
खनौरी बॉर्डर पर किसानों का धरना आज दूसरे दिन भी जारी है. पंजाब के किसानों के साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश से भी किसान समर्थन देने के लिए खनौरी बॉर्डर पहुंच रहे हैं. किसानों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर यहां डटे हुए हैं और जब तक सरकार उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं सुनेगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. किसानों ने बीती रात खनौरी बॉर्डर पर खुले आसमान के नीचे गुजारी. किसानों के मुताबिक, धरना स्थल पर अभी तक पक्के टेंट की पूरी व्यवस्था नहीं हो पाई थी. इसके अलावा बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं थीं. इसके बावजूद किसान रातभर मौके पर डटे रहे. किसानों के लिए लंगर की व्यवस्था आसपास के गांवों के लोग कर रहे हैं. ग्रामीण भोजन के साथ अन्य जरूरी सामान भी किसानों तक पहुंचा रहे हैं.
अब किसानों की ओर से धरना स्थल पर पक्के टेंट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है. किसान लंबे समय तक यहां रहने की तैयारी कर रहे हैं. इसी बीच पंजाब पुलिस की मौजूदगी भी खनौरी बॉर्डर पर बढ़ गई है. डीएसपी स्तर के अधिकारियों के साथ पुलिस की बड़ी टीम मौके पर पहुंची और किसान नेताओं के साथ बैठक की.
पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक के बाद किसान नेता काका कोटड़ा ने आरोप लगाया कि अब पंजाब पुलिस भी किसानों को यहां से हटाना चाहती है. उन्होंने कहा कि एक तरफ हरियाणा पुलिस किसानों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दे रही है, जबकि दूसरी तरफ पंजाब पुलिस उन्हें पंजाब की सीमा में धरना लगाने से रोक रही है.
काका कोटड़ा ने कहा कि किसानों के सामने मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है. उनके मुताबिक, पंजाब पुलिस ने सवाल किया कि किसानों ने यहां टेंट क्यों लगाए हैं. किसान नेता ने कहा कि अगर हरियाणा पुलिस उन्हें आगे नहीं जाने दे रही और पंजाब पुलिस पंजाब में बैठने नहीं दे रही, तो किसान अपनी मांगों को लेकर आखिर जाएं तो जाएं कहां.
किसान नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं. उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से बातचीत नहीं होती, तब तक वे खनौरी बॉर्डर पर डटे रहेंगे.
खनौरी बॉर्डर पर किसानों के जुटने के साथ पुलिस की मौजूदगी भी बढ़ गई है. हरियाणा और उत्तर प्रदेश से किसानों के पहुंचने से आंदोलन को समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है. वहीं, पंजाब पुलिस और किसान नेताओं के बीच हुई बैठक के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और किसानों के बीच आगे क्या बातचीत होती है और क्या इस विवाद का कोई रास्ता निकलता है. फिलहाल किसान खनौरी बॉर्डर पर डटे हुए हैं और आंदोलन जारी है. (कुलवीर सिंह)
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