
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे के मुद्दे पर 18 दिनों से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने अपना उपवास खत्म कर दिया. उन्होंने गृह नगर बिजावर पहुंचने के बाद मां के आग्रह पर नारियल पानी पीकर अनशन तोड़ा. अमित भटनागर के भाई अंकित भटनागर ने बताया कि लंबे अनशन के चलते उनकी तबीयत लगातार खराब हो रही थी. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब वह घर पहुंचे तो उनकी मां ने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अनशन खत्म करने के लिए मनाया, जिसके बाद उन्होंने उपवास खत्म कर दिया.
छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने बताया कि स्वास्थ्य में सुधार होने पर गुरुवार को भटनागर को उनके गृह नगर भेज दिया गया. इससे पहले उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद पहले बिजावर सिविल अस्पताल और फिर जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था.
यह आंदोलन 3 जुलाई को बराना नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल के नीचे शुरू हुआ था. प्रदर्शनकारियों ने केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा वितरण और कानूनी अधिकारों से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की थी.
मॉनसून के दौरान बराना नदी का जलस्तर बढ़ने का हवाला देते हुए 19 जुलाई को पुलिस ने कुपी गांव स्थित धरना स्थल खाली करा दिया था. उस समय अमित भटनागर ने कहा था कि प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद उनका अनशन जारी रहेगा.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुनर्वास पैकेज के क्रियान्वयन में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है और कई प्रभावित परिवार अब भी लाभ से वंचित हैं. अमित भटनागर ने यह भी दावा किया था कि धरना हटाए जाने वाले दिन वह मीडिया के सामने करीब 400 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ियों से जुड़े दस्तावेज पेश करने वाले थे.
आंदोलन में शामिल जय किसान संगठन ने आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भटनागर से उनके परिवार, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों को मिलने नहीं दिया गया. संगठन ने यह भी दावा किया कि कई गांवों की महिलाओं ने आंदोलन के समर्थन में "चूल्हा बंद" अभियान शुरू किया था.
संगठन के अनुसार, अमित भटनागर ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या सरकार के खिलाफ नहीं है. उन्होंने प्रशासन द्वारा नए सिरे से सर्वे कराने और संयुक्त जांच दल गठित करने के फैसले को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि अगर यह प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से लागू होती है तो यह आंदोलन की बड़ी उपलब्धि होगी.
कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की अधिकांश शिकायतें पन्ना जिले से जुड़ी हैं, जबकि धरना छतरपुर में दिया गया था. उन्होंने कहा कि अगर छतरपुर जिले से संबंधित शिकायतें या प्रभावित लोगों की सूची प्रशासन को सौंपी जाती है तो उनकी जांच कर जरूर कार्रवाई की जाएगी.
करीब 44,605 करोड़ रुपये की लागत वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिसे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत विकसित किया जा रहा है. इस परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना, करीब 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना और जलविद्युत उत्पादन बढ़ाना है. (पीटीआई)