Bihar News: जमीन से जुड़े मामलों में अब फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा, सरकार का सख्त संदेश

Bihar News: जमीन से जुड़े मामलों में अब फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा, सरकार का सख्त संदेश

बिहार सरकार ने ज़मीन से जुड़े मामलों में धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज़ों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की घोषणा की है. अब ज़मीन ट्रांसफर, म्यूटेशन और सरकारी ज़मीन से जुड़े मामलों में FIR दर्ज करना ज़रूरी होगा. किसी भी लापरवाही के लिए अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा.

फर्जी कागजों पर होगी कड़ी कार्रवाईफर्जी कागजों पर होगी कड़ी कार्रवाई
क‍िसान तक
  • Patna,
  • Jan 04, 2026,
  • Updated Jan 04, 2026, 9:33 AM IST

बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व और भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ शब्दों में कहा है कि जमीन से जुड़े मामलों में जाली और नकली कागजों का खेल अब किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. चाहे नामांतरण हो, दाखिल-खारिज हो या फिर सरकारी जमीन का मामला, अगर कहीं भी फर्जी दस्तावेज पाए गए तो तुरंत आपराधिक कार्रवाई की जाएगी. सरकार का मानना है कि जमीन से जुड़ा फर्जीवाड़ा बहुत बड़ा अपराध है, जिससे आम लोगों को नुकसान होता है.

अंचलाधिकारी की जिम्मेदारी बढ़ी

सरकार ने यह तय किया है कि अगर किसी जमीन के मामले में नकली कागज सामने आते हैं, तो अंचलाधिकारी खुद थाने में जाकर प्राथमिकी यानी FIR दर्ज कराएंगे. अगर कोई अधिकारी लापरवाही करता है या किसी गलत व्यक्ति को बचाने की कोशिश करता है, तो उसे भी दोषी माना जाएगा. इसका मतलब यह है कि अब अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते.

क्यों लिया गया यह फैसला

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने देखा कि कई जगहों पर जमीन के मामलों में गलत कागजों का इस्तेमाल हो रहा है. लोग नामांतरण, दाखिल-खारिज, सीमांकन, बंदोबस्ती और सरकारी जमीन पर कब्जा करने के लिए फर्जी दस्तावेज बना रहे थे. इससे सरकार और आम लोगों दोनों को परेशानी हो रही थी. इन्हीं शिकायतों के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया.

भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई

विभाग के सचिव गोपाल मीणा ने सभी अंचलाधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि अगर किसी भी जमीन के काम में जाली या झूठे कागज दिए जाते हैं, तो भारतीय न्याय संहिता, 2023 के मुताबिक कार्रवाई की जाए. इसमें जालसाजी, धोखाधड़ी, गलत काम और साजिश जैसे अपराध शामिल हैं. ऐसे मामलों में पुलिस केस दर्ज करना अब जरूरी होगा.

सरकारी और निजी जमीन दोनों पर नियम

सरकारी जमीन के मामलों में अंचलाधिकारी खुद FIR दर्ज कराएंगे. वहीं, निजी या रैयती जमीन के विवाद में पहले जांच होगी. जांच के बाद अगर फर्जीवाड़ा साबित होता है, तो परिवादी के आवेदन पर केस दर्ज किया जाएगा. सरकार ने यह भी कहा है कि फर्जी कागजों के आधार पर कोई आदेश नहीं दिया जाना चाहिए. अगर पहले ऐसा हो चुका है, तो उसकी दोबारा जांच कर सही फैसला लिया जाएगा.

लापरवाही पर होगी सख्त सजा

सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर कोई अधिकारी फर्जी दस्तावेज के मामले में केस दर्ज नहीं करता या उसे दबाने की कोशिश करता है, तो यह बहुत बड़ी गलती मानी जाएगी. ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी खुद जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है.

आम लोगों के लिए क्या मतलब

इस फैसले से आम लोगों को बहुत राहत मिलेगी. अब जमीन माफिया, दलाल और धोखेबाज लोगों पर लगाम लगेगी. सरकार का संदेश बिल्कुल साफ है कि कानून सबके लिए बराबर है. जमीन से जुड़ा कोई भी गलत काम अब छुप नहीं पाएगा और दोषियों को सजा जरूर मिलेगी.

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