क्या आप जानते हैं कि आपके खेत की सरसों की फसल में खड़ी छोटी-सी मधुमक्खी असल में आपकी पैदावार बढ़ाने वाली सबसे बड़ी ‘नेचुरल मशीन’ हो साबित सकती है? वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि मधुमक्खियों द्वारा सक्रिय परागण होने पर सरसों जैसी तिलहन फसलों में 15 से 25 प्रतिशत तक उत्पादन वृद्धि देखी गई है. (AI Image)
जब मधुमक्खी एक फूल से दूसरे फूल पर जाती है तो वह परागकण यानी पोलन ट्रांसफर करती है. इस प्रक्रिया को परागण कहा जाता है. यही प्रक्रिया फूल को सही तरीके से फल और बीज में बदलने में मदद करती है. सरसों की फसल आंशिक रूप से क्रॉस-पॉलिनेशन पर निर्भर करती है, इसलिए मधुमक्खियों की मौजूदगी से दानों की संख्या, आकार और वजन बेहतर होता है. (AI Image)
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी Indian Council of Agricultural Research और विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के अध्ययनों में यह पाया गया है कि जहां मधुमक्खियों की सक्रियता अधिक होती है, वहां फलियों में दानों की भराव क्षमता बेहतर रहती है और फूल झड़ने की समस्या कम हो जाती है. इससे न केवल पैदावार बढ़ती है बल्कि गुणवत्ता भी सुधरती है. (AI Image)
सिर्फ सरसों ही नहीं, सूरजमुखी, तिलहन, दलहन, कद्दू वर्गीय सब्जियां जैसे कद्दू, तरबूज और लौकी, तथा आम, लीची और सेब जैसे फलों में भी मधुमक्खी परागण का सकारात्मक असर देखा गया है. इन फसलों में बेहतर परागण से फल का आकार संतुलित होता है, वजन बढ़ता है और बाजार में बेहतर कीमत मिलती है.
भारत में कई मधुमक्खीपालक देशभर में घूम-घूमकर अलग-अलग जगह डेरा जमाते हैं और खेतों में मधुमक्खीपालन करते हैं, जिससे किसानों को फसल में फायदा होता है और मधुमक्खीपालकों को शहद से होने वाली वाली इनकम के अलावा किसानों से भी अतिरिक्त कमाई होती है. (AI Image)
अब सवाल यह है कि एक एकड़ में कितने बक्से रखने चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, एक एकड़ सरसों या अन्य परागण-निर्भर फसल के लिए औसतन 4 से 5 मधुमक्खी बॉक्स पर्याप्त होते हैं. इन्हें खेत के कोनों या बीच में सुरक्षित और छायादार स्थान पर रखा जाना चाहिए, ताकि मधुमक्खियां पूरे क्षेत्र में आसानी से सक्रिय रह सकें.
मधुमक्खी पालन से किसान खुद डबल फायदा कमा सकते हैं. वे फसल उत्पादन में सीधा इजाफा कर लाभ कमाने के अलावा शहद से अतिरिक्त आय हासिल कर सकते हैं. एक बॉक्स से एक सीजन में औसतन 15 से 25 किलो तक शहद मिल सकता है, जो अतिरिक्त कमाई का मजबूत स्रोत बन सकता है.
तो अगली बार जब आप सरसों की पीली फसल लहलहाते देखें तो याद रखिए कि उस सुनहरे रंग के पीछे मधुमक्खियों की मेहनत भी शामिल है. सही संख्या में बॉक्स और वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन अपनाकर किसान अपनी पैदावार और आमदनी दोनों बढ़ा सकते हैं. यह प्रकृति के साथ तालमेल बैठाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने का एक सरल और टिकाऊ तरीका है. हालांकि, मधुमक्खी पालन के लिए ट्रेनिंग बेहद अहम है. (AI Image)