
बिहार सरकार ने किसानों की परेशानी को समझते हुए एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है. खान एवं भू-तत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगर किसान अपने ही खेत से घरेलू या कृषि उपयोग के लिए मिट्टी निकाल रहे हैं, तो उन पर कोई जुर्माना या कार्रवाई नहीं की जाएगी. खनन विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि किसानों को अनावश्यक परेशान नहीं किया जाए. उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि बिना पूरी जांच के किसी किसान पर दंडात्मक कार्रवाई ना की जाए. साथ ही खनन निरीक्षक को खुद मौके पर जाकर जांच करनी चाहिए. केवल किसी के निर्देश पर एफआईआर दर्ज न की जाए.
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने 5,000 करोड़ रुपये राजस्व संग्रह का लक्ष्य रखा है. मंत्री ने कहा कि पटना, औरंगाबाद, भोजपुर, रोहतास, गया, नवादा, जमुई और अरवल जैसे जिलों से सबसे ज्यादा राजस्व आता है. अगर इन जिलों में प्रदर्शन कमजोर रहा तो पूरे विभाग का लक्ष्य प्रभावित होगा. मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सांसद, विधायक, विधान पार्षद और जिला परिषद अध्यक्षों के मोबाइल नंबर अपने पास रखें और उनके फोन का सम्मानपूर्वक जवाब दें.
विभाग के सचिव अवनीश कुमार सिंह ने बालू घाटों के बंदोबस्त में देरी, राजस्व संग्रह में कमी और समय पर एफआईआर न दर्ज करने पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि अगली समीक्षा तक हर जिले में राजस्व संग्रह में सुधार लाना होगा. सचिव ने चेतावनी दी कि लक्ष्य हासिल नहीं करने वाले अधिकारियों पर निलंबन या बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी. जो खनन विकास पदाधिकारी लगातार दो वर्ष तक लक्ष्य नहीं पूरा करेंगे, उन्हें सस्पेंड करने के साथ उनका पद घटाकर खनन निरीक्षक कर दिया जाएगा.
सचिव ने कहा कि ईंट-भट्ठा संचालकों के बकाया भुगतान के लिए वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना लाई जा रही है. इसमें बकायेदारों को सिर्फ मूल राशि जमा करनी होगी और ब्याज माफ कर दिया जाएगा. उन्होंने निर्देश दिया कि व्यावसायिक निर्माण कार्यों (मॉल, स्कूल, अस्पताल) में उपयोग की जाने वाली मिट्टी पर भी निर्धारित रॉयल्टी वसूली जाए. जो कर्मचारी बिना छुट्टी स्वीकृत कराए मुख्यालय आते हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए.
मंत्री ने कहा कि बेहतर काम करने वाले दो अधिकारियों आनंद किशोर और सचिन किशोर को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया. यह समीक्षा बैठक किसानों को राहत देने और विभागीय कार्यों को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. सरकार का स्पष्ट संदेश है कि किसानों की मेहनत को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा, लेकिन अवैध खनन करने वालों पर सख्ती बरती जाएगी.