
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के ‘चवन्नी को रुपया बना दिया’ वाले बयान पर राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने कड़ी आपत्ति जताई है. RLD नेताओं ने अखिलेश यादव के बयान को आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सिर्फ पार्टी पर टिप्पणी नहीं, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की विचारधारा और किसान समाज का अपमान है. इस बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सपा और RLD के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है.
दरअसल, अखिलेश यादव ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान अपने पुराने सहयोगियों और राजनीतिक साथियों का जिक्र करते हुए बिना किसी का नाम लिए कहा था कि 'हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए' अखिलेश के इस बयान को RLD प्रमुख जयंत चौधरी और उनकी पार्टी से जोड़कर देखा गया. इसके बाद RLD की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया सामने आई है.
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और RLD नेता अनिल कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर अखिलेश यादव के बयान की आलोचना की. उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि अखिलेश यादव का यह बयान चौधरी चरण सिंह की विचारधारा और पूरे किसान समाज का अपमान है. मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि समाजवादी पार्टी के मौजूदा राजनीतिक अस्तित्व में चौधरी चरण सिंह के परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि इतिहास को भूलकर अहंकार में इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है.
RLD ने कहा है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किसान समाज अखिलेश यादव के इस बयान का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगा. पार्टी ने संकेत दिया कि इस मुद्दे को चुनावी मैदान में भी उठाया जा सकता है. वहीं, अखिलेश यादव के बयान के पीछे राजनीतिक संदर्भ भी महत्वपूर्ण है. सपा और RLD ने 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव गठबंधन के साथ लड़ा था. दोनों दलों के बीच राजनीतिक संबंध कुछ समय तक बने रहे, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी की अगुवाई वाली RLD ने सपा से दूरी बना ली.
इसके बाद RLD ने बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA का दामन थाम लिया. जयंत चौधरी केंद्र की NDA सरकार का हिस्सा भी बने. यही राजनीतिक घटनाक्रम अब दोनों दलों के बीच बयानबाजी की वजह बन रहा है. अखिलेश यादव ने अपने बयान में भले ही किसी पार्टी या नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन RLD ने इसे अपने ऊपर टिप्पणी मानते हुए जवाब दिया है. ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में सपा और RLD के बीच सियासी टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं. (कुमार अभिषेक की रिपोर्ट)