बिहार में ऑयल पाम फार्मिंग मिशन का ऐलान, किसानों को मिलेगी सब्सिडी, एक्‍सपर्ट्स ने दी चेतावनी

बिहार में ऑयल पाम फार्मिंग मिशन का ऐलान, किसानों को मिलेगी सब्सिडी, एक्‍सपर्ट्स ने दी चेतावनी

बिहार में ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण को चुना है. किसानों को पौध सामग्री और शुरुआती देखभाल के लिए सब्सिडी दी जाएगी.

Palm Oil Farming BiharPalm Oil Farming Bihar
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna,
  • Sep 21, 2026,
  • Updated Sep 21, 2026, 1:07 PM IST

बिहार की मिट्टी में धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन सहित बागवानी फसलों की खेती होती आ रही है. लेकिन, इन खेती के बीच कृषि विभाग एक अन्य फसल की खेती बिहार की मिट्टी में करने की योजना बना चुका है, जिसकी खेती को लेकर आए दिन कई तरह के सवाल उठते रहे हैं. जी हां, कृषि विभाग राज्य की मिट्टी में पाम ऑयल की  खेती करने को लेकर सरकारी खजाने से सब्सिडी देने जा रहा है.हालांकि, कृषि विभाग के इस निर्णय के बाद विशेषज्ञों की पाम तेल की खेती को लेकर अलग-अलग राय भी सामने आ रही है.

पानी की खपत, लंबे समय तक एक ही खेत में फसल चक्र में फंसने और किसान की बाजार पर निर्भरता की चिंता के बीच सवाल यह भी है कि यह खेती आने वाली पीढ़ियों के लिए मुसीबत की घंटी तो नहीं है? पाम की खेती को लेकर बिहार सरकार की इतनी सक्रियता क्यों? जिस ऑयल के प्रयोग से मानव शरीर में कई तरह के रोगों का खतरा बढ़ने की बातें कही जाती रही हैं. इन तमाम सवालों के बीच क्या बिहार की खेती को सचमुच पाम की जरूरत है या फिर सरकारी योजना को जमीन पर उतारने की जल्दबाजी में कृषि विभाग कोई गलत निर्णय तो नहीं लेने जा रहा है?

ऑयल पाम की खेती पर सरकार देगी सब्सिडी

बिहार सरकार का कृषि विभाग राज्य में किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने और देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से “नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम (NMEO-OP)” योजना का राज्य में विस्तार कर रहा है. इस योजना के माध्यम से प्रथम चरण में अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, पूर्वी चंपारण एवं पश्चिमी चंपारण जिलों को चुना गया है, जिसमें किसानों को पौध सामग्री की खरीद के लिए ₹29,000 प्रति हेक्टेयर तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी. साथ ही, पौधों के रोपण के बाद शुरुआती चार वर्षों के दौरान फसल के रखरखाव तथा रिक्त भूमि में अंतरवर्ती फसलों की खेती के लिए ₹10,500 प्रति हेक्टेयर की विशेष सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जाएगी.

किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा का मानना है कि ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देना केवल एक नई फसल को अपनाने की पहल नहीं है, बल्कि किसानों को दीर्घकालिक आय, बाजार से जुड़ाव और कृषि क्षेत्र में नए निवेश के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक व्यापक प्रयास है. 

कृषि मंत्री ने राज्य के किसानों से अपील करते हुए कहा कि “जहां भूमि और जलवायु ऑयल पाम की खेती के लिए अनुकूल है, वहां किसान पारंपरिक फसलों के साथ इस फसल को भी अपनाने पर विचार करें. राज्य सरकार किसानों को जरूरी सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी.”

राज्य में पाम ऑयल की खेती सही नहीं: विशेषज्ञ

कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर के पूर्व हेड एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार द्विवेदी सरकार के इस फैसले को सही नहीं मान रहे हैं. वह कहते हैं कि ऑयल पाम की खेती दलदली मिट्टी में की जाती है और इसके पौधे पानी काफी मात्रा में सोखते हैं. बिहार में वैसे ही पानी का जलस्तर कम होता जा रहा है. 

उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि हाल-फिलहाल राज्य में प्रतिवर्ष 15 सेंटीमीटर से 50 सेंटीमीटर पानी का जलस्तर कम हो रहा है. ऐसी स्थिति में इस नई फसल की खेती किसी भी लिहाज से सही नहीं है. इस फसल की खेती इंडोनेशिया में बड़े पैमाने पर की जाती है, लेकिन आज वहां के जंगल, जमीन और जलवायु को काफी नुकसान पहुंचा है.

कृषि विभाग ने बताया कि किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर एवं व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने को लेकर ऑयल पाम के Fresh Fruit Bunches (FFBs) की खरीद के लिए संबंधित उद्योगों एवं प्रसंस्करण इकाइयों के साथ सीधा एवं स्थिर समन्वय स्थापित किया जाएगा. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे पाम तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को देखते हुए ‘Viability Price’ की व्यवस्था की गई है. वहीं, बाजार मूल्य में गिरावट की स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा अंतर राशि की भरपाई की जाएगी.

मिट्टी को बंजर बनाने की रखता है ताकत

कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कुमार द्विवेदी कहते हैं कि पाम तेल की खेती के दौरान इसके पौधे काफी मात्रा में न्यूट्रिशन को ग्रहण करते हैं. इसकी वजह से नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश काफी मात्रा में सोख लेते हैं.  वहीं, कई सालों के बाद मिट्टी करीब-करीब बंजर हो जाती है. 

आगे उन्होंने कहा कि वर्ल्ड लेवल पर कोई भी विशेषज्ञ या डॉक्टर यह नहीं कह सकता कि पाम ऑयल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. इसकी वजह से कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग सहित अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. बिहार का हेल्थ इंडेक्स ऐसे ही पीछे चल रहा है और उसमें इस तरह की खेती घाटे के अलावा कुछ नहीं देने वाली है.

वैज्ञानिक बोले- पाम ऑयल के लिए जमीन बढ़िया

कृषि विज्ञान केंद्र अररिया के हेड डॉ. राजीव का कहना है कि पाम तेल की खेती के लिए उनके जिले की मिट्टी ठीक है. उन्होंने बताया कि इसकी खेती के लिए अम्लीय जमीन होनी चाहिए, जिसका PH साढ़े पांच से साढ़े सात के बीच होना चाहिए. 

बीएयू सबौर की यूनिवर्सिटी प्रोफेसर, उद्यान विभाग की डॉ. रूबी रानी भी मानती हैं कि पाम ऑयल के जो पौधे होते हैं, वे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश सहित पानी का अवशोषण अधिक करते हैं, लेकिन उनका कहना है कि इससे जो तेल प्राप्त होता है, वह सरसों की फसल की तुलना में करीब 10 गुना अधिक उत्पादन होता है. 

हम पाम ऑयल का इस्‍तेमाल केवल खाने की चीजों में ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी कर सकते हैं. अभी जो हम अन्य देशों पर इसके लिए निर्भर हैं, उसमें कमी आएगी. इसके अलावा उन्होंने कहा कि जिन जिलों का सेलेक्शन किया गया है, वे जिले इसकी खेती के लिए ठीक हैं.

किसानों ने दिए ये सुझाव

किसान सुमंत हर्षवर्धन कहते हैं कि सरकार सबसे पहले उन योजनाओं पर ध्यान दे, जिसे वह पहले से करती आ रही है. उसके बाद इस नई फसल की खेती पर विचार-विमर्श करें. केवल पाम तेल की खेती से किसानों को जितना फायदा नहीं होगा, उससे कहीं ज्यादा इसके पौधे और बीज बेचने वाले को फायदा होगा. 

बिहार सरकार की ओर से पहले भी मेंथा, लेमनग्रास सहित अन्य फसलों की खेती को लेकर योजनाएं चलाई गईं, लेकिन हाल-फिलहाल उसकी स्थिति क्या है, इस पर भी सरकार को सोचने की जरूरत है. 

किसान बाजार और सही दाम के चक्कर में इधर-उधर भटक रहा है. यहां तक कि पॉलीहाउस को लेकर भी सरकार की ओर से बड़े स्तर पर सब्सिडी दिया गया, लेकिन आज जमीनी हकीकत कुछ और है.

4 से 5 साल में आने लगता है फल

बीएयू विश्वविद्यालय के उद्यान विभाग की प्रोफेसर डॉ. रूबी रानी कहती हैं कि ऑयल पाम के पौधों में 4 से 5 साल बाद फल आना शुरू हो जाता है. इससे काफी मात्रा में तेल प्राप्त होता है. 

आज देश में अधिकांश खाद्य पदार्थों में पाम ऑयल का उपयोग किया जा रहा है. वहीं, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा बताते हैं कि ऑयल पाम एक दीर्घकालिक फसल है. शुरुआती स्थापना और देखभाल के बाद यह फसल लगभग 25 से 30 वर्षों तक उत्पादन देने में सक्षम होती है.

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