
मेरठ के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडे का तबादला होने के बाद इसके पीछे की वजहों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक और किसान संगठनों से जुड़े सूत्रों का दावा है कि हाल के दिनों में सामने आए विवाद और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे सवाल उनके हटाए जाने का प्रमुख कारण बने हैं.
बताया जा रहा है कि दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पहले ही विवादों में आ चुकी थी. उस दौरान एक प्रदर्शनकारी रवि गौतम के साथ कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. आरोप था कि तत्कालीन SSP अविनाश पांडे प्रिजन वैन तक पहुंचे और वहां प्रदर्शनकारी के साथ मारपीट की गई. वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे.
विवाद उस समय और बढ़ गया जब किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए. दोनों नेताओं का दावा है कि उन्हें SSP कार्यालय बुलाया गया, जहां पहले अभद्र व्यवहार किया गया और फिर उनके साथ मारपीट की गई.
किसान नेताओं का आरोप है कि बाद में उन्हें SOG के हवाले कर दिया गया, जहां भी उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया. उन्होंने दावा किया कि उनके शरीर पर चोटों के निशान आए और दिग्विजय भाटी की आंख के पास गंभीर सूजन दिखाई दी. इन आरोपों के बाद किसान संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई.
किसान नेताओं के आरोप सामने आने के बाद मामला राजनीतिक रंग भी ले गया. विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने इसे गंभीर बताते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए. आरोप लगाया गया कि विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े लोगों के साथ सख्त और अनुचित व्यवहार किया गया.
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि लगातार सामने आ रहे विवादों से सरकार की छवि प्रभावित हो रही थी. इसी वजह से उच्च स्तर पर पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया गया.
सूत्रों के अनुसार, किसान नेताओं के साथ कथित मारपीट और उससे पहले सामने आए विवादों की जानकारी शासन स्तर तक पहुंचने के बाद मेरठ में नेतृत्व परिवर्तन का फैसला लिया गया. दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री स्तर पर घटनाक्रम की जानकारी मिलने के बाद अविनाश पांडे को हटाने का निर्णय लिया गया.
हालांकि, सरकार या पुलिस मुख्यालय की ओर से तबादले को किसी एक विशेष घटना से जोड़ते हुए कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. प्रशासनिक तबादलों को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा भी बताया जाता रहा है.
मेरठ के SSP के साथ-साथ प्रदेश के छह अन्य जिलों के पुलिस कप्तानों के तबादले भी किए गए हैं. ऐसे में प्रशासनिक फेरबदल को व्यापक स्तर की प्रक्रिया का हिस्सा भी माना जा रहा है. हालांकि मेरठ में हाल के विवादों के कारण अविनाश पांडे का तबादला विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है.
दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर किसान संगठन लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. दूसरी ओर, पुलिस पक्ष पहले ही आरोपों को खारिज करते हुए अपना अलग पक्ष रख चुका है.
फिलहाल पूरे मामले में आरोप और प्रत्यारोप जारी हैं. किसान संगठनों की मांग है कि घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें. वहीं प्रशासनिक हलकों में मेरठ के पुलिस नेतृत्व में बदलाव को हालिया विवादों से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.(संतोष शर्मा के इनपुट के साथ)