
खेती में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से एक ओर खेत की ताकत खत्म हो रही है, वहीं आम आदमी कई रोगों से ग्रसित हो रहे हैं. बदलते जलवायु परिवर्तन और बदलती हमारी दिनचर्या के बीच लोग ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों की ओर विशेष रुचि रख रहे हैं. वहीं बिहार सरकार लोगों के बीच भारतीय ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों की डिमांड को देखते हुए किसानों को नेचुरल फार्मिंग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. प्राकृतिक खेती करने के लिए किसानों को अनुदान भी दे रही है. हाल के समय में जहां बिहार में करीब 20,000 हेक्टेयर में करीब 50 हजार किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. वहीं इस साल सरकार नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत 5,700 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती कराने जा रही है. खेती से जुड़ी जानकारी देने के लिए सरकार की ओर से राज्य के सभी जिलों में कृषि सखियों का चयन किया गया है.
बिहार सरकार की ओर से रसायन मुक्त खेती करने वाले किसानों के लिए अनुदान भी तय किया गया है. सरकार नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को अधिकतम एक एकड़ तक 4,000 रुपए प्रति एकड़ की दर से अनुदान दिया जाएगा. वहीं, किसानों को तकनीकी सहायता देने के लिए 800 कृषि सखियों का चयन किया गया है, जिन्हें 5,000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाएगा. जो किसानों को खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बजाय गोबर, गोमूत्र और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने की सलाह देंगी और साथ ही साथ उन्हें ऑर्गेनिक खेती को लेकर तकनीकी जानकारी भी देंगी.
बिहार में हाल के समय में सभी 38 जिलों में पहले से 20 हजार हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती हो रही है और करीब 50,000 के आसपास किसान जुड़े हुए हैं. वहीं प्राकृतिक खेती से जुड़ी जानकारी समय-समय पर किसानों को मिले, इसके लिए सरकार की ओर से 266 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर बनाए गए हैं. वहीं अब सरकार हर 3 क्लस्टर पर 2 बायो रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) लगाने जा रही है. इसके साथ ही बिहार राज्य जैविक मिशन योजना के तहत पक्का वर्मी कम्पोस्ट पीट इकाई, गोबर गैस इकाई और व्यावसायिक वर्मी कम्पोस्ट इकाई लगाने पर अनुदान दिया जा रहा है.
राज्य के करीब सभी 38 जिलों में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत ऑर्गेनिक खेती की जा रही है. जिसमें धान, गेहूं की खेती तो किसान कर ही रहे है. साथ ही टमाटर, बैंगन, भिंडी, गोभी, मिर्च जैसी सब्जियां और ड्रैगन फ्रूट, अमरूद, पपीता, केला जैसे फलों की भी खेती की जा रही है. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की शुरुआत 2025 में की थी.
हालांकि बिहार में बीते कुछ सालों में प्राकृतिक खेती की ओर किसानों का झुकाव बढ़ा है, लेकिन एक तबका ऐसा भी है जो इस खेती से दूरी भी बना रहा है. वजह यह है कि बेहतर बाजार नहीं मिलना. सरकारी स्तर पर जहां प्राकृतिक खेती के लिए अनुदान दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके बेहतर बाजार को लेकर भी निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है.