
अक्टूबर से लेकर नवंबर तक त्यौहारी सीजन है. मिठाई से लेकर दूसरी और चीजों में चीनी की बड़ी मात्रा में जरूरत होगी. लेकिन ऐसी खबर आ रही है कि त्यौहार के मौके पर मिठास फीकी हो सकती है. किसानों ने चीनी और गन्ने की सप्लाई ठप्प करने की चेतावनी दी है. किसानों की कुछ मांग हैं, उनका कहना है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो खेत से गन्ना चीनी मिलों को नहीं जाएगा. साथ ही मिलों में रखे चीनी के स्टॉक को बाजारों तक नहीं जाने देंगे. पूर्व राज्यसभा सांसद और किसान नेता राजू शेट्टी ने ये चेतावनी दी है.
अपनी मांगों के समर्थन में राजू शेट्टी महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों संग हाइवे पर बैठ गए हैं. महाराष्ट्र और कर्नाटक को जोड़ने वाले हाइवे को जाम कर दिया गया है. हाइवे जाम हुए 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत चुका है. गौरतलब रहे महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे के चलते गन्ने की फसल प्रभावित हुई है. साथ ही केन्द्र सरकार ने तय वक्त से पहले गन्ने की पेरई और कटाई का आदेश दिया है.
किसान नेता राजू शेट्टी ने किसान तक को बताया कि हमारी पहली मांग है कि गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति टन बढ़ाया जाए. चीनी का दाम बढ़ाया जाए और साथ ही इथेनॉल का दाम भी बढ़ाया जाए. इससे होगा ये कि किसानों को गन्ने का सही दाम मोटे मुनाफे के साथ मिलने लगेगा. क्योंकि हाल ही में सरकार ने ये आदेश दिया है कि इस बार 15 दिन पहले गन्ने की कटाई शुरू कर दी जाए. साथ ही चीनी मिलें भी पहले से शुरू की जाएं.
लेकिन ऐसा करने से किसानों संग चीनी मिलों को भी नुकसान होगा. गन्ने की पहले कटाई होने से कम से कम 20 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से नुकसान होगा. साथ ही चीनी मिलों को गन्ने से चीनी की रिकवरी कम मिलेगी. क्योंकि जिस वक्त गन्ने को काटने की बात कही जा रही है उस वक्त गन्ने में रस बन रहा होता है. इसलिए हम खेतों से गन्ने को मिल तक नहीं लाएंगे, साथ ही मिलों को चीनी को बाजार तक नहीं जाने देंगे. हमारे किसान चीनी मिलों के सामने खड़े रहेंगे.
कर्नाटक और महाराष्ट्र के किसानों ने राजू शेट्टी के नेतृत्व में महाराष्ट्र-कर्नाटक हाइवे को जाम कर दिया है. टोल नाका के पास किसान जमीन पर ही बैठ गए हैं. हाइवे जाम किए 24 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं. राजू शेट्टी का कहना है कि 45 साल पहले शरद पवार ने इस हाइवे को जाम किया था. लेकिन 24 घंटे पूरे होने से पहले ही मांगें मान ली गईं थी. आज ये रिकॉर्ड टूट चुका है. हम यहां से तब तक नहीं उठेंगे जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाती हैं.
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