
बिहार में गन्ना खेती के विस्तार को लेकर राज्य सरकार कई ठोस कदम उठा रही है. इसी क्रम में अब राज्य सरकार ने गन्ना की खेती से जुड़े जैविक कृषि इनपुट के इस्तेमाल को लेकर किसानों को आर्थिक मदद करने का फैसला लिया है. गन्ना उद्योग विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए "गन्ना की खेती में जैविक इनपुट के इस्तेमाल को प्रोत्साहन की योजना” शुरू की है. इसके तहत किसानों को सरकार की ओर से जैव उर्वरक, जैव कीटनाशी, जैव फफूंदनाशी, हरी खाद (Green Manure), कम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट और इंटीग्रेटेड कीट प्रबंधन से संबंधित इनपुट की खरीद और इस्तेमाल पर सब्सिडी दी जाएगी.
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने कहा कि राज्य सरकार गन्ना किसानों की उत्पादन लागत कम करने और उनकी आय बढ़ाने को लेकर लगातार काम कर रही है. गन्ना की खेती में जैविक इनपुट के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए यह योजना लाई गई है. इससे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी, मिट्टी की सेहत में सुधार होगा और लॉन्गटर्म में गन्ने की उत्पादकता और चीनी रिकवरी बढ़ाने में मदद मिलेगी. उन्होंने किसानों को इस योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने का आग्रह किया.
गन्ना उद्योग विभाग ने बताया कि जैविक और पर्यावरण अनुकूल गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहित करने वाली यह योजना बिहार के सभी 38 जिलों में लागू की गई है. योजना का लाभ लेने के लिए किसान 15 नवंबर 2026 तक विभागीय केन केयर पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं.
इसके अलावा विभाग की वेबसाइट ccs.bihar.gov.in पर जाकर अधिक जानकारी हासिल कर सकेंगे. इसके साथ ही किसान के पास गन्ना किसान पंजीकरण आईडी होना आवश्यक है. इसके अंतर्गत रैयत एवं गैर-रैयत, दोनों श्रेणियों के गन्ना किसान पात्र होंगे.
हर पात्र किसान को अधिकतम एक एकड़ गन्ना क्षेत्र के लिए सब्सिडी दी जाएगी. किसान योजना के एक या एक से ज्यादा घटकों का फायदा हासिल कर सकेंगे. ज्यादा जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्र के सहायक निदेशक (ईख विकास) कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं.
गन्ना की खेती में जैविक इनपुट के इस्तेमाल को प्रोत्साहन की योजना के अंतर्गत किसानों को विभिन्न जैविक उपादानों की खरीद और इस्तेमाल पर अलग-अलग सब्सिडी प्रति एकड़ के हिसाब से तय की गई है.