MSP से रोजगार तक... फिर सड़कों पर उतरेंगे किसान, 16 अगस्त से 228 KM की पदयात्रा

MSP से रोजगार तक... फिर सड़कों पर उतरेंगे किसान, 16 अगस्त से 228 KM की पदयात्रा

किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने 16 अगस्त से दाता सिंह वाला-खनौरी बॉर्डर से 228 किलोमीटर की किसान पदयात्रा शुरू करने का ऐलान किया है. यह यात्रा 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचेगी, जहां बड़ी किसान रैली होगी. किसानों की MSP गारंटी, रोजगार और अन्य मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी है.

16 अगस्त से किसान आंदोलन का नया अध्याय!16 अगस्त से किसान आंदोलन का नया अध्याय!
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Aug 14, 2026,
  • Updated Aug 14, 2026, 1:25 PM IST

किसानों की मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन को तेज करने की तैयारी शुरू हो गई है. किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने ‘किसान तक’ से खास बातचीत में बताया कि 16 अगस्त से दाता सिंह वाला-खनौरी बॉर्डर से 'किसान बचाओ पदयात्रा' शुरू की जाएगी. यह पदयात्रा करीब 228 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचेगी. यहां बड़ी किसान रैली आयोजित करने का ऐलान किया गया है. कोहाड़ का दावा है कि इस रैली में देशभर से हजारों किसान पहुंच सकते हैं.

शुभकरण सिंह की शहादत वाली जगह से शुरू होगी पदयात्रा

किसान नेता के मुताबिक यह पदयात्रा दाता सिंह वाला-खनौरी बॉर्डर से शुरू होगी. यह वही इलाका है जहां 2024 के किसान आंदोलन के दौरान युवा किसान शुभकरण सिंह की मौत हुई थी. किसान संगठनों ने इस जगह को आंदोलन से जोड़कर देखा है और यहीं से नई पदयात्रा शुरू करने का फैसला किया है.

इस पदयात्रा के जरिए किसान अपनी मांगों को लेकर लोगों के बीच जाएंगे और सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश करेंगे. करीब 228 किलोमीटर की यात्रा के बाद 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसान जुटेंगे. यहां प्रस्तावित रैली में अलग-अलग राज्यों से किसानों के शामिल होने का दावा किया गया है.

किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि क्या है?

किसानों का आंदोलन केवल आज की मांगों तक सीमित नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में किसान संगठनों ने कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं. वर्ष 2020 में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू हुआ किसान आंदोलन करीब एक साल चला और नवंबर 2021 में केंद्र सरकार ने तीनों कानून वापस लेने का ऐलान किया था.

इसके बाद भी किसानों की कई मांगें बनी रहीं. इनमें फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की कानूनी गारंटी, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, कर्ज से जुड़ी राहत, बिजली की दरों में बढ़ोतरी न करना और आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने जैसी मांगें शामिल रही हैं. 2024 में पंजाब-हरियाणा सीमा के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन फिर तेज हुआ.

MSP की कानूनी गारंटी क्यों है बड़ा मुद्दा?

किसान संगठनों की प्रमुख मांगों में MSP की कानूनी गारंटी सबसे अहम है. MSP वह न्यूनतम कीमत है जिस पर सरकार कुछ प्रमुख फसलों के लिए खरीद की व्यवस्था करती है. किसान संगठन चाहते हैं कि MSP को कानूनी सुरक्षा मिले, ताकि किसानों की फसल तय न्यूनतम कीमत से नीचे न बिके.

किसान नेताओं का कहना है कि सिर्फ MSP घोषित करने से समस्या पूरी तरह हल नहीं होती. बाजार में किसान को अपनी फसल बेचते समय उचित कीमत मिले, इसके लिए कानूनी व्यवस्था जरूरी है. इसी मांग को लेकर शंभू और खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन हुआ था.

सरकार से बातचीत नहीं होने का लगाया आरोप

अभिमन्यु कोहाड़ ने बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि सरकार की तरफ से किसानों से बातचीत करने के कई आश्वासन दिए गए, लेकिन लंबे समय से किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक नहीं हुई है. उन्होंने 25 अगस्त 2025 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई किसान रैली का भी जिक्र किया.

उनका कहना है कि उस रैली के बाद कृषि मंत्रालय की ओर से किसानों के प्रतिनिधिमंडल से 10 दिन के भीतर बातचीत करने का लिखित आश्वासन दिया गया था. कोहाड़ के मुताबिक, इसके बावजूद करीब एक साल बीतने के बाद भी किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ वह बैठक नहीं हुई.

उन्होंने 19 मार्च को करीब 32 हजार गांवों से किसानों की मांगों के समर्थन में प्रस्ताव लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचने का भी दावा किया. उनके मुताबिक, वहां अधिकारियों ने जल्द मुलाकात का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके बाद भी किसानों को मिलने का समय नहीं मिला.

किसान संगठनों के बीच एकता पर जोर

अभिमन्यु कोहाड़ ने किसान संगठनों की एकता को भी आंदोलन के लिए जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि अलग-अलग किसान संगठनों के बीच बातचीत हो रही है और इस दिशा में सकारात्मक माहौल बन रहा है.

उन्होंने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा समेत कई किसान नेताओं को पत्र भेजकर एकजुट होने की अपील की गई है. साथ ही गुरनाम सिंह चढ़ूनी की ओर से बुलाई गई 25 जून और 1 जुलाई की बैठकों में भी शामिल होने की जानकारी दी.

उनका कहना है कि आने वाले समय में अलग-अलग किसान संगठनों के बीच व्यापक और मजबूत एकता बनाने की कोशिश जारी रहेगी. किसान नेताओं का मानना है कि अगर संगठन एक मंच पर आते हैं तो किसानों की मांगों को ज्यादा मजबूती से सरकार के सामने रखा जा सकता है.

युवा किसान शुभकरण सिंह की मौत का मुद्दा भी आंदोलन से जुड़ा

2024 के किसान आंदोलन के दौरान खनौरी बॉर्डर के पास युवा किसान शुभकरण सिंह की मौत हुई थी. किसान संगठनों ने उनकी मौत को आंदोलन की एक बड़ी घटना के तौर पर देखा था. इसी वजह से अब दाता सिंह वाला-खनौरी बॉर्डर से शुरू होने वाली पदयात्रा को भी शुभकरण सिंह की शहादत वाली जगह से जोड़ा जा रहा है.

किसान नेता का कहना है कि यह पदयात्रा सिर्फ दिल्ली पहुंचने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि किसानों की पुरानी और लंबित मांगों को फिर से सामने रखने का एक प्रयास है.

पेपर लीक को लेकर सरकार पर निशाना

किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने बातचीत के दौरान युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी उठाया. उन्होंने बार-बार होने वाले पेपर लीक पर सरकार को घेरा और कहा कि इससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है.

उन्होंने कहा कि एक युवा कई साल तक मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता है. परीक्षा के बाद अगर पेपर लीक हो जाता है तो उसकी मेहनत और समय दोनों खराब होते हैं. इससे युवाओं में निराशा बढ़ती है. उन्होंने सरकारों से पेपर लीक की समस्या को गंभीरता से लेने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की मांग की.

‘युवाओं के आंदोलन का नेतृत्व युवाओं के हाथ में हो’

अभिमन्यु कोहाड़ ने रोजगार के मुद्दे पर भी सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि 2014 से 2022 के बीच करीब 22 करोड़ आवेदन आए, लेकिन सरकारी नौकरियां लगभग 7 लाख ही मिलीं. उन्होंने कहा कि रोजगार की समस्या केवल युवाओं का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य से जुड़ा सवाल है.

उन्होंने यह भी कहा कि अगर युवा अपने रोजगार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन करते हैं तो उसका नेतृत्व युवाओं के हाथ में ही रहना चाहिए. किसान संगठन ऐसे आंदोलनों को अपना समर्थन दे सकते हैं, लेकिन युवाओं की आवाज और नेतृत्व युवाओं का ही होना चाहिए.

29 अगस्त की रैली से सरकार तक पहुंचाने की कोशिश

16 अगस्त से शुरू होने वाली पदयात्रा का अंतिम पड़ाव दिल्ली का जंतर-मंतर होगा. करीब 228 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने के बाद 29 अगस्त को यहां बड़ी किसान रैली प्रस्तावित है. किसान नेता का दावा है कि इस रैली में देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों किसान पहुंच सकते हैं.

इस रैली के जरिए MSP की कानूनी गारंटी, किसानों की दूसरी लंबित मांगों, युवाओं के रोजगार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी है. किसान संगठन चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से बातचीत करे और सिर्फ आश्वासन देने के बजाय ठोस कदम उठाए.

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