
हरियाणा के करनाल जिले में किसान अब धान की पारंपरिक रोपाई छोड़कर सीधी बिजाई (Direct Seeding of Rice) तकनीक को अपना रहे हैं. इससे जहां एक ओर पानी की बचत हो रही है, वहीं दूसरी ओर खेती की लागत भी कम हो रही है. सरकार की ओर से भी इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रति एकड़ 4,500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. धान की पारंपरिक रोपाई में खेतों में लगातार पानी भरकर रखना पड़ता है, जिससे पानी की खपत काफी बढ़ जाती है. लेकिन सीधी बिजाई तकनीक में धान के बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं, जिससे सिंचाई की जरूरत कम होती है. किसानों के अनुसार, इस तरीके से पारंपरिक रोपाई की तुलना में करीब 25 से 35 प्रतिशत तक पानी की बचत हो सकती है.
जल संरक्षण और खेती की लागत कम करने के उद्देश्य से सरकार किसानों को सीधी बिजाई अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. इस योजना का लाभ उठाकर करनाल के कई किसान आधुनिक तकनीक से धान की खेती कर रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहे हैं.
इसी तकनीक को अपनाने वाले किसान ईशम सिंह पिछले 5 सालों से अपने खेतों में धान की सीधी बिजाई कर रहे हैं और इसके फायदे भी देख रहे हैं. किसान ईशम सिंह ने बताया कि सरकार और कृषि विभाग के सहयोग से वह धान की सीधी बिजाई कर रहे हैं. उनका कहना है कि इस तकनीक को अपनाने का मुख्य उद्देश्य पानी की बचत करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को जल संकट का सामना न करना पड़े.
ईशम सिंह ने बताया कि पिछले कुछ दशकों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने खेती शुरू की थी, उस समय पानी का स्तर करीब 50 फुट पर था, जो धीरे-धीरे 60, 70 और 80 फुट तक नीचे चला गया. अब कई जगहों पर पानी का स्तर करीब 90 फुट तक पहुंच चुका है. उन्होंने चिंता जताई कि अगर पानी का लगातार दोहन होता रहा तो आने वाले समय में नई पीढ़ी को बड़ी जल समस्या का सामना करना पड़ सकता है.
किसान ईशम सिंह ने बताया कि पानी बचाने के उद्देश्य से उन्होंने 5 साल पहले धान की सीधी बिजाई शुरू की थी. उनका कहना है कि इस तकनीक से खेतों में पानी की खपत काफी कम होती है और खेती का खर्च भी घटता है. उन्होंने अन्य किसानों से भी अपील की कि वे धान की सीधी बिजाई को अपनाएं. उन्होंने बताया कि सरकार भी किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता दे रही है. पहले सीधी बिजाई करने वाले किसानों को 4,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती थी, जिसे अब बढ़ाकर 4,500 रुपये प्रति एकड़ कर दिया गया है.
किसान ने बताया कि धान की सीधी बिजाई से फसल की क्वालिटी बेहतर होती है और धान में ज्यादा चमक दिखाई देती है. हालांकि, इस तकनीक में खरपतवार की समस्या आ सकती है, लेकिन इसके लिए बाजार में प्रभावी दवाएं उपलब्ध हैं. उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी समस्या के समाधान के लिए कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेनी चाहिए.
किसान ईशम सिंह के अनुसार, धान की सीधी बिजाई से किसानों का खर्च काफी कम हो जाता है. इसमें मजदूरों की जरूरत भी कम पड़ती है और पानी की बचत भी होती है. उन्होंने कहा कि बारिश होने पर भी सीधी बिजाई वाली फसल को फायदा मिलता है. उन्होंने कहा कि बदलते समय में किसानों को पानी बचाने वाली तकनीकों को अपनाना जरूरी है. अगर ज्यादा से ज्यादा किसान धान की सीधी बिजाई करेंगे तो इससे भूजल संरक्षण होगा और खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकेगा.