NH-68 बायपास पर पाटन के किसानों का हंगामा, जमीन अधिग्रहण और मुआवजे पर जताई नाराजगी

NH-68 बायपास पर पाटन के किसानों का हंगामा, जमीन अधिग्रहण और मुआवजे पर जताई नाराजगी

गुजरात के पाटन में NH-68 बायपास परियोजना को लेकर किसानों ने विरोध तेज कर दिया है. किसानों का आरोप है कि हाईवे का अलाइनमेंट बदलकर उनकी कीमती जमीन अधिग्रहित की जा रही है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होगा. किसानों ने डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर 3A नोटिफिकेशन रद्द करने, अलाइनमेंट की निष्पक्ष जांच कराने और बायपास को शहर से 5-6 किलोमीटर दूर ले जाने की मांग की है.

Farmer Protest SKM Kisan Sansad PatnaFarmer Protest SKM Kisan Sansad Patna
क‍िसान तक
  • पाटन,
  • Aug 27, 2026,
  • Updated Aug 27, 2026, 5:16 PM IST

गुजरात में पाटन शहर के सांडेसरपाटी, बकरातपुरा और राजपुर क्षेत्र के किसानों ने गुरुवार को डिप्टी कलेक्टर को विस्तृत ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में बताया गया है कि NH-68 राधनपुर-पाटन सेक्शन के नए बायपास रोड के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण में पुरानी और वर्तमान बाजार कीमतों के बीच बड़ा अंतर है. सांडेसरपाटी पाटन शहर के सिटी क्षेत्र में आता है और वर्तमान में यहां जमीन की बाजार कीमत 3.50 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है, जबकि सरकारी चालू जंत्री में जमीन का मूल्य काफी कम दर्शाया जा रहा है. किसानों का कहना है कि इससे अपनी आजीविका का प्रमुख साधन जमीन गंवाने वाले छोटे किसानों को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हो सकता है.

इसके अलावा पाटन नगर पालिका द्वारा शहर के विकास के लिए नए डेवलपमेंट प्लान और टीपी स्कीम की तैयारी की जा रही है. इसमें सांडेसरपाटी और बकरातपुरा के किसानों की जमीन में करीब 40 प्रतिशत तक कटौती होने की संभावना जताई गई है. किसानों का कहना है कि यदि इसी क्षेत्र से NH-68 बायपास और टीपी योजना दोनों लागू होती हैं, तो उनकी जमीन का बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा.

संदिग्ध जमीन की खरीद-बिक्री का आरोप

किसानों ने आरोप लगाया है कि बायपास का अलाइनमेंट कुछ लोगों के निजी हितों को ध्यान में रखकर बदला गया है. उनका कहना है कि राजपुर के जिन सर्वे नंबरों का उल्लेख किया गया है. वहां से आगे अलाइनमेंट राजपुर की सीमा से निकलकर सीधे सांडेसरपाटी क्षेत्र में प्रवेश करता है और एक निजी स्कूल, पार्टी प्लॉट और फार्म के आसपास से गुजरता है. किसानों ने आरोप लगाया कि इससे कुछ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं, बिल्डरों और व्यापारियों को आर्थिक लाभ पहुंचने की आशंका है.

ज्ञापन में बकरातपुरा क्षेत्र में संदिग्ध जमीन की खरीद-बिक्री का मुद्दा भी उठाया गया है. किसानों के अनुसार नोटिफिकेशन में दर्शाए गए बकरातपुरा क्षेत्र में पिछले चार महीनों के दौरान जमीन के दामों में असामान्य वृद्धि हुई है. अप्रैल 2025 से कम कीमत के दस्तावेजों के आधार पर जमीन खरीदने में दलालों और बिल्डरों द्वारा अनियमितता किए जाने की आशंका भी जताई गई है.

किसानों ने मांग की है कि उक्त ड्राफ्ट 3A नोटिफिकेशन रद्द किया जाए, बायपास अलाइनमेंट की दोबारा निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए और सरकारी पड़तर या कम कीमत वाली जमीन से सड़क निकालने का वैकल्पिक मार्ग तलाशा जाए, ताकि किसानों की जमीन और आजीविका को कम से कम नुकसान हो.

किसान नेता जयेशभाई पटेल ने बताया कि वे राजपुर, सांडेसर पाटी और बकरातपुरा गांव के किसान हैं. राधनपुर-गोजारिया के बीच बनने वाले नेशनल हाईवे का पहले हुए सर्वे के अनुसार जो अलाइनमेंट था, उसमें बदलाव करके इसे पाटन शहर की सीमा में लाया जा रहा है.

शहर के बीचोंबीच नेशनल हाईवे निकालने का विरोध

दरअसल, पूरे गुजरात में जहां सिटी एरिया आता है, वहां राज्य मार्ग तो हो सकता है, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग शहर के बीच से नहीं निकाला जाता. यह जानबूझकर लाया गया ऐसा हाईवे है, जिसके कारण किसानों की बेहद कीमती और मूल्यवान जमीन बड़े पैमाने पर अधिग्रहण में जा रही है. अभी यह क्षेत्र नगरपालिका की सीमा में होने के कारण भविष्य में टीपी और डीपी के रोड में भी किसानों की जमीन जाने की संभावना है.

पटेल ने कहा, हमारी सरकार से विनम्र मांग है कि पहले जिस तरह सर्वे किया गया था, उसी के अनुसार हाईवे का निर्माण किया जाए. शहर की सीमा से कम से कम 5 से 7 किलोमीटर दूर से हाईवे निकाला जाना चाहिए.

आप देखें कि राधनपुर से गोजारिया तक जाने वाले हाईवे में महेसाणा, राधनपुर या गोजारिया नगरपालिका की एक इंच भी जमीन नहीं जा रही है. हाल ही में बने डीसा-पारलनपुर हाईवे में भी शहर की जमीन प्रभावित नहीं हुई. फिर पाटन के किसानों के साथ ही ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है?

हमारी सरकार से एक ही मांग है कि जहां तक संभव हो, अधिक से अधिक सरकारी जमीन का उपयोग किया जाए और हाईवे को पाटन शहर से 5-6 किलोमीटर दूर ले जाया जाए. इससे गांव के किसानों को जमीन के अधिग्रहण पर जंत्री के अनुसार उचित मुआवजा मिल सकेगा और उनकी नाराजगी भी दूर होगी. साथ ही किसानों की कीमती जमीन भी बची रहेगी.

भविष्य में अगर नगरपालिका या महानगरपालिका का विस्तार होता है और जमीन अधिग्रहण की जरूरत पड़ती है, तो किसानों की कम से कम जमीन प्रभावित हो और वे विकास में सहभागी बन सकें. वर्तमान अलाइनमेंट से किसानों को भविष्य में बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है.

जयेशभाई पटेल ने कहा, हमने सरकार से मांग की है कि राष्ट्रीय राजमार्ग को पाटन शहर से 5-6 किलोमीटर दूर से निकाला जाए. राष्ट्रीय राजमार्ग सीधा और व्यवस्थित होना चाहिए, लेकिन जिस तरह से वर्तमान सर्वे में जमीन के सर्वे नंबरों को काटा जा रहा है, उससे ऐसा लगता है कि हाईवे का नक्शा सांप-सीढ़ी की तरह बनाया गया है.

यह एक सोचा-समझा और जानबूझकर किया गया काम है. ऐसे तत्वों को भी सामने लाया जाना चाहिए और ऐसा निर्णय लिया जाना चाहिए, जिससे सरकार के साथ-साथ किसानों को भी लाभ हो.(सुनील पटेल की रिपोर्ट)

MORE NEWS

Read more!