मुजफ्फरनगर में संयुक्त किसान मोर्चे की पंचायत अनिश्चितकालीन धरने में बदली, समर्थन में उतरे टिकैत

मुजफ्फरनगर में संयुक्त किसान मोर्चे की पंचायत अनिश्चितकालीन धरने में बदली, समर्थन में उतरे टिकैत

दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर मुजफ्फरनगर कलेक्ट्रेट में बुलाई गई पंचायत अनिश्चितकालीन धरने में बदल गई. किसान नेता राकेश टिकैत ने छात्रों पर कार्रवाई की निंदा करते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी और जौहर यूनिवर्सिटी को गिराए जाने की किसी भी कार्रवाई का विरोध करने का ऐलान किया.

Rakesh TikaitRakesh Tikait
राहुल कुमार
  • Muzaffarnagar,
  • Jul 22, 2026,
  • Updated Jul 22, 2026, 11:51 AM IST

दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और अलग-अलग किसान-मजदूर मुद्दों के विरोध में मंगलवार को मुजफ्फरनगर जिला कलेक्ट्रेट पर संयुक्त किसान मोर्चे की ओर से बुलाई गई पंचायत अब अनिश्चितकालीन धरने में तब्दील हो गई है. धरने की अगुवाई भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत कर रहे हैं.

पंचायत को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली में छात्रों पर केवल लाठीचार्ज नहीं हुआ, बल्कि “छात्र चार्ज हो गए हैं” और अब वे अपने-अपने गांवों में जाकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाएंगे. उन्होंने कहा कि नौकरी, भर्ती और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर अपनी बात रखने वाले छात्रों पर जिस प्रकार बल प्रयोग किया गया, उसका असर दूर तक दिखाई देगा.

पूरे यूपी में लगेगी किसान पंचायत 

टिकैत ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर पूरे देश और उत्तर प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर पंचायतें आयोजित की जा रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों और किसानों को रोका जा रहा है. किसान नेताओं को दिल्ली पहुंचने से भी रोका जा रहा है, जिसका किसान संगठन विरोध कर रहे हैं.

किसान नेता ने केंद्र सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका समेत अन्य देशों के साथ होने वाले व्यापारिक समझौतों से भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है. उन्होंने मक्का, दुग्ध क्षेत्र और कृषि से जुड़े अन्य समझौतों पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे किसान और मजदूर वर्ग प्रभावित होगा. इसके अलावा बिजली संशोधन बिल, भूमि अधिग्रहण कानून के पालन और बढ़ते जमीन अधिग्रहण जैसे मुद्दों को भी उन्होंने आंदोलन का प्रमुख कारण बताया.

जौहर यूनिवर्सिटी पर टिकैत का जवाब

जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर पूछे गए सवाल पर टिकैत ने स्पष्ट कहा कि विश्वविद्यालय बनाए जाते हैं, तोड़े नहीं जाते. उन्होंने कहा कि यदि जौहर यूनिवर्सिटी को गिराने की कोई कार्रवाई होती है तो किसान संगठन उसका विरोध करेंगे. उनके अनुसार इससे देश की शिक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि पर नकारात्मक असर पड़ेगा.

राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार केवल निवेदन से नहीं मानने वाली है और अब अधिकारों की लड़ाई के लिए बड़े आंदोलन की जरूरत पड़ेगी. उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर, व्यापारी, दुकानदार और युवा सभी को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा. टिकैत ने यह भी कहा कि आंदोलन की जरूरत पड़ने पर किसान तैयार हैं और उनके ट्रैक्टर भी तैयार हैं.

उन्होंने विपक्षी दलों से भी जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने की अपील की और कहा कि सरकार पर दबाव बनाने के लिए व्यापक जन आंदोलन की आवश्यकता है. टिकैत ने याद दिलाया कि कृषि कानूनों की वापसी के लिए किसानों को 13 महीने तक आंदोलन करना पड़ा था, इसलिए वर्तमान मुद्दों पर भी लंबी लड़ाई की तैयारी करनी होगी.

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