
महाराष्ट्र के कई इलाकों में सूखे जैसे हालात हैं. किसानों और गांवों के लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच, महाराष्ट्र के जल आपूर्ति और स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटिल ने दावा किया है कि उनके विभाग को सितंबर 2024 से केंद्र सरकार से फंड नहीं मिला है. मंत्री के मुताबिक, राज्य सरकार अपने पैसे से पानी से जुड़े कामों को आगे बढ़ा रही है. उनका कहना है कि अगर केंद्र से समय पर पैसा मिलता, तो कई अधूरे काम पूरे हो सकते थे और लोगों को टैंकरों पर कम निर्भर रहना पड़ता.
मंत्री गुलाबराव पाटिल के अनुसार, महाराष्ट्र के चार जिलों में इस समय करीब 700 टैंकरों की मदद से लोगों तक पानी पहुंचाया जा रहा है. इनमें अहिल्यानगर, छत्रपति संभाजीनगर, जालना और नासिक जिले शामिल हैं. इन इलाकों में पानी की कमी के कारण लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है. टैंकरों के जरिए गांवों तक पानी पहुंचाना एक जरूरी व्यवस्था बन गई है. हालांकि, यह व्यवस्था पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. इसके लिए पानी की सप्लाई से जुड़ी योजनाओं को पूरा करना जरूरी है, ताकि लोगों को नियमित रूप से पानी मिल सके.
जल आपूर्ति मंत्री गुलाबराव पाटिल ने कहा कि उनके विभाग को सितंबर 2024 से केंद्र सरकार से अपेक्षित पैसा नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि अगर यह राशि समय पर मिल जाती, तो राज्य में पानी की स्थिति कुछ अलग हो सकती थी. मंत्री के मुताबिक, राज्य सरकार अपने खजाने से पैसा देकर पानी की योजनाओं को आगे बढ़ा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि ठेकेदारों, गांव के लोगों, किसानों और विधायकों को पानी की समस्या के कारण परेशानी हो रही है और वे विभाग से सवाल कर रहे हैं. हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस दावे पर कोई जवाब इस खबर में उपलब्ध नहीं है. ऐसे में फंड जारी होने की स्थिति को लेकर केंद्र का पक्ष सामने आना भी जरूरी है.
गुलाबराव पाटिल ने बताया कि राज्य में पानी की सप्लाई से जुड़ी कई योजनाओं का 80 से 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है. इन योजनाओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत है. मंत्री का कहना है कि अगर पैसा मिल जाता है, तो कुछ योजनाओं का काम दिसंबर तक पूरा किया जा सकता है. इससे पानी की सप्लाई बेहतर होने और टैंकरों की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है.
इन योजनाओं के पूरा होने से उन गांवों को राहत मिलने की उम्मीद है, जहां फिलहाल टैंकरों के सहारे पानी पहुंचाया जा रहा है. हालांकि, टैंकरों की संख्या कितनी कम होगी, यह योजनाओं के पूरा होने और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करेगा.
महाराष्ट्र के जल आपूर्ति मंत्री ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल से इस मामले पर ध्यान देने की उम्मीद जताई है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री महाराष्ट्र से आते हैं और उन्हें उम्मीद है कि वह इस समस्या को समझते हुए जरूरी कदम उठाएंगे. राज्य सरकार आने वाले महीनों में पानी की कमी से निपटने की तैयारी भी कर रही है. इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों और विधानसभा क्षेत्रों में पानी की स्थिति की समीक्षा की जा रही है. इस समीक्षा का मकसद यह समझना है कि किन इलाकों में पानी की ज्यादा जरूरत है और वहां किस तरह की व्यवस्था करनी होगी.
महाराष्ट्र सरकार ने पिछले महीने राज्य के 358 तालुकाओं में से 265 तालुकाओं में सूखे की घोषणा की थी. यानी राज्य के करीब 74 फीसदी तालुका सूखे से प्रभावित घोषित किए गए हैं. कम बारिश और पानी की कमी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया. सूखे से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए कई उपायों की घोषणा भी की गई है. इनमें फसल कर्ज के भुगतान में राहत, जमीन के राजस्व में छूट और बिजली बिल में सब्सिडी जैसे कदम शामिल हैं. इन उपायों का मकसद सूखे के कारण आर्थिक परेशानी झेल रहे किसानों को कुछ राहत देना है.
सूखे से प्रभावित तालुकाओं की संख्या के मामले में छत्रपति संभाजीनगर संभाग सबसे आगे है. यहां 74 तालुके सूखे से प्रभावित घोषित किए गए हैं. इसके बाद अमरावती में 56, नासिक में 49, नागपुर में 39, पुणे में 35 और ठाणे में 12 तालुके शामिल हैं. इसके अलावा रायगढ़ के एक, रत्नागिरी के तीन और सिंधुदुर्ग के आठ तालुकों को भी सूखे से प्रभावित क्षेत्रों की सूची में शामिल किया गया है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि पानी की कमी का असर महाराष्ट्र के कई हिस्सों में फैला हुआ है.
महाराष्ट्र में पानी की कमी के बीच अधूरी जल आपूर्ति योजनाओं को पूरा करना और प्रभावित गांवों तक नियमित पानी पहुंचाना बड़ी चुनौती है. मंत्री गुलाबराव पाटिल के अनुसार, फंड मिलने पर कई योजनाओं का काम दिसंबर तक पूरा किया जा सकता है. इससे टैंकरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है. फिलहाल, राज्य सरकार अपने स्तर पर पानी की व्यवस्था करने और सूखे से प्रभावित इलाकों की समीक्षा करने में जुटी है. अब यह देखना होगा कि केंद्र से फंड मिलने को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं और पानी की योजनाओं को पूरा करने में कितनी तेजी आती है. इससे ही तय होगा कि आने वाले महीनों में प्रभावित किसानों और गांवों के लोगों को कितनी राहत मिल पाती है. (PTI)
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