PHOTOS: लुप्त होती गौरैया को बचाने का बड़ा प्रयास, मुफ्त में बांटे हजारों घोंसले

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PHOTOS: लुप्त होती गौरैया को बचाने का बड़ा प्रयास, मुफ्त में बांटे हजारों घोंसले

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मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में चीं-चीं करती चिडिया की आवाज अब हर किसी को सुनने को नहीं मिलती, नहीं फुदकती हुई गौरैया किसी आंगन में नजर आती है. कारण है कि किसी समय में जो गौरैया चिड़िया आंगन में दिखती थीं वो मौसम की मार और प्रकृति के बदलाव से लुप्त होने की कगार पर आ गए हैं और उनकी तादाद बहुत कम हो गई है.

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अब कभी-कभी गौरैया चिड़िया दिखाई देती हैं, जिसे देखकर बुजुर्गों के चेहरों पर रौनक आ जाती है. इसको बचाने के कागजों में तो बहुत सारे प्रयास होते है, लेकिन धरातल पर सार्थक पहल बहुत कम होती हैं. लगता है इस बार गर्मी में जो बुरे हाल गौरैया के होते थे, इससे राहत मिलेगी.

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ऐसा इसलिए क्योंकि समाज सेवी रितेश अग्रवाल नापानेरा ने गौरैया के लिए 5 हजार से अधिक घोंसले तैयार करवाते हुए हजारों घोंसलों का वितरण कर दिया है. साथ ही पूरे जिले भर में हजारों घोंसलों का वितरण किया जाना है. रितेश अग्रवाल नापानेरा ने बताया कि बाबा महाकाल की प्रेरणा से अग्रवाल समाज के तत्वाधान में लुप्त होती गौरया चिडिय़ा को बचाने का यह निरंतर प्रयास जारी रहेगा.

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जो आशियाने गौरया के लिए वितरित किए जा रहे हैं, उसमें महाकाल बाबा का रक्षा सूत्र बंधा हुआ है, जिससे गौरया की विपदाओ में भी बाबा के आशीर्वाद से रक्षा होगी. रितेश अग्रवाल ने बताया कि बहुत ही सुंदर प्लाई से आशियाना तैयार करवाएं है. इसमे गर्मी से पक्षियों को राहत मिलेगी और तीन से चार महीने तक वो महफूज रह सकेंगी.

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रितेश अग्रवाल की पत्नी अंजना रितेश नापानेरा ने बताया कि बाबा महाकाल और महालक्ष्मी की प्रेरणा से यह प्रयास कर रहे है, और महाकाल बाबा के मंदिर से आशियानों का वितरण प्रारंभ किया था, ताकि उनके आशीर्वाद से लुप्त गौरैया फिर से वातावरण में चीं-चीं का शोर करते हुए फुदके जिसे देखकर मन प्रसन्न हो जाए.

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पूरा नापानेरा परिवार ही गौरैया के लुप्त होने से बचाने के लिए भरपूर प्रयास कर रहा है. उनके बेटे राघव अग्रवाल ने बताया कि पांच हजार घोंसले तैयार करवाए गए हैं. वह हर उस शख्स तक पहुंचाए जा रहे हैं, जो गौरैया पक्षी को लेकर सजग है. ऐसे लोगों के घर-घर तक घोंसले का वितरण किया जा रहा है.

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छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरूण साव ने भी गौरया चिडिय़ा को बचाने के अभियान को आगे बढ़ाया है, और जो आशियाने बनाए गए है उसे वितरित भी किए हैं. महेश अग्रवाल ने रितेश नापानेरा के इस अभियान को लेकर उन्हे बधाई दी है और कहा है कि गौरैया लगभग कम हो रही है, लगता है प्रयास नहीं किए तो बिलकुल ही लुप्त हो जाएगी.

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पार्षद ज्ञानू विजय ने इस विषय पर कहा कि पक्षियों को बचाने के लिए बहुत सुंदर प्रयास है. इससे यह चिडिय़ाएं जो गर्मी में परेशान होती थीं उन्हें इन घौंसलों से राहत मिलेगी. गौरैया के संरक्षण के लिए जो रितेश नापानेरा का प्रयास है वह बहुत ही अच्छा है. इन घौंसलो के वितरण का परिणाम अगले वर्ष देखने को मिलेगें जब चिडिय़ां चहचहाती दिखाई देगीं, हो सकें तो पक्षियों के सरंक्षण के लिए प्रजनन केंद्र भी बनाकर उन्हे लुप्त होने से बचाना चाहिए.

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