
‘किसान तक’ का किसान कारवां कार्यक्रम आज शामली जनपद के थाना भवन में आयोजित हुआ, जहां किसानों की भारी भागीदारी देखने को मिली. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत प्रदेश के 75 जिलों की इस विशेष कवरेज में कार्यक्रम का यह 69वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग, पशुपालन विभाग और गन्ना विभाग के अधिकारियों ने किसानों को उनकी आय बढ़ाने के विभिन्न उपायों की विस्तृत जानकारी दी. साथ ही सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के बारे में भी किसानों को जागरूक किया गया, ताकि वे इनका अधिकतम लाभ उठा सकें.
पहले चरण में किसान राजेंद्र सिंह ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने हल्दी की प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाई. उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि हल्दी की खेती उनके जीवन को इतना बदल देगी. आज उनकी हल्दी ₹500 प्रति किलो तक बिक रही है, जिससे उन्हें बेहतर आय मिल रही है. जैविक खेती से न सिर्फ उत्पादन बढ़ा है, बल्कि बाजार में अच्छी कीमत भी मिल रही है. अब खेती की कमाई से उनके पास घर, गाड़ी जैसी सभी सुविधाएं हैं.
दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र शामली के फसल विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार ने बताया कि लगातार रासायनिक खेती के कारण जमीन की सेहत बिगड़ रही है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि समय-समय पर मिट्टी की जांच करानी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि कौन से पोषक तत्वों की कमी है. मृदा स्वस्थ होगी तो उत्पादन और अनाज की गुणवत्ता दोनों बेहतर होंगे.
तीसरे चरण में धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के विशेषज्ञ मनु बहादुर ने बताया कि फास्फेटिक उर्वरकों का लगभग 80% हिस्सा बेकार चला जाता है. उन्होंने बताया कि माइकोर सुपर जैसे उत्पाद पौधों की जड़ों के विकास में मदद करते हैं, जिससे उर्वरकों का बेहतर उपयोग होता है. इससे मृदा स्वास्थ्य सुधरता है और उत्पादन में वृद्धि होती है.
चौथे चरण में जिला कृषि अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार ने जानकारी दी कि फार्मर रजिस्ट्री तेजी से लागू की जा रही है. अब सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए यह जरूरी होगी. यह एक डिजिटल पहचान पत्र की तरह काम करेगी, जिसमें किसान की जमीन और योजनाओं की जानकारी एक ही जगह उपलब्ध होगी. साथ ही, जिले में अत्याधुनिक मृदा परीक्षण लैब का निर्माण भी शुरू हो चुका है, जिससे किसानों को जल्द ही बेहतर सुविधा मिलेगी.
पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शाकिब परवेज (विषय वस्तु विशेषज्ञ) ने बताया कि खेती में मजदूरों की कमी बढ़ रही है, जिससे मशीनीकरण की जरूरत बढ़ गई है. उन्होंने धान रोपाई के लिए प्लांटर जैसी मशीनों के फायदे बताए, जिससे लागत कम होती है और काम तेजी से पूरा होता है.
कीटनाशकों में भरोसे की पहल
छठे चरण में इफको एमसी के विनीत कुमार ने बताया कि किसानों को कीटनाशक खरीदते समय अक्सर ठगी का सामना करना पड़ता था. इस समस्या को देखते हुए 2015 में इफको ने जापानी कंपनी के साथ मिलकर भरोसेमंद उत्पाद तैयार किए. आज ये उत्पाद निश्चित कीमत और गुणवत्ता के साथ उपलब्ध हैं, साथ ही इनके साथ दुर्घटना बीमा जैसी सुविधा भी मिलती है.
सातवें चरण में प्रगतिशील किसान ठाकुर धर्मपाल सिंह ने कहा कि किसान बीज चयन को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. उन्होंने बीज को “पिता” और धरती को “मां” बताते हुए कहा कि अगर बीज स्वस्थ नहीं होगा तो फसल भी कमजोर होगी. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि हमेशा अच्छी किस्म के, स्वस्थ और उपचारित बीजों का ही उपयोग करें.
आठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र शामली के अध्यक्ष डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती है, लेकिन किसान कई बार रोग प्रबंधन में सही दवाओं का इस्तेमाल नहीं करते. उन्होंने बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत किस्मों के बीज और बुवाई से पहले बीज उपचार की सलाह दी, जिससे बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है.
किसान कारवां के नवें चरण में धानुका एग्रीटेक के अध्यक्ष डॉ. आर.जी. अग्रवाल ने कहा कि आज किसान खेती तो कर रहा है, लेकिन कई बार वैज्ञानिक तरीकों को नजरअंदाज कर देता है. उन्होंने बताया कि जमीन के स्वास्थ्य की सही जानकारी केवल विज्ञान के माध्यम से ही मिलती है, जिससे यह पता चलता है कि मृदा में किन पोषक तत्वों की कमी है और उनकी पूर्ति कैसे की जाए. डॉ. अग्रवाल ने किसानों से अपील की कि वे कृषि वैज्ञानिकों के संपर्क में रहकर उनके सुझावों के अनुसार बीज और कीटनाशकों का चयन करें. इसके लिए धनुका एग्रीटेक ने एक कॉल सेंटर भी शुरू किया है, जहां किसानों को मुफ्त में खेती से जुड़ी जानकारी और सलाह दी जा रही है.
किसान कारवां के दसवें चरण में कार्यक्रम का माहौल उस समय खास हो गया, जब जादूगर सलमान ने अपनी शानदार प्रस्तुति से सभी का ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने एक अनोखे जादू के जरिए धानुका एग्रीटेक के अध्यक्ष पर फूलों की बारिश कराई. इस प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने किसानों को महत्वपूर्ण संदेश दिया कि मृदा संरक्षण बेहद जरूरी है और खेती की सफलता का आधार स्वस्थ मिट्टी ही है.
किसान कारवां के ग्यारहवें चरण में प्रगतिशील किसानों का सम्मान किया गया. इस दौरान देवेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, खलील, ठाकुर धर्मपाल सिंह, संजय सिंह, तैमूर राणा, धर्मेंद्र कुमार, विक्की कुमार और अमरेश जैसे किसानों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में मौजूद सभी किसानों ने इन सफल किसानों से प्रेरणा ली.
लकी ड्रॉ ने बढ़ाया उत्साह
वहीं, 12वें चरण में किसानों के उत्साह को बढ़ाने के लिए लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया. इसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार वितरित किए गए, जबकि 1000 रुपये के 5 विशेष पुरस्कार विकास, रीना, दीपक, रमेश और खड़क को दिए गए. इस आयोजन ने कार्यक्रम में मौजूद किसानों के बीच उत्साह और खुशी का माहौल बना दिया.