आत्मा की ट्रेनिंग से बदल रही किसानों की किस्मत, नई तकनीकों से बढ़ रही आमदनी

आत्मा की ट्रेनिंग से बदल रही किसानों की किस्मत, नई तकनीकों से बढ़ रही आमदनी

बिहार में कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) किसानों को नई खेती तकनीकों का प्रशिक्षण देकर उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद कर रहा है. किसान पाठशाला, डेमोंस्ट्रेशन और एक्सपोजर विजिट के जरिए किसान बागवानी और प्राकृतिक खेती अपनाकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं.

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अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • पटना,
  • Oct 21, 2026,
  • Updated Oct 21, 2026, 2:18 PM IST

खेती अब केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रह गई है. बदलते समय के साथ किसान नई तकनीकों, आधुनिक खेती और लाभकारी फसलों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं. बिहार में किसानों को इस दिशा में आगे बढ़ाने का काम कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) कर रहा है. राज्य के लगभग सभी जिलों में सक्रिय आत्मा किसानों को नई कृषि तकनीकों, उन्नत फसल प्रबंधन और वैकल्पिक खेती के तौर-तरीकों की जानकारी देकर उनकी आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है.

आत्मा का मुख्य उद्देश्य किसानों तक खेती की नई तकनीक पहुंचाना है, ताकि उत्पादन लागत कम हो और फसल से मिलने वाला लाभ बढ़े. इसके लिए किसान पाठशाला, खेत पर प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन), प्रशिक्षण कार्यक्रम और एक्सपोजर विजिट जैसे कार्यक्रम चलाए जाते हैं. इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को उनके खेतों पर ही नई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है.

पपीते की खेती से बढ़ी कमाई

मधेपुरा जिले के किसान सुधीर कुमार बताते हैं कि खेती में सफलता पाने के लिए नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है. उनका कहना है कि पहले वे केवल पारंपरिक फसलों की खेती करते थे, लेकिन आत्मा के प्रशिक्षण से उन्हें बागवानी फसलों की खेती करने की प्रेरणा मिली.

आत्मा की सलाह पर उन्होंने पपीते की खेती शुरू की. सुधीर के अनुसार, एक बार पौधरोपण करने के बाद करीब तीन साल तक लगातार उत्पादन मिलता है. कम लागत वाली इस खेती से उन्हें बाजार भाव के अनुसार सालाना डेढ़ लाख रुपये से लेकर ढाई लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है. उनका मानना है कि आत्मा के मार्गदर्शन ने उनकी खेती का तरीका और मुनाफा दोनों बदल दिया है.

प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे किसान

वैशाली जिले के किसान विनय कुमार सिंह भी आत्मा की पहल से लाभान्वित किसानों में शामिल हैं. उन्होंने प्रशिक्षण के बाद प्राकृतिक खेती को अपनाया है. अब वे रासायनिक खादों की जगह वर्मी कम्पोस्ट, केंचुआ खाद और नीम खली का इस्तेमाल करते हैं.

विनय का कहना है कि इससे फसल की क्वालिटी बेहतर हुई है और मिट्टी की सेहत में भी सुधार आया है. साथ ही खेती की लागत भी नियंत्रित हुई है. उनका मानना है कि वैज्ञानिक जानकारी और प्रशिक्षण के बिना खेती में बदलाव संभव नहीं है.

किसान पाठशाला और डेमोंस्ट्रेशन से मिल रहा फायदा

आत्मा के तहत किसानों को केवल कक्षा आधारित प्रशिक्षण ही नहीं दिया जाता, बल्कि खेतों पर व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया जाता है. इससे किसान नई तकनीकों को सीधे देखकर समझ पाते हैं और उन्हें अपने खेतों में लागू करने का आत्मविश्वास मिलता है.

इसके अलावा किसानों को राज्य के अन्य जिलों और बिहार से बाहर भी अध्ययन भ्रमण पर भेजा जाता है. वहां वे आधुनिक कृषि मॉडल, उन्नत फसल उत्पादन तकनीक और सफल किसानों के अनुभवों से सीख लेते हैं. इससे उन्हें अपने क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाशने का अवसर मिलता है.

किसानों की आय बढ़ाने में निभा रहा अहम रोल

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए केवल योजनाएं ही नहीं, बल्कि किसानों को सही प्रशिक्षण देना भी जरूरी है. बिहार में आत्मा इसी भूमिका को निभा रहा है. नई तकनीकों, बागवानी, प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के प्रशिक्षण की बदौलत अनेक किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं.

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