
दिल्ली कूच को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच जारी गतिरोध के बीच मंगलवार को वार्ता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली. हरियाणा पुलिस ने किसान नेताओं से बातचीत के लिए लगाए गए कुछ बैरिकेड हटाए, जिसके बाद पंजाब के करीब 10 से 12 किसान नेताओं को अंबाला की ओर आने की अनुमति दी गई. ये नेता हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा से मुलाकात कर किसानों की मांगों और चिंताओं पर चर्चा करेंगे. किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि शंभू बॉर्डर से आगे बढ़ने की कोई योजना नहीं है, वे हरियाणा के मंत्री श्याम सिंह राणा के प्रस्ताव पर दूसरे किसान नेताओं के साथ चर्चा करेंगे.
सूत्रों के अनुसार, हरियाणा सरकार ने किसान संगठनों को आश्वासन दिया है कि हिरासत में लिए गए प्रमुख किसान नेताओं गुरनाम सिंह चढूनी और बीएन सिंह समेत अन्य किसानों की रिहाई सुनिश्चित की जाएगी. इस आश्वासन के बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावना और मजबूत हुई है.
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसान नेताओं को भरोसा दिलाया है कि उनकी मांगों और विशेष रूप से भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दों पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ आगामी 8 से 10 दिनों के भीतर बैठक आयोजित कराने का प्रयास किया जाएगा.
सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि किसानों की चिंताओं को केंद्र तक पहुंचाया जाएगा और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश होगी.
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि फिलहाल बातचीत का माहौल बना है और किसान संगठन वार्ता में हिस्सा लेने को तैयार हैं. उन्होंने बताया कि अलग-अलग किसान यूनियनों के करीब आठ से दस प्रतिनिधि अधिकारियों और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे.
पंधेर ने कहा कि किसानों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि उन्हें दिल्ली जाने से रोका क्यों गया. उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी अपनी बात वार्ता के दौरान विस्तार से रखेंगे और सरकार का पक्ष भी सुनेंगे. उनका कहना था कि बातचीत के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी.
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसान भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ अपनी आवाज उठाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें दिल्ली पहुंचने से रोका जा रहा है.
डल्लेवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में जालंधर दौरे के दौरान किसानों से निकटता का संदेश देने की कोशिश की थी, लेकिन जब किसान अपनी आशंकाओं को लेकर दिल्ली जाना चाहते हैं तो उनके रास्ते में बैरिकेड लगाए जा रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसानों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने से क्यों रोका जा रहा है.
उन्होंने यह भी कहा कि यदि गिरफ्तार किसानों को जल्द रिहा नहीं किया गया तो किसान संगठन आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए कठोर कदम उठाने पर विचार कर सकते हैं.
किसान संगठनों का मुख्य विरोध भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर है. किसान नेताओं का आरोप है कि इस तरह के समझौते भारतीय कृषि, डेयरी क्षेत्र और छोटे किसानों के हितों को प्रभावित कर सकते हैं. इसी मुद्दे को लेकर अलग-अलग किसान संगठन दिल्ली में प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं.
दिनभर चले घटनाक्रम के बाद फिलहाल टकराव की स्थिति में कुछ नरमी आई है. एक ओर सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, वहीं किसान संगठन भी वार्ता में शामिल होने को तैयार दिखाई दे रहे हैं. अब सभी की निगाहें हरियाणा सरकार, किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच होने वाली आगामी बैठकों पर टिकी हैं, जिनसे आंदोलन की अगली दिशा तय हो सकती है.