
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की पारंपरिक पहचान और गौरव माने जाने वाले विष्णुभोग चावल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष पहल शुरू की है। कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन के नेतृत्व में विष्णुभोग धान और चावल के उत्पादन, विपणन तथा प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के प्रयास तेज किए गए हैं।
कलेक्टर ने कहा कि विष्णुभोग चावल लंबे समय से जीपीएम जिले की विशिष्ट पहचान रहा है। इसकी सुगंध, स्वाद और गुणवत्ता इसे अन्य किस्मों से अलग बनाती है। हालांकि समय के साथ विष्णुभोग धान का रकबा घटने और उत्पादन कम होने के कारण इसकी उपलब्धता सीमित हो गई है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत गठित स्व-सहायता समूहों की महिलाएं विष्णुभोग चावल के उत्पादन और विपणन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। प्रशासन का प्रयास है कि इन समूहों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए, जिससे महिलाओं की आय में वृद्धि हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
कलेक्टर ने कहा कि जिले के नागरिकों को स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर महिला समूहों का सहयोग करना चाहिए। इससे महिलाओं के साथ-साथ किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
कलेक्टर डॉ. देवांगन ने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे विष्णुभोग चावल की अधिक से अधिक खरीदी करें और इसकी मांग को जिले तथा राज्य की सीमाओं से बाहर तक पहुंचाने में सहयोग करें।
उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर इस उत्पाद को पर्याप्त समर्थन मिलता है तो विष्णुभोग चावल प्रदेश और देश के विभिन्न बाजारों में अपनी अलग पहचान बना सकता है। इससे जिले का मान-सम्मान और गौरव भी बढ़ेगा।
कलेक्टर ने बताया कि जिले में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों सहित विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में लोगों को विष्णुभोग चावल खरीदने और स्थानीय उत्पादों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित अन्य उत्पादों की बिक्री बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
कलेक्टर की अपील का सकारात्मक असर भी सामने आया है। नगर पालिका परिषद पेंड्रा के अध्यक्ष राकेश जलान ने स्वयं 50 किलोग्राम विष्णुभोग चावल खरीदने की घोषणा की है। इसके अलावा उन्होंने अपने सहयोगी जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान से जोड़ते हुए कुल 261 किलोग्राम चावल खरीदने की घोषणा कराई है।
जिला प्रशासन को उम्मीद है कि सामूहिक प्रयासों से विष्णुभोग चावल की मांग लगातार बढ़ेगी. इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी, महिला समूहों की आमदनी बढ़ेगी और जीपीएम जिले का यह पारंपरिक उत्पाद प्रदेश और देशभर में अपनी विशेष पहचान स्थापित कर सकेगा.