों का डीपीआर बनाने का काम शुरू कर दिया गया है. बिहार में चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध हो, इसके लिए उत्पादन बढ़ाना होगा. इसमें एआई का उपयोग बढ़ाया जाएगा.