सरकार का प्याज मिशन फेल? कांदा एक्सप्रेस पर उठे सवाल, 840 की जगह 450 टन खेप ही पहुंचेगी दिल्ली

सरकार का प्याज मिशन फेल? कांदा एक्सप्रेस पर उठे सवाल, 840 की जगह 450 टन खेप ही पहुंचेगी दिल्ली

नासिक के लासलगांव से दिल्ली के आदर्शनगर के लिए रवाना हुई कांदा एक्सप्रेस को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. 840 मीट्रिक टन प्याज के बजाय सिर्फ 450 मीट्रिक टन प्याज ही भेजी जा सकी और ट्रेन को करीब 26 घंटे की देरी हुई.

कांदा एक्सप्रेसकांदा एक्सप्रेस
क‍िसान तक
  • Nashik,
  • Aug 27, 2026,
  • Updated Aug 27, 2026, 10:33 AM IST

नासिक के लासलगांव से दिल्ली के आदर्शनगर के लिए भेजी गई कांदा एक्सप्रेस को लेकर अब कई सवाल खड़े हो गए हैं. सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमतों को देखते हुए किसानों से खरीदे गए बफर स्टॉक को देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजने का फैसला किया था, लेकिन लासलगांव में प्याज की हालत देखकर किसानों ने सरकार और खरीद एजेंसियों की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. दरअसल, पिछले करीब 15 दिनों में प्याज की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. प्याज का खुदरा भाव करीब 35 रुपये किलो से बढ़कर 70 रुपये किलो तक पहुंच गया. इसके बाद सरकार ने ग्राहकों को राहत देने के लिए सस्ते दाम पर प्याज उपलब्ध कराने का फैसला किया. इसी के तहत नाफेड और NCCF द्वारा किसानों से खरीदे गए प्याज के बफर स्टॉक को 5 स्पेशल कांदा एक्सप्रेस के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजने की योजना बनाई गई.

लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आई. लासलगांव से दिल्ली के आदर्शनगर के लिए जाने वाली कांदा एक्सप्रेस में 840 मीट्रिक टन प्याज भेजने का लक्ष्य था, लेकिन सिर्फ करीब 450 मीट्रिक टन प्याज ही लोड हो सका. इतना ही नहीं, इस ट्रेन को रवाना होने में करीब 26 घंटे की देरी भी हुई. वहीं, बाकी 4 कांदा एक्सप्रेस के रद्द होने की बात भी सामने आई है.

प्याज की क्वालिटी पर उठे सवाल

कांदा एक्सप्रेस रवाना होने के दौरान किसान गणेश निम्बालकर ने इसका विरोध किया. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रेन में लदी प्याज अच्छी क्वालिटी की नहीं है. उनका कहना था कि इसमें 10 से 20 मिलीमीटर साइज की छोटी प्याज के साथ खराब और सड़ी हुई प्याज भी शामिल है. किसान ने सवाल उठाया कि अगर सरकार अच्छी क्वालिटी की प्याज दिल्ली भेज रही है तो वह किसानों को दिखाई क्यों नहीं जा रही? उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली के लोगों को खराब प्याज कम कीमत पर खिलाने के बजाय किसानों से अच्छी क्वालिटी की प्याज खरीदी जानी चाहिए. किसान गणेश निम्बालकर का आरोप है कि उन्होंने पहले भी जिलाधिकारी से प्याज के भंडारण की खराब स्थिति की शिकायत की थी.

लासलगांव के गोदाम में क्या मिला?

इन आरोपों के बीच 'आजतक' की टीम ने लासलगांव-मनमाड रोड स्थित सेंट्रल वेयरहाउस (CWC) के गोदाम का जायजा लिया, जहां नाफेड और NCCF के बफर स्टॉक का प्याज रखा हुआ है. गोदाम में प्याज की स्थिति देखकर भंडारण व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हुए.  मंगलवार से यहां मजदूरों द्वारा प्याज की सफाई और ग्रेडिंग का काम किया जा रहा था. खराब और सड़े हुए प्याज को अलग किया जा रहा था, जबकि अच्छी क्वालिटी वाले प्याज को दूसरी तरफ रखा जा रहा था. वहीं, मौके पर दिखी स्थिति के अनुसार, बड़ी मात्रा में प्याज खराब हो चुकी थी. करीब तीन घमेलों में से केवल एक घमेला ही अच्छी प्याज का निकल रहा था, जबकि बाकी प्याज खराब या सड़ी हुई मिली.

प्याज को और ज्यादा खराब होने से बचाने के लिए उस पर पाउडर का भी इस्तेमाल किया गया था. हालांकि, काफी मात्रा में प्याज पहले ही खराब हो चुकी थी. वहीं, जो प्याज बची थी, उसकी क्वालिटी और वह कितने समय तक सुरक्षित रह पाएगी, इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

26 घंटे की देरी की क्या है वजह

गोदाम में प्याज की सफाई, ग्रेडिंग और पैकिंग का काम समय पर पूरा नहीं हो सका. मंगलवार से यह प्रक्रिया शुरू हुई और बुधवार दोपहर तक करीब 450 मीट्रिक टन प्याज ही ट्रेन में लोड की जा सकी. यही वजह बताई जा रही है कि कांदा एक्सप्रेस को रवाना होने में करीब 26 घंटे की देरी हुई, जिस ट्रेन के जरिए तेजी से प्याज दिल्ली पहुंचाकर लोगों को राहत देने की योजना थी, वही ट्रेन तैयारियों की कमी के कारण देरी का शिकार हो गई.

खरीद और भंडारण व्यवस्था पर उठे सवाल

गोदाम के आसपास पहुंचे किसानों ने भी प्याज की खराब स्थिति देखकर सवाल उठाए. किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने किसानों से अच्छी क्वालिटी की प्याज खरीदी थी तो भंडारण में इतनी बड़ी मात्रा में प्याज खराब कैसे हो गई? किसानों ने आरोप लगाया कि यह पूरी व्यवस्था केवल प्याज के दाम कम करने के लिए की जा रही है और इसका फायदा किसानों के बजाय बिचौलियों को मिल सकता है. किसान चंद्रकांत जाधव ने भी प्याज की क्वालिटी और भंडारण को लेकर सवाल उठाए. किसानों का कहना है कि सरकार को सिर्फ सस्ती प्याज बाजार में उतारने पर ध्यान देने के बजाय यह भी देखना चाहिए कि किसानों से खरीदी गई प्याज सुरक्षित तरीके से रखी गई या नहीं.

नाफेड और NCCF की खरीद पर भी सवाल

नाफेड और NCCF पिछले कई वर्षों से किसानों से प्याज खरीदकर उसका बफर स्टॉक तैयार करती हैं. इस खरीद के लिए क्वालिटी से जुड़ी कई शर्तें भी होती हैं. किसानों के मुताबिक, इनमें प्याज के कम से कम 45 मिलीमीटर साइज की होने की शर्त भी शामिल है. लेकिन लासलगांव के गोदाम में बड़ी मात्रा में छोटी साइज की प्याज दिखाई देने से अब सवाल उठ रहा है कि आखिर किसानों से प्याज खरीदते समय क्वालिटी के नियमों का कितना पालन किया गया. पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सरकार ने किसानों से तय मानकों के मुताबिक अच्छी प्याज खरीदी थी, तो भंडारण के दौरान इतनी बड़ी मात्रा में प्याज खराब कैसे हो गई? (प्रवीण ठाकरे की रिपोर्ट)

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