कर्नाटक में जमीन अधिग्रहण पर विवाद: विपक्ष का निशाना, CM का दावा—किसान राजी

कर्नाटक में जमीन अधिग्रहण पर विवाद: विपक्ष का निशाना, CM का दावा—किसान राजी

कर्नाटक के बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर सियासत तेज हो गई है. बीजेपी और जेडीएस ने राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग की है, जबकि सीएम डीके शिवकुमार का दावा है कि अधिकांश किसानों ने सहमति दे दी है. भूमि अधिग्रहण, मुआवजे, किसानों के विरोध और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है.

DK ShivkumarDK Shivkumar
क‍िसान तक
  • बेंगलुरु ,
  • Jun 16, 2026,
  • Updated Jun 16, 2026, 1:54 PM IST

कर्नाटक में प्रस्तावित बिदादी इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है. बीजेपी और जनता दल (सेक्युलर) ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर इस परियोजना में हो रहे भूमि अधिग्रहण को रोकने की मांग की है, जबकि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इसका बचाव करते हुए कहा है कि अधिकांश किसान इस परियोजना के पक्ष में हैं.

कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने 14 जून को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार 25 गांवों के 3,500 से अधिक किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है. उन्होंने कहा कि बिदादी और हारोहल्ली के बीच करीब 7,481 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि को 18,000 करोड़ रुपये की टाउनशिप परियोजना के लिए अधिग्रहित किया जा रहा है, जबकि किसान लंबे समय से इसका विरोध कर रहे हैं. विजयेंद्र ने इसे “राज्य प्रायोजित भूमि हड़प” करार देते हुए राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग की.

इससे एक दिन पहले जेडीएस नेता निखिल कुमारस्वामी ने भी राहुल गांधी को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि सरकार ने पर्याप्त जनसहमति के बिना अंतिम अधिग्रहण अधिसूचना जारी कर दी है. उन्होंने दावा किया कि इससे सैकड़ों किसान परिवार प्रभावित होंगे और भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है. निखिल ने कहा कि इस कदम का सबसे ज्यादा असर छोटे किसानों, दलितों, पिछड़े वर्गों और भूमिहीन मजदूरों पर पड़ेगा.

मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट का बचाव किया

विपक्ष के इन आरोपों के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने परियोजना का जोरदार बचाव किया. उन्होंने कहा कि यह टाउनशिप योजना पहले की सरकारों की पहल पर आधारित है और इसका उद्देश्य बेंगलुरु पर बढ़ते दबाव को कम करना है. शिवकुमार ने दावा किया कि पहले चरण में 78 प्रतिशत जमीन मालिकों ने सहमति देते हुए मुआवजा मंजूर कर लिया है.

सीएम ने यह भी कहा कि सरकार किसानों को टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स), एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) और दोगुना मुआवजा दे रही है, जो पहले कभी लागू नहीं किया गया. उन्होंने साफ किया कि किसी भी स्थिति में जमीन को डी-नोटिफाई नहीं किया जाएगा और यदि जरूरत पड़ी तो मुआवजा अदालत में जमा कर काम आगे बढ़ाया जाएगा.

शिवकुमार ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र और तेलंगाना भी बड़े पैमाने पर टाउनशिप विकसित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले भी बिदादी और हारोहल्ली में औद्योगिक परियोजनाएं विकसित हुई हैं और किसानों को कोई नुकसान नहीं हुआ.

बीजेपी-जेडीएस का आरोप

दूसरी ओर, बीजेपी और जेडीएस नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह परियोजना दरअसल “रियल एस्टेट बिजनेस” है, जिसमें उपजाऊ जमीन को अधिग्रहित किया जा रहा है. विपक्ष ने चेतावनी दी है कि इस मुद्दे पर आंदोलन तेज किया जाएगा. 

परियोजना को लेकर पर्यावरणीय चिंता भी सामने आई है. एक आरटीआई जवाब के अनुसार, यदि नौ गांवों में भूमि अधिग्रहण पूरा होता है तो करीब दो लाख पेड़ों की कटाई होगी, जिसमें 83 हजार सुपारी, 87 हजार नारियल, 12 हजार आम और तीन लाख से अधिक केले के पौधे शामिल हैं. इसके साथ ही रागी, धान, मक्का और दालों जैसी फसलों पर भी बड़ा असर पड़ेगा.

बिदादी टाउनशिप परियोजना अब राज्य में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है, जहां एक ओर सरकार इसे शहरी विकास के लिए जरूरी बता रही है, वहीं विपक्ष इसे किसानों और कृषि के खिलाफ कदम बता रहा है.(सगय राज की रिपोर्ट)

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