
कर्नाटक के बिदादी में सोमवार को तनाव की स्थिति बन गई, जब किसानों ने JMC अधिकारियों द्वारा किए जा रहे जमीन के सर्वे का जोरदार विरोध किया. किसानों का आरोप था कि अधिकारी उनकी सहमति के बिना सर्वे करने आए थे और उन्होंने इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ने दिया. प्रदर्शनकारियों ने सर्वे करने वाले अधिकारियों और पुलिसकर्मियों का विरोध किया, जिससे वहां तीखी बहस हुई. पुलिस ने विरोध कर रहे किसानों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन जब भीड़ ने अधिकारियों की गाड़ी को घेर लिया तो विरोध और बढ़ गया.
गुस्से में आकर, कुछ किसानों ने कथित तौर पर गाड़ी को नुकसान पहुंचाया और उस पर लाठियां मारीं. प्रदर्शनकारी इस बात पर अड़े रहे कि किसी भी हाल में सर्वे नहीं होने दिया जाएगा. पुलिस स्थिति को काबू में लाने की कोशिश करती रही.
सोशल मीडिया में चल रही कुछ तस्वीरों और वीडियो में देखा जा सकता है कि सर्वे करने आए अधिकारियों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा. महिला प्रदर्शनकारियों ने कर्मचारियों की गाड़ी पर झाड़ू से हमला किया और उन्हें भगा दिया. प्रदर्शनकारियों ने सर्वे कर्मचारियों से कहा कि वे डिप्टी कमिश्नर की अनुमति का पत्र लेकर आएं. इस विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया और सर्वे का विरोध किया.
"हमें वह चिट्ठी दिखाओ. डिप्टी कमिश्नर से मिली इजाजत दिखाओ," प्रदर्शनकारी बार-बार चिल्लाते हुए अधिकारियों की गाड़ी को घेरे हुए थे. किसानों और सर्वे कर्मचारियों का यह टकराव बैरामंगला और कांचुगरनहल्ली ग्राम पंचायत के गांवों में भारी पुलिस तैनाती के बीच हुआ, जहां किसान आंदोलन से जुड़ी हरी शॉल पहने महिलाओं ने गाड़ी पर झाड़ू मारकर अपना गुस्सा जाहिर किया.
यह विरोध प्रदर्शन तब हुआ, जब विधायक एच.सी. बालकृष्ण ने कथित तौर पर किसान नेताओं को भरोसा दिलाया था कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के निर्देशों के बाद, प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट की आगे का एक्शन प्लान तय करने के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक बुलाई जाएगी. किसानों ने सरकार पर उस वादे से मुकरने का आरोप लगाया, क्योंकि सरकार ने तय बैठक होने से पहले ही भारी पुलिस सुरक्षा के बीच सर्वे अधिकारियों को भेज दिया था.
कर्नाटक प्रांत रैता संघ (KPRS) के राज्य महासचिव यशवंत टी. ने सरकार के इस कदम को किसानों के साथ "धोखा" बताया. उन्होंने कहा, "सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया था कि कोई भी फैसला लेने से पहले मुख्यमंत्री की अगुवाई में बातचीत की जाएगी. इसके बजाय, जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को जारी रखने के लिए भारी पुलिस सुरक्षा के साथ सर्वे अधिकारियों को भेजा गया है. यह भरोसे का साफ उल्लंघन है और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग है."
उन्होंने सरकार से मांग की कि वह सर्वे और पुलिस कर्मियों को तुरंत वापस बुलाए, मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में वादा की गई बैठक बुलाए और उन किसानों की शिकायतें सुने जो अपनी उपजाऊ, सिंचित और बहु-फसली खेती की जमीन को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.(सगय राज का इनपुट)