इटावा जिले के भतोरा गांव की रहने वाली मंत्रवती शाक्य एक साधारण ग्रामीण महिला हैं. उनके पास पहले ज्यादा पैसे नहीं थे. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. आज वही महिला खेती करके साल में करीब तीन लाख रुपये कमा रही हैं. उनकी कहानी पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन गई है.
मंत्रवती ने पुरानी खेती छोड़कर नई और आधुनिक खेती शुरू की. उन्होंने स्ट्रॉबेरी, ड्रैगनफ्रूट और रागी की खेती अपनाई. ये फसलें बाजार में अच्छे दाम पर बिकती हैं. सही सोच और मेहनत से उनकी जिंदगी बदल गई.
मंत्रवती एक बीघा जमीन में स्ट्रॉबेरी उगाती हैं. यह फसल अक्टूबर से मार्च तक तैयार होती है. लोग इसे बहुत पसंद करते हैं. इससे उन्हें अच्छी और नियमित आमदनी होती है.
उन्होंने तीन बीघा जमीन में ड्रैगनफ्रूट लगाया है, जो छह महीने में फल देता है. साथ ही वह रागी जैसे मोटे अनाज की खेती भी करती हैं. रागी सेहत के लिए अच्छी होती है और जल्दी तैयार हो जाती है.
मंत्रवती राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हैं. यहां महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाए जाते हैं. समूह सखी महिलाओं को खाता खुलवाने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करती हैं. इसके लिए सिर्फ आधार कार्ड, बैंक पासबुक और फोटो चाहिए.
मंत्रवती सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी काम कर रही हैं. वह अब तक 50 से ज्यादा महिलाओं को खेती का प्रशिक्षण दे चुकी हैं. वह बताती हैं कि 12–15 महिलाएं मिलकर समूह बनाएं और साथ काम करें.
मंत्रवती की मेहनत को देखकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें दो बार सम्मानित किया है. अब उन्हें गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर विशेष अतिथि के रूप में बुलाया गया है. यह उनके लिए बहुत गर्व की बात है.
मंत्रवती की कहानी बताती है कि अगर सही मौका और सही मार्गदर्शन मिले, तो गांव की महिलाएं भी सफल बन सकती हैं. सरकार का लक्ष्य है कि एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को “लखपति दीदी” बनाया जाए. इससे गांव मजबूत होंगे और महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी.