उत्तर प्रदेश के दर्जनों गांवों में गहराया बाढ़ का खतरा, जानें क्या है योगी आदित्यनाथ सरकार की तैयारी

उत्तर प्रदेश के दर्जनों गांवों में गहराया बाढ़ का खतरा, जानें क्या है योगी आदित्यनाथ सरकार की तैयारी

Flood In UP: राहत आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल बाढ़ की स्थिति में सबसे अधिक चिंता शारदा और घाघरा नदी के खतरे के निशान से ऊपर बहने को लेकर है. दोनों नदियों के जलस्तर पर संबंधित विभागों के द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है. वहीं, सहारनपुर और चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर जैसे जिलों में भी प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (File Photo: ITG)मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (File Photo: ITG)
क‍िसान तक
  • LUCKNOW,
  • Aug 19, 2026,
  • Updated Aug 19, 2026, 7:23 AM IST

गंगा, यमुना, रामगंगा और उनकी सहायक नदियों के उफान के बीच उत्तर प्रदेश के दर्जनों जिलों में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है, लेकिन योगी सरकार का प्रशासनिक अमला किसी भी चुनौती के लिए पहले से ही मुस्तैद है. कानपुर से लेकर वाराणसी और मेरठ से लेकर मिर्जापुर तक बाढ़ राहत की सारी तैयारियां कर ली गई हैं. जिन क्षेत्रों में बाढ़ से लोग प्रभावित हैं, उनके बीच राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है. जहां बाढ़ का खतरा आसन्न है, वहां प्रशासन ने राहत सामग्री प्रभावित इलाकों के करीब पहुंचानी शुरू कर दी है, ताकि पानी बढ़ने की सूरत में किसी परिवार परेशानी का सामना न करना पड़े.

राहत किट और बचाव उपकरणों की व्यवस्था

कानपुर में गंगा, यमुना, पांडु, नोन और रिंद नदी के किनारे बसे 176 संवेदनशील गांवों पर प्रशासन की सीधी नजर है. इन गांवों की सुरक्षा के लिए 35 बाढ़ चौकियां और 101 शरणालय पहले ही तैयार कर लिए गए हैं. बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए 1100 राहत किट तैयार कर ली गई हैं, जिनमें से प्रत्येक किट में 26 प्रकार की जरूरी सामग्री शामिल है. बचाव कार्यों के लिए नावों और प्रशिक्षित टीमों की भी व्यवस्था की गई है. गंगा का जलस्तर 112.130 मीटर दर्ज किया गया है, जो चेतावनी बिंदु से 13 सेमी ऊपर है. 

संवेदनशील गांवों में सामग्री पहुंचाने की तैयारी

मेरठ मंडल में भी राहत सामग्री और बचाव उपकरणों को लेकर तैयारियां तेज हैं. बागपत में यमुना और हिंडन किनारे 11 बाढ़ चौकियां सक्रिय की गई हैं और चार राहत स्थल चिह्नित किए गए हैं. गौतमबुद्धनगर में तटबंधों की मरम्मत के साथ-साथ मिट्टी की बोरियां, बल्ली और पत्थर का पर्याप्त भंडार रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके. मुरादाबाद मंडल के पांचों जिलों में भी राहत सामग्री वितरण को लेकर व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं. वहीं, बिजनौर में सुरक्षा उपकरण वितरित किए जा चुके हैं और ब्लॉकवार मेडिकल व पशु चिकित्सा टीमें गठित हैं. संभल की गुन्नौर तहसील में आपात स्थिति के लिए 52 गोताखोर और 100 आपदा मित्र तैनात किए गए हैं। अमरोहा में पीएसी की 15वीं बटालियन की टीम और 25 स्थानीय गोताखोर भी मुस्तैद हैं.

खाद्य सामग्री और हरे चारे की व्यवस्था

आगरा मंडल के आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी जिलों में भी राहत सामग्री वितरण को लेकर ठोस कदम उठाए गए हैं. मंडल में खाद्य सामग्री और राहत किट वितरण की सारी व्यवस्था कर ली गई है. बाढ़ के दौरान बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने हर ब्लॉक स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात की हैं और दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था की गई है. इसके अलावा पशुओं की सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों यानी गौशालाओं का चिन्हीकरण कर उनके लिए चारे का पुख्ता प्रबंध किया गया है. जबकि आपात स्थिति से निपटने के लिए गोताखोरों, एनडीआरएफ और मोटर बोट्स की उपलब्धता भी सुनिश्चित कर ली गई है. 

लाइफ जैकेट वितरण 

वाराणसी में 46 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जिनमें सदर तहसील में 37, राजातालाब में छह और पिंडरा में तीन शिविर शामिल हैं। इन शिविरों की अनुमानित क्षमता 7,392 लोगों की है, जबकि 15 अस्थायी राहत शिविरों में 3,785 लोगों को ठहराया जा सकेगा. जिले में संचालित नावों के नाविकों को अब तक 33,300 लाइफ जैकेट वितरित किए जा चुके हैं, जो राहत सामग्री वितरण की दृष्टि से अब तक की सबसे बड़ी पहल है. स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमों का गठन किया है और पशुपालन विभाग ने पशुओं के इलाज के साथ चारे की भी व्यवस्था की है. मिर्जापुर में भी 37 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं और 50 स्थानों को राहत शिविर बनाने के लिए चयनित किया गया है. 

सभी जिलों में अलर्ट मोड पर प्रशासन

सहारनपुर और चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर जैसे जिलों में भी प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है और राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. प्रदेशभर में राहत किट, लाइफ जैकेट, राशन, भूसा, दवाओं और चारे के वितरण के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि बाढ़ की स्थिति में किसी भी प्रभावित परिवार को असुविधा का सामना न करना पड़े.

लखीमपुर खीरी में सबसे ज्यादा बारिश

पिछले 24 घंटे में प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से काफी अधिक बारिश दर्ज की गई. लखीमपुर खीरी में 92.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से करीब 10 गुना अधिक है. इसके अलावा बहराइच में 62.5 मिलीमीटर, शाहजहांपुर में 45.1 मिलीमीटर, संभल में 41.8 मिलीमीटर, चित्रकूट में 41.5 मिलीमीटर और लखनऊ में 40.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. फर्रुखाबाद में 25.5 मिलीमीटर, बलरामपुर में 28.8 मिलीमीटर, हमीरपुर में 31.6 मिलीमीटर, श्रावस्ती में 29.9 मिलीमीटर और बिजनौर में 33.6 मिलीमीटर बारिश हुई.

50 जिलों में सामान्य से अधिक या सामान्य बारिश

पिछले 24 घंटे की बारिश के आधार पर 20 जिलों में सामान्य से 60 प्रतिशत से अधिक, जबकि छह जिलों में 20 से 59 प्रतिशत तक अधिक बारिश दर्ज की गई. 10 जिलों में बारिश सामान्य रही. वहीं 17 जिलों में सामान्य से 60 प्रतिशत तक कम बारिश हुई और 22 जिलों में बारिश नहीं हुई.

पूरे मॉनसून सीजन में इन जिलों में ज्यादा बारिश

एक जून से 16 अगस्त तक की संचयी बारिश के आंकड़ों के मुताबिक संभल में सामान्य से 74.97 प्रतिशत, मेरठ में 73.81 प्रतिशत और मुजफ्फरनगर में 69.22 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है. एटा में सामान्य से 28.14 प्रतिशत और फिरोजाबाद में 25.95 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई. वहीं प्रदेश के कई जिलों में अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है. लखनऊ में सामान्य की तुलना में 78.69 प्रतिशत, फर्रुखाबाद में 75.75 प्रतिशत और बरेली में 77.51 प्रतिशत बारिश दर्ज हुई है.

शारदा और घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर

राहत आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल बाढ़ की स्थिति में सबसे अधिक चिंता शारदा और घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने को लेकर है. दोनों नदियों के जलस्तर पर संबंधित विभागों के द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है.

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