
भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में दिल्ली में आयोजित किए जा रहे किसान प्रदर्शन से पहले हरियाणा-दिल्ली सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से सख्त कर दिया गया है. सोनीपत के कुंडली बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस ने तीन स्तरीय बैरिकेडिंग, वाहनों की सघन जांच और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के जरिए राजधानी में किसानों की एंट्री रोकने की व्यापक तैयारी की है. इसके बावजूद किसान संगठनों का दावा है कि कई किसान नेता भेष बदलकर दिल्ली पहुंचने में सफल रहे हैं.
किसान संगठनों के अनुसार दिल्ली के जंतर-मंतर और किसान घाट पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कई राज्यों से किसान राजधानी की ओर बढ़ रहे हैं. इसी बीच किसान नेता सत्यवान नरवाल के भेष बदलकर अपने साथियों के साथ दिल्ली पहुंचने का दावा चर्चा का विषय बना हुआ है.
दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए नेशनल हाईवे-44 स्थित कुंडली बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था को बेहद मजबूत बनाया गया है. पुलिस ने बॉर्डर पर जगह-जगह बैरिकेडिंग कर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया हुआ है. दिल्ली की ओर जाने वाले वाहनों को रोककर उनकी गहन जांच की जा रही है.
सूत्रों के अनुसार केवल लोहे की बैरिकेडिंग ही नहीं, बल्कि कई स्थानों पर स्थायी अवरोध खड़े करने की भी तैयारी की गई है. बॉर्डर पर तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया है ताकि किसी भी स्थिति में भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके.
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए करीब 50 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को कुंडली बॉर्डर पर तैनात किया गया है. पुलिस अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद रहकर हालात की निगरानी कर रहे हैं. पंजाब की ओर से आने वाले वाहनों की विशेष रूप से जांच की जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है.
सोनीपत पुलिस का कहना है कि दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार तालमेल बनाकर निगरानी की जा रही है. अधिकारियों का दावा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी से बचाने के लिए यह कदम उठाए गए हैं.
किसान संगठनों ने सुरक्षा बंदोबस्त को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं. किसान नेता सत्यवान नरवाल ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील किसानों के लिए "डेथ वारंट" साबित होगी और इसी कारण किसान इसका विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी किसानों को भारतीय बाजारों तक व्यापक पहुंच मिलती है, तो भारतीय किसानों के भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. किसान नेताओं का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने जा रहे किसानों को जिस प्रकार रोका जा रहा है, वह अनुचित है.
किसान नेताओं ने कहा कि किसान लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं. उनका कहना है कि किसानों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है मानो वे कोई अपराधी हों, जबकि वे केवल अपनी आजीविका और कृषि क्षेत्र के भविष्य को लेकर चिंता जता रहे हैं.
किसान संगठनों ने दिल्ली में किसान घाट और जंतर-मंतर पर एकत्रित होकर प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ प्रदर्शन की योजना बनाई है. अलग-अलग किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के वहां पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. किसानों का कहना है कि कृषि, डेयरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभावों को देखते हुए सरकार को किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से पहले किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए.
फिलहाल कुंडली बॉर्डर समेत दिल्ली से सटे सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं. पुलिस का फोकस कानून-व्यवस्था बनाए रखने, ट्रैफिक संचालन को सुचारू रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने पर है. वहीं किसान संगठन अपने प्रदर्शन को जारी रखने के संकेत दे रहे हैं, जिससे आने वाले समय में दिल्ली की सीमाओं पर गतिविधियां और तेज हो सकती हैं.