तालाबों पर सोलर पैनल, नीचे होगा मछली पालनबिहार में अब एक ही तालाब से बिजली उत्पादन और मछली पालन, दोनों को बढ़ावा देने की तैयारी है. राज्य सरकार की ‘ऊपर बिजली, नीचे मछली’ योजना के तहत तालाबों और जलाशयों की सतह पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जबकि पानी में मछली पालन जारी रहेगा. दरभंगा और सुपौल में पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब इस मॉडल को छह और जिलों में लागू करने की योजना है. इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा.
बिहार सरकार की ‘ऊपर बिजली, नीचे मछली’ योजना का उद्देश्य एक ही जलक्षेत्र का इस्तेमाल बिजली उत्पादन और मत्स्य पालन, दोनों के लिए करना है. इसके तहत तालाबों और जलाशयों की सतह पर तैरते हुए सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जिनसे सौर ऊर्जा के जरिए बिजली का उत्पादन होगा. वहीं, जलाशय में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन किया जाएगा.
इस तरह बिजली उत्पादन और मछली पालन से आय के दो स्रोत तैयार हो सकेंगे. सरकार का मानना है कि मछली पालन के दौरान पानी में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखने के लिए एयरजेट चलाने में काफी बिजली खर्च होती है. सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से बिजली पर होने वाले खर्च और कुल उत्पादन लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. इसके अलावा, तालाब की सतह पर सोलर पैनल लगने से पानी को आंशिक छाया भी मिलती है.
‘ऊपर बिजली, नीचे मछली’ योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दरभंगा और सुपौल जिले में लागू किया गया है. इसी साल सितंबर में सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड की दीनापट्टी पंचायत के सखुआ गांव स्थित राजा पोखर में 525 किलोवाट पीक क्षमता वाला फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाया गया. यहां प्रतिदिन करीब 700 से 800 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है. वहीं, दरभंगा जिले के कादिराबाद मोहल्ले के एक तालाब में भी इस योजना को लागू किया गया है.यहां सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ मछली पालन भी किया जा रहा है. इस मॉडल से बिजली उत्पादन के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है.
दरभंगा और सुपौल में पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब राज्य सरकार इस योजना का विस्तार छह और जिलों में करने की तैयारी में है. इसके तहत जमुई, रोहतास, नवादा, बांका, मुंगेर और कैमूर को शामिल किया गया है. इस योजना का उद्देश्य सौर ऊर्जा उत्पादन और मत्स्य पालन, दोनों को बढ़ावा देना है. साथ ही, ऐसे क्षेत्रों में भी बिजली उत्पादन की संभावनाएं विकसित करना है, जहां बिजली की उपलब्धता सीमित रही है.
बिहार सरकार के अनुसार, राज्य का सबसे बड़ा जल-सौर ऊर्जा संयंत्र नवादा में जल्द शुरू होने वाला है. इसके लिए जलाशय से रजौली पावर हाउस तक 33 केवी की ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है. वहीं, जलाशय की सतह पर सोलर पैनल भी लगा दिए गए हैं. ‘ऊपर बिजली, नीचे मछली’ मॉडल पर आधारित इस परियोजना में पानी की सतह पर तैरते सोलर पैनलों से बिजली का उत्पादन किया जाएगा.
इस प्लांट से आसपास के करीब 90 गांवों को बिजली आपूर्ति का लाभ मिलने की उम्मीद है. इसके साथ ही जलाशय में मछली पालन भी जारी रहेगा. इस तरह यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, मत्स्य पालन और ग्रामीण रोजगार को एक साथ बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.
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