पंजाब में किसानों का रेल रोको आंदोलन 3 दिन के लिए टला, सरकार से बातचीत जारी

पंजाब में किसानों का रेल रोको आंदोलन 3 दिन के लिए टला, सरकार से बातचीत जारी

पंजाब में गेहूं खरीद में आ रही दिक्कतों को लेकर प्रस्तावित किसानों का रेल रोको आंदोलन तीन दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है. किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के अनुसार, पंजाब सरकार के साथ जारी बातचीत और समाधान की उम्मीद के चलते यह फैसला लिया गया है. सरकार ने किसानों से चर्चा के लिए समय मांगा है, जिसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी.

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असीम बस्सी
  • Chandigarh,
  • Apr 17, 2026,
  • Updated Apr 17, 2026, 11:22 AM IST

पंजाब के कई जिलों में आज (शुक्रवार) होने वाला रेल रोको आंदोलन स्थगित कर दिया गया है. किसान संगठनों ने इसे तीन दिनों के लिए रोक दिया है. उनका कहना है कि इस मुद्दे पर पंजाब सरकार से बात चल रही है और उन्हें कुछ समाधान निकलने का भरोसा मिला है. इसे देखते हुए किसान संगठनों ने अपना रेल रोको आंदोलन रोक दिया है. किसान संगठन गेहूं खरीद में आ रही अड़चनों को लेकर शुक्रवार को कई जिलों में रेल रोको आंदोलन का ऐलान किया था.

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने जानकारी दी कि पंजाब में आज प्रस्तावित रेल रोको आंदोलन को तीन दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है. यह फैसला पंजाब सरकार के साथ चल रही बातचीत के चलते लिया गया है. सरकार ने किसानों से बातचीत के लिए तीन दिन का समय मांगा है, इसी वजह से फिलहाल आंदोलन को स्थगित किया गया है.

उन्होंने बताया कि आंदोलन के ऐलान के बाद पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर फसल खरीद में किसानों को छूट दिए जाने की मांग की है. किसान नेताओं का कहना है कि हरियाणा और राजस्थान में केंद्र सरकार पहले ही इस तरह की छूट दे चुकी है और वहां की राज्य सरकारों ने काफी पहले ही केंद्र से इस मुद्दे पर बातचीत शुरू कर दी थी.

किसान संगठनों को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए किसानों के हित में सकारात्मक समाधान निकलेगा.

खराब मौसम का गेहूं पर असर

किसान नेताओं का कहना है कि हाल ही में खराब मौसम के चलते फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है और गेहूं की क्वालिटी भी प्रभावित हुई है. इसके बावजूद न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार ने इस गंभीर स्थिति को लेकर कोई खास तत्परता दिखाई है.

उन्होंने आरोप लगाया कि मंडियों में गेहूं बड़ी मात्रा में बिना बिके पड़ा हुआ है और किसानों को मजबूरी में अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है. इस हालात का फायदा उठाकर व्यापारी किसानों की मजबूरी का गलत लाभ उठा रहे हैं.

किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि नियमों में ढील देकर खरीद प्रक्रिया तुरंत शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा. साथ ही उन्होंने मंडियों में पर्याप्त व्यवस्थाएं करने की मांग उठाई है, जिसमें जूट के बोरों की उपलब्धता के अलावा शौचालय और छायादार जगह जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं.

किसान नेताओं ने कहा कि रेल रोको आंदोलन का फैसला उनकी मजबूरी था, क्योंकि वे अपनी कड़ी मेहनत से उगाई गई फसल को इस तरह बर्बाद होते हुए नहीं देख सकते. उन्होंने केंद्र और पंजाब सरकार से बिना किसी देरी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की खरीद सुनिश्चित करने की मांग की और पूरे राज्य में किसान संगठनों से एकजुट होकर कार्रवाई करने की अपील की.

दो राज्यों में खरीद में छूट

केंद्र सरकार ने देश के दो राज्यों-हरियाणा और राजस्थान में गेहूं खरीद के नियमों में छूट दी है. इन राज्यों में बारिश की वजह से गेहूं का रंग फीका पड़ गया है टूटन भी बढ़ गई है. इससे सरकारी खरीद में अड़चनें आ रही हैं. इसके समाधान के लिए दोनों राज्यों ने केंद्र सरकार से खरीद के नियमों में छूट की मांग उठाई थी जिसे सरकार ने मान लिया है. 

हरियाणा में नए फैसले के अनुसार, पूरे हरियाणा में ‘चमक खो चुके’ गेहूं की सीमा को 70 प्रतिशत तक शिथिल किया गया है. यानी ऐसे गेहूं को भी सरकारी खरीद में शामिल किया जाएगा, जिसकी चमक बारिश या मौसम के असर से कम हो गई है.

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत देते हुए, केंद्र सरकार ने राजस्थान में रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए गेहूं खरीद के कड़े क्वालिटी मानकों में ढील दी है. अब 50% तक चमकहीन (Lustre Loss) और 15% तक सिकुड़े/टूटे दानों वाले गेहूं की सरकारी खरीद 2,625 रुपये प्रति क्विंटल (2,585 MSP + 40 रुपये राज्य बोनस) की दर से होगी.

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