Farmers Protest: दिल्ली कूच पर किसानों को हरियाणा बॉर्डर पर रोका, खनौरी और शंभू बॉर्डर पर हाई अलर्ट

Farmers Protest: दिल्ली कूच पर किसानों को हरियाणा बॉर्डर पर रोका, खनौरी और शंभू बॉर्डर पर हाई अलर्ट

भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में पंजाब और हरियाणा के किसान संगठनों ने दिल्ली कूच का आह्वान किया. खनौरी और शंभू बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर किसानों को रोक दिया. किसान नेताओं का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाकर अपनी बात रखना चाहते हैं, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से सख्त इंतजाम किए हैं.

Punjab Farmers March to DelhiPunjab Farmers March to Delhi
कमलजीत संधू
  • नई दिल्ली/शंभू/खनौरी/करनाल ,
  • Jul 21, 2026,
  • Updated Jul 21, 2026, 11:17 AM IST

भारत-अमेरिका प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के विरोध में किसानों द्वारा किए गए दिल्ली कूच को हरियाणा पुलिस ने राज्य की सीमाओं पर ही रोक दिया. पंजाब से दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों को खनौरी और शंभू बॉर्डर के पास भारी पुलिस बल और मजबूत बैरिकेडिंग का सामना करना पड़ा. भारतमाला-जम्मू-कटड़ा एक्सप्रेसवे समेत कई प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. किसान संगठन ‘देश बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले दिल्ली में प्रदर्शन करने जा रहे थे. किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील भारतीय कृषि, डेयरी क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है. इसी मुद्दे को लेकर हजारों किसानों के दिल्ली पहुंचने की संभावना के मद्देनजर प्रशासन पहले से सतर्क नजर आया.

खनौरी और शंभू बॉर्डर पर आमना-सामना

दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों को हरियाणा पुलिस ने खनौरी के पास रोक दिया. भारतमाला-जम्मू-कटड़ा एक्सप्रेसवे पर बड़े-बड़े बैरिकेड लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया. कई स्थानों पर पुलिस और किसानों के बीच आमना-सामना देखने को मिला, हालांकि स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही. शंभू बॉर्डर पर भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. क्षेत्र में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू की गई है. बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी दंगा-रोधी उपकरणों के साथ तैनात किए गए हैं. दोनों ओर की सड़कों को बैरिकेड कर यातायात भी सीमित कर दिया गया है.

किसान नेताओं का केंद्र सरकार पर निशाना

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि किसान दिल्ली जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें आगे बढ़ने देना या रोकना हरियाणा और केंद्र सरकार के हाथ में है. उन्होंने कहा, "हम प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के खिलाफ हैं. यह समझौता अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचा सकता है, जबकि भारतीय किसानों को नुकसान होगा. हमें इस समझौते की जानकारी भारत सरकार से नहीं, बल्कि व्हाइट हाउस की ओर से जारी जानकारी के माध्यम से मिली." पंधेर ने स्पष्ट किया कि किसान किसी भी बैरिकेड को जबरन नहीं तोड़ेंगे. उन्होंने कहा कि संगठन पहले बातचीत के रास्ते को अपनाना चाहता है और सरकार के साथ बैठक की संभावना तलाशेगा.

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया जालंधर दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि हरियाणा के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का पूरा लाभ मिलने संबंधी दावों पर किसानों के बीच सवाल हैं. 

बीजेपी सांसद अशोक मित्तल ने की संयम की अपील

पंजाब से बीजेपी सांसद अशोक मित्तल ने किसानों के दिल्ली मार्च पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार बातचीत के पक्ष में है. उन्होंने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने किसान प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है. मित्तल ने कहा, "जब माहौल बातचीत के जरिए सकारात्मक दिशा में बढ़ रहा हो, तब उसे बिगाड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. सरकार किसानों की बात सुनने को तैयार है और संवाद का रास्ता खुला है."

करनाल में भी अलर्ट, कई जिलों के किसानों ने किया समर्थन

हरियाणा के करनाल जिले में भी किसान संगठनों ने दिल्ली कूच का समर्थन किया. सताड़ा टोल प्लाजा से करनाल समेत चार जिलों के किसानों ने दिल्ली की ओर प्रस्थान की घोषणा की थी. इसके मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया है.

मुख्य मांगें क्या हैं?

किसान संगठनों की प्रमुख मांगें कुछ इस प्रकार हैं—

  • प्रस्तावित भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को रद्द किया जाए.
  • कृषि और डेयरी क्षेत्र को विदेशी दबाव से सुरक्षित रखा जाए.
  • किसानों की आय और MSP व्यवस्था को कानूनी संरक्षण दिया जाए.
  • कृषि नीतियों से जुड़े निर्णयों में किसान संगठनों से व्यापक परामर्श किया जाए.

फिलहाल गतिरोध बरकरार

दिल्ली कूच को लेकर किसान संगठनों और प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ है. किसान नेता बातचीत के जरिए आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं, जबकि प्रशासन कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देकर सीमाओं पर सख्ती बनाए हुए है. आने वाले घंटों में सरकार और किसान संगठनों के बीच संभावित वार्ता इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती है.

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