
भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यात करने वाले देशों में से एक है. यहां से हर साल लाखों टन चावल अलग-अलग देशों में भेजा जाता है, जिनमें चीन भी शामिल है. लेकिन हाल ही में चीन ने भारत से भेजे गए कुछ चावल के माल (consignment) को यह कहकर रोक दिया कि उसमें GMO यानी जेनेटिकली बदला हुआ चावल हो सकता है. GMO का मतलब होता है ऐसा चावल, जिसमें वैज्ञानिक तरीके से बदलाव किया गया हो. चीन के इस फैसले से भारत के चावल निर्यात पर असर पड़ सकता है, इसलिए यह मामला काफी गंभीर हो गया है.
इस मामले को सुलझाने के लिए भारत की संस्था Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (APEDA) आगे आई है. यह संस्था भारत से बाहर भेजे जाने वाले खाने-पीने के सामान, खासकर कृषि उत्पादों की देखभाल करती है. APEDA अब चीन से बात करने की तैयारी कर रही है और उसे यह समझाने की कोशिश करेगी कि भारत का चावल पूरी तरह सुरक्षित है और उसमें किसी तरह का GMO नहीं है.
भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि देश में GMO चावल की खेती की अनुमति नहीं दी गई है. मंत्रालय ने एक आधिकारिक पत्र (ऑफिस मेमोरेंडम) जारी कर यह जानकारी APEDA को दी है, ताकि वह इसे चीन के सामने रख सके. इसके साथ ही, Indian Council of Agricultural Research (ICAR) ने भी यही बात दोहराई है. ICAR भारत की सबसे बड़ी कृषि शोध संस्था है, जो खेती से जुड़ी नई तकनीकों और फसलों पर काम करती है.
पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC) देश में GMO फसलों को मंजूरी देने वाली मुख्य संस्था है. GEAC ने अब तक किसी भी GMO चावल को मंजूरी नहीं दी है. इसका सीधा मतलब है कि भारत में जो भी चावल उगाया जा रहा है, वह पूरी तरह से सामान्य (non-GMO) है.
ICAR के अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि भारत में चावल पर किसी तरह की GMO रिसर्च नहीं हो रही है. देश में जो भी चावल की किस्में किसानों को दी जाती हैं, वे सभी सुरक्षित और बिना किसी जेनेटिक बदलाव के होती हैं. यानी खेतों में उगाया जाने वाला हर चावल प्राकृतिक तरीके से तैयार होता है.
अगर चीन जैसे बड़े देश भारत के चावल को लेना बंद कर देते हैं, तो इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा. किसानों की आमदनी कम हो सकती है और देश के निर्यात (export) में भी गिरावट आ सकती है. इसी वजह से सरकार और APEDA इस मुद्दे को जल्दी सुलझाने में जुटे हैं, ताकि किसानों का नुकसान न हो.
अब APEDA चीन के अधिकारियों से बातचीत करेगा और उन्हें सभी जरूरी दस्तावेज दिखाएगा. इसमें यह साबित किया जाएगा कि भारत का चावल पूरी तरह से non-GMO है और खाने के लिए सुरक्षित है. उम्मीद की जा रही है कि बातचीत के बाद चीन अपना फैसला बदलेगा और भारत के चावल का निर्यात फिर से सामान्य हो जाएगा.
यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि यह सीधे किसानों, व्यापार और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई है. अगर भारत अपना पक्ष सही तरीके से रखता है, तो न केवल निर्यात बचेगा, बल्कि दुनिया में भारतीय चावल की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी.
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