केले की नगरी कुशीनगर पहुंचा ‘किसान कारवां', किसानों को मिली उन्नत खेती की नई दिशा

केले की नगरी कुशीनगर पहुंचा ‘किसान कारवां', किसानों को मिली उन्नत खेती की नई दिशा

कार्यक्रम की शुरुआत में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया. किसानों को योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित किया गया.

कुशीनगर पहुंचा ‘किसान कारवां'कुशीनगर पहुंचा ‘किसान कारवां'
धर्मेंद्र सिंह
  • Kushinagar,
  • Mar 29, 2026,
  • Updated Mar 29, 2026, 5:51 PM IST

केले की खेती के लिए मशहूर कुशीनगर जनपद के सेमरी गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा, जहां किसानों को आधुनिक खेती, सरकारी योजनाओं और नई तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई. उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में चल रहे इस विशेष अभियान के तहत यह कारवां का 51वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया और अपनी समस्याओं का समाधान पाया.

किसानों को मिली योजनाओं की जानकारी

कार्यक्रम की शुरुआत में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया. किसानों को योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित किया गया. गन्ना विभाग के अधिकारियों ने किसानों को गन्ने की नई और उन्नत किस्मों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीकों और सही प्रबंधन से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को नवीनतम अनुसंधान और तकनीकों से अवगत कराया. वैज्ञानिकों ने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति से खेती करें तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि संभव है.

पोषण वाटिका और संतुलित आहार पर विशेष चर्चा

कार्यक्रम के पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. रिद्धि वर्मा ने पोषण पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में लोग आलू का अधिक सेवन कर रहे हैं, जिससे पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता. उन्होंने सलाह दी कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 400 ग्राम हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए. उन्होंने ‘पोषण वाटिका’ की अवधारणा को बढ़ावा देते हुए कहा कि हर घर में रंग-बिरंगी सब्जियों का उत्पादन होना चाहिए, जिससे परिवार को पर्याप्त पोषण मिल सके और महिलाओं और बच्चों में कुपोषण की समस्या कम हो.

पराली न जलाने और उन्नत बीज अपनाने की अपील

दूसरे चरण में उप कृषि निदेशक डॉ. अतिंद्र सिंह ने किसानों को पराली न जलाने की अपील की. उन्होंने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण दोनों को नुकसान होता है. उन्होंने डी-कंपोजर के उपयोग से पराली को खाद में बदलने और उन्नत गुणवत्ता वाले बीजों के प्रयोग की जानकारी दी. साथ ही पीएम कुसुम योजना और कृषि यंत्रीकरण के लाभ भी बताए.

मिट्टी स्वास्थ्य सुधार पर विशेषज्ञों का जोर

तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. पुष्पेंद्र प्रताप सिंह ने मिट्टी के गिरते स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने बताया कि मिट्टी में कार्बनिक तत्वों की मात्रा काफी कम हो गई है. उन्होंने हरी खाद, ढैंचा और फसल चक्र अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता दोनों में सुधार होगा.

पशुपालन योजनाओं से बढ़ेगी किसानों की आय

चौथे चरण में पशु चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार ने नंदिनी और मिनी नंदिनी योजना के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि देसी नस्ल की गायों के पालन पर 50 फीसदी तक सब्सिडी मिलती है, जबकि दो पशुओं के पालन पर सरकार 80 हजार रुपये तक की सहायता दे रही है.

गन्ना किसानों को मिलेंगी नई सुविधाएं

पांचवें चरण में हाटा चीनी मिल के उप प्रबंधक रविंद्र सिंह ने बताया कि गन्ना किसानों को बीज, उर्वरक और दवाओं से लेकर कटाई तक कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. उन्होंने कहा कि गन्ना एक भरोसेमंद फसल है, जो किसानों को स्थिर आय देती है.

नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी पर जोर

छठे चरण में इफको के जिला प्रभारी अभिषेक दुबे ने नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी के उपयोग के फायदे बताए. उन्होंने कहा कि इनका उपयोग करने से लागत कम होती है, मिट्टी स्वास्थ्य बेहतर रहता है और उत्पादन में वृद्धि होती है.

गन्ने के बढ़े दाम और जागरूकता अभियान

सातवें चरण में डिप्टी कमिश्नर गन्ना ए.पी. सिंह ने बताया कि सरकार ने गन्ने के मूल्य में वृद्धि की है, जिससे किसानों की आय में सुधार हो रहा है. उन्होंने गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की भी जानकारी दी.

कार्यक्रम की सराहना, ब्लॉक स्तर तक विस्तार की मांग

आठवें चरण में गन्ना यूनियन हाटा के अध्यक्ष विवेक सिंह ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों को ब्लॉक स्तर तक आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक किसान लाभान्वित हो सकें.

इफको उत्पादों पर किसानों का भरोसा कायम

नौवें चरण में वक्ताओं ने बताया कि इफको के उत्पादों पर किसानों का भरोसा आज भी कायम है. साथ ही नए उत्पाद खेती को और अधिक लाभकारी बना रहे हैं.

लकी ड्रॉ में किसानों को मिले पुरस्कार

कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार दिए गए. मीरा देवी ने प्रथम और सपना ने द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया.

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. किसान कारवां क्या है?

किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.

2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?

किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.

3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.

4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?

छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.

5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?

खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.

6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?

हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.

7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?

नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.

8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?

किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर

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