
अगर आपके पास खेत या बड़ा बगीचा नहीं है, तो भी आप घर की छत, बालकनी या आंगन में आसानी से पपीते का पौधा उगा सकते हैं. खास बात यह है कि गमले में उगाया गया पपीता ताजा, पौष्टिक और रसायन मुक्त होता है. ऐसे में आइए जानते हैं गमले में पपीता उगाने का आसान स्टेप-बाय-स्टेप तरीका.
गमले में पपीता उगाने के लिए बौनी या कम ऊंचाई वाली पपीते की किस्में चुनें. इसके अलावा अच्छी क्वालिटी वाले बीज किसी विश्वसनीय नर्सरी या कृषि केंद्र से खरीदें, क्योंकि स्वस्थ बीज पौधे की बेहतर वृद्धि और अधिक फल उत्पादन में मदद करते हैं.
पपीते की जड़ें गहरी होती हैं, इसलिए कम से कम 18 से 24 इंच गहरा और चौड़ा गमला चुनें. गमले के नीचे पानी निकासी के लिए पर्याप्त छेद होना जरूरी है, ताकि जड़ों में पानी जमा न हो.
गमले में भरने के लिए 50 फीसदी बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत गोबर की सड़ी खाद या कंपोस्ट और 20 परसेंट रेत मिलाएं. यह मिश्रण पौधे को जरूरी पोषक तत्व देने के साथ जल निकासी भी बेहतर बनाएगा.
पपीते की बीज को लगभग 1 से 2 सेंटीमीटर गहराई में बोएं. यदि नर्सरी से पौधा लाए हैं, तो उसे सावधानी से गमले में लगाएं ताकि जड़ों को नुकसान न पहुंचे. वहीं, रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें.
पपीते के पौधे को रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की सीधी धूप चाहिए. गर्मियों में नियमित पानी दें, लेकिन गमले में जलभराव न होने दें. क्योंकि अधिक पानी जड़ों को सड़ा सकता है. ऐसे में ध्यान रखें.
गमले में हर 20 से 30 दिन में जैविक खाद, वर्मी कंपोस्ट या गोबर की खाद डालें. इससे पौधे की बढ़वार तेज होगी और फल लगने की क्षमता बढ़ेगी. पौधे की जरूरत के अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्व भी दिए जा सकते हैं.
पत्तियों पर कीट या रोग के लक्षण दिखें तो नीम के तेल का छिड़काव करें. सामान्यतः 8 से 12 महीने में पपीते के पौधे पर फल आने लगते हैं. जब फल हरे से पीले होने लगें, तब उन्हें तोड़कर इस्तेमाल किया जा सकता है.