GM फसलों पर भारत ने कड़ा रुख अपनायासोयाबीन और मक्का की खेती कर रहे किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. अमेरिका और भारत के बीच हुई नई ट्रेड डील में यह तय हुआ है कि भारत जीन-मॉडिफाइड (GM) सोयाबीन और मक्का को अपने देश में अनुमति नहीं देगा. इसका मतलब है कि किसानों को अपनी पारंपरिक फसलों की सुरक्षा और बाजार की स्थिरता बनी रहेगी.
इस डील से अमेरिका से आने वाले अन्य कृषि उत्पादों पर ड्यूटी और टैक्स में बराबरी होने की संभावना भी बनी है, जो किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए फायदे का सौदा है. अब अमेरिका के ताजे सेब, ड्राई फ्रूट्स जैसे पिस्ता और हेज़लनट सीमित मात्रा में भारत में आएंगे और कुछ पर ड्यूटी शून्य या 25% तक रह सकती है. इस डील का सीधा फायदा यह है कि भारत अपने संवेदनशील फसलों और किसानों को एग्रीकल्चर सेक्टर में सुरक्षित रख सकता है, जबकि अमेरिकी एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स के आने से मार्केट में बैलेंस बना रहता है. इस कदम से भारत के ट्रेड रिलेशन भी मज़बूत होंगे और इंटरनेशनल एग्रीकल्चर ट्रेड में देश की स्थिति बनाए रखने में मदद मिलेगी.
बातचीत के दौरान यूरोपीय संघ (EU) के साथ तय समान नियमों के अनुसार अन्य कृषि उत्पादों पर टैक्स या ड्यूटी में बराबरी हो सकती है. यानी अमेरिका से आने वाले अन्य कृषि उत्पादों पर भारत और अमेरिका में कोई ज्यादा अंतर नहीं रहेगा.
अमेरिका के राष्ट्रपति और कृषि सचिव ने कहा है कि इस डील से अमेरिका के कई कृषि उत्पाद भारत में ज्यादा बेचे जाएंगे. इससे अमेरिकी किसानों की आमदनी बढ़ेगी. अमेरिका के लिए भारत का बड़ा बाजार है और इससे दोनों देशों का व्यापार संतुलन भी सुधरेगा.
भारत ने साफ कर दिया है कि GM सोयाबीन और मक्का पर कोई समझौता नहीं होगा. हालांकि भारत अमेरिका से सोयाबीन तेल पहले ही आयात कर रहा है. अमेरिका से सोयाबीन तेल की हिस्सेदारी बहुत कम है.
अमेरिका चाहता था कि भारत GM सोयाबीन और GM मक्का को अनुमति दे, लेकिन भारत ने इसे मना कर दिया. इसके बजाय, भारत ने सोयाबीन तेल पर ड्यूटी कम करने की पेशकश की.
इस डील के तहत अमेरिका से ताजे सेब और ड्राई फ्रूट्स जैसे पिस्ता और हेज़लनट भारत में आयात किए जा सकते हैं. कुछ उत्पादों पर ड्यूटी शून्य या 25% रखी जा सकती है और मात्रा सीमित हो सकती है.
इस डील से किसानों को समझना चाहिए कि GM फसलों की अनुमति नहीं मिलने से उनकी फसल सुरक्षित है. साथ ही, अमेरिका से आने वाले कुछ उत्पादों पर ड्यूटी कम होने या सीमित मात्रा में आयात होने से बाजार में संतुलन बना रहेगा.
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