आपदा में मछली पालकों को राहत, नाव-जाल से फार्म तक देगी बिहार सरकार मदद

आपदा में मछली पालकों को राहत, नाव-जाल से फार्म तक देगी बिहार सरकार मदद

बिहार सरकार ने आपदा से प्रभावित मछुआरों और मछली पालकों को बड़ी राहत दी है. बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं में नाव, जाल, मछली चारा और मत्स्य फार्मों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी. आंशिक और पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त नाव और जाल के लिए अलग-अलग सहायता राशि तय की गई है. सरकार का उद्देश्य प्रभावित मछली पालकों की आजीविका को जल्द पटरी पर लाना और मत्स्य पालन गतिविधियों को दोबारा शुरू करने में मदद करना है.

मछली पालन का होगा बड़ा विस्तारमछली पालन का होगा बड़ा विस्तार
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna,
  • Sep 17, 2026,
  • Updated Sep 17, 2026, 4:55 PM IST

बिहार में आपदा के दौरान मछली पालकों को होने वाले नुकसान की भरपाई को लेकर सरकार की ओर से एक बड़ी राहत की खबर आई है. बाढ़ से लेकर अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अगर बिहार के मछुआरों और मछली किसानों को किसी तरह का नुकसान होता है तो उन्हें अब घबराने की जरूरत नहीं है. बिहार सरकार की ओर से उन्हें अब आर्थिक तौर पर मदद करने का निर्णय लिया गया है. वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में आपदा से क्षतिग्रस्त नाव, जाल, मछली का चारा और मत्स्य फार्मों को दोबारा शुरू करने के लिए निर्धारित मानदंड के अनुसार सहायता राशि तय की गई है.

बता दें कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय और बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के बाद मछली पालकों को राहत देने के लिए सहायता के विभिन्न मानदंड निर्धारित किए गए हैं. मछुआरों और मछली पालन से जुड़े किसानों को सहायता मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में दी जाएगी. सरकार का मानना है कि आपदा के ठीक बाद मछली पालकों को मिलने वाली राहत उनकी आजीविका को दोबारा पटरी पर लाने में सहायक सिद्ध होगी.

नाव, जाल खराब होने पर मिलेगी इतनी राशि

बिहार सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आपदा में अगर किसी मछुआरे या मछली पालक की गैर-यंत्रीकृत नाव और जाल क्षतिग्रस्त होता है या गुम होता है, ऐसी स्थिति में उन्हें आर्थिक मदद की जाएगी. आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त नाव की मरम्मत के लिए 6,000 रुपये, जबकि पूरी तरह क्षतिग्रस्त नाव को बदलने के लिए 15,000 रुपये दिए जाएंगे. इसी तरह आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त जाल की मरम्मत के लिए 3,000 रुपये और पूरी तरह क्षतिग्रस्त जाल को बदलने के लिए 4,000 रुपये की सहायता मिलेगी. वहीं, इस योजना का लाभ वैसे ही लोगों को दिया जाएगा जो हाल के समय में आपदा से जुड़ी किसी तरह की सरकारी योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं.

चारे से लेकर फार्म बनाने तक आर्थिक मदद

आपदा के दौरान अगर किसी किसान का मछलियों के चारे को लेकर नुकसान हुआ है तो ऐसी स्थिति में सरकार की ओर से उसके चारे को लेकर भी आर्थिक मदद की जाएगी. छोटे और सीमांत मछली किसानों को आपदा के बाद मछली के चारे के लिए 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से इनपुट सब्सिडी दी जाएगी. वहीं, मछली पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की योजना के तहत मिलने वाली एकबारगी सब्सिडी को इस प्रावधान से अलग रखा गया है. इसके साथ ही आपदा से क्षतिग्रस्त मत्स्य फार्मों और तालाबों को फिर से उपयोग योग्य बनाने के लिए भी आर्थिक सहायता सरकार देगी, जिसमें तालाब से गाद निकालने, पुनरुद्धार कराने और मछली फार्मों की मरम्मत के लिए 18,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता निर्धारित की गई है.

किसान योजना का लाभ लेने के लिए यहां करें संपर्क

आपदा प्रभावित मछुआरे और मत्स्य किसान सहायता से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए अपने जिले के जिला मत्स्य पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की वेबसाइट और मत्स्य निदेशालय, बिहार की वेबसाइट पर भी संबंधित जानकारी उपलब्ध है. हालांकि, सरकार की ओर से यह बताया गया है कि इन तीनों श्रेणियों का लाभ उन्हें ही मिलेगा जो आपदा से जुड़ी हुई अन्य किसी योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं.

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