
आज हमारे देश की खेती में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. केंद्र सरकार का कहना है कि खेती भारत की अर्थव्यवस्था की जान है, जो हमारे देश के लगभग 46.1 प्रतिशत लोगों की रोजी-रोटी का जरिया है. सरकार के मुताबिक, पशुपालन और मछली पालन के काम में 5-6 प्रतिशत की लगातार बढ़त बनी हुई है, जिससे गाँव के लोगों की कमाई में इज़ाफ़ा हुआ है और खेती के तरीकों में नयापन आया है. पिछले दस सालों में, केंद्र सरकार की लगातार कोशिशों और सही नीतियों की वजह से किसानों के लिए क़र्ज़, बीमा और बाज़ारों तक पहुंचना आसान हो गया है. इससे खेती में नई डिजिटल तकनीक अपनाने की रफ़्तार तेज़ हो गई है.
सरकार का यह भी दावा है कि फ़ूड प्रोसेसिंग, सहकारी समितियों, डेयरी और मछली पालन में किए गए निवेश से खेती की पूरी व्यवस्था मज़बूत हुई है और इससे लोगों के लिए रोज़गार के नए मौके पैदा हो रहे हैं. इन सब कोशिशों के साथ, सरकार का यह दावा है कि कृषि का क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छू रहा है; जहां साल 2013-14 में कुल अनाज का उत्पादन 2650.05 लाख टन था, वह बढ़कर 2025-26 तक 3760.56 लाख टन के तक पहुंच गया है.
किसानों की उपज को सही दाम दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदारी को एक मजबूत सुरक्षा चक्र बताया है. केंद्र सरकार का दावा है कि साल 2004 से 2014 के बीच जहांअनाज की कुल खरीदारी 6980.7 लाख टन थी, वहीं 2014 से 2026 के बीच इसे बढ़ाकर 1,2290.2 लाख टन किया गया है.सरकार के दावों के अनुसार, इस अवधि में एमएसपी के रूप में किसानों को 26.32 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. धान और गेहूं के एमएसपी में की गई भारी बढ़ोतरी को सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए अपने सबसे अहम फैसले के रूप में पेश करती है.
किसानों को सीधे वित्तीय मदद पहुंचाने के मामले में केंद्र सरकार का दावा है कि 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' ने देश के करोड़ों किसानों को बड़ी राहत दी है.सरकार ने दावा किया है कि अब तक 23 किस्तों के माध्यम से 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है. इसके साथ ही, केंद्र सरकार का यह भी दावा है कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए किसानों को महाजनों के कर्ज से आज़ाद कराया गया है अगस्त 2026 तक देश भर में 7.28 करोड़ से अधिक सक्रिय केसीसी खातों के जरिए किसानों को सस्ती दरों पर लोन उपलब्ध कराना सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है.
खेती में होने वाले जोखिम को कम करने के लिए केंद्र सरकार का दावा है कि 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' (PMFBY) ने किसानों के लिए एक मज़बूत ढाल का काम किया है. सरकार के आंकड़ों के अनुसार, योजना की शुरुआत से अब तक 92.46 करोड़ से अधिक किसानों ने बीमा के लिए आवेदन किया है. केंद्र सरकार का दावा है कि दिसंबर 2025 तक लगभग 24.31 करोड़ किसानों को 1.96 लाख करोड़ रुपये से अधिक का क्लेम बांटा जा चुका है. सरकार का मानना है कि इस योजना ने आपदा के समय किसानों को बर्बाद होने से बचाकर उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है.
सरकार का कहना,टिकाऊ खेती और ज़मीन की सेहत सुधारने पर केंद्र सरकार ने अपनी प्राथमिकता जताई है. केंद्र सरकार का दावा है कि 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड' (Soil Health Card) योजना के तहत अब तक 26.09 करोड़ से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिससे किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता पता चल रही है.
इसके अलावा, सरकार ने जैविक खेती, प्राकृतिक कृषि और सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों को बढ़ावा देने का भी दावा किया है. केंद्र सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से भारत की खाद्य सुरक्षा और मज़बूत हुई है,और देश का अन्नदाताअब नई तकनीक के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है.