
तेलंगाना में जूराला परियोजना से सिंचाई का पानी छोड़ने को लेकर किसानों और सरकार के बीच विवाद बढ़ता दिख रहा है. भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (KTR) ने किसानों की खड़ी फसल बचाने के लिए जूराला से पानी छोड़ने की मांग की है. उन्होंने इस मुद्दे को लेकर BRS नेताओं की कथित गिरफ्तारी और घर में नजरबंदी पर भी सवाल उठाए हैं.
KTR ने आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री सिंगीरेड्डी निरंजन रेड्डी, सी लक्ष्मा रेड्डी और श्रीनिवास गौड़ समेत BRS के कुछ नेताओं को हिरासत में लिया गया है. उनका कहना है कि ये नेता किसानों की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे थे. KTR ने सरकार से हिरासत में लिए गए नेताओं को तुरंत रिहा करने की मांग की है. इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
KTR ने कहा कि जूराला परियोजना के पानी पर निर्भर कई इलाकों में किसानों की फसल को नुकसान का खतरा है. उनका आरोप है कि पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के बावजूद सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा जा रहा है. हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, जूराला परियोजना क्षेत्र में किसानों ने खड़ी फसल बचाने के लिए नहर में पानी छोड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया.
जूराला परियोजना पर स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब किसानों ने सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की मांग करते हुए नहर के गेट खुद खोल दिए. रिपोर्ट के अनुसार, किसानों ने लेफ्ट कैनाल के रेगुलेटर से पानी छोड़ने की कोशिश की थी. इसके बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर गेट बंद कर दिए. परियोजना क्षेत्र में पुलिस और अधिकारियों की तैनाती की गई है.
KTR ने दावा किया कि जूराला परियोजना में करीब 9 टीएमसी पानी उपलब्ध है. उनके अनुसार, पीने के पानी की जरूरत के लिए करीब 2 टीएमसी पानी पर्याप्त है और बाकी पानी का इस्तेमाल जूराला के तहत आने वाले किसानों की सिंचाई के लिए किया जाना चाहिए. हालांकि, पानी की उपलब्धता और उसे छोड़ने को लेकर KTR द्वारा दिए गए आंकड़े उनके बयान पर आधारित हैं.
जूराला परियोजना से सिंचाई का पानी नहीं मिलने को लेकर किसानों की नाराजगी सामने आई है. KTR ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है. दूसरी ओर, पानी छोड़ने और परियोजना के संचालन को लेकर सरकारी पक्ष की पूरी स्थिति इस बयान में सामने नहीं आई है. इसलिए KTR और BRS के आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
KTR ने सरकार से जूराला परियोजना के पानी पर निर्भर किसानों के लिए जल्द सिंचाई का पानी छोड़ने की मांग की है. उन्होंने हिरासत में लिए गए BRS नेताओं को रिहा करने की भी मांग की. उनका कहना है कि अगर किसानों की समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो सरकार के खिलाफ किसानों में नाराजगी बढ़ सकती है.
ये भी पढ़ें:
बिहार में ऑयल पाम फार्मिंग मिशन का ऐलान, किसानों को मिलेगी सब्सिडी, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी
लद्दाख की जंगली बेरी ने बदली किसानों की किस्मत! 25 से 200 रुपये किलो पहुंचा सिबकथन का भाव