Stubble Burning: पराली जलाने पर करनाल में सख्ती, इस बार कृषि विभाग ने रखा ‘जीरो’ मामले का लक्ष्य

Stubble Burning: पराली जलाने पर करनाल में सख्ती, इस बार कृषि विभाग ने रखा ‘जीरो’ मामले का लक्ष्य

करनाल में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि विभाग और जिला प्रशासन ने कमर कस ली है. इस बार विभाग ने एक भी पराली जलाने का मामला नहीं होने का लक्ष्य रखा है. साथ ही किसानों को पराली प्रबंधन के लिए जागरूक भी किया जाएगा.

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कमलदीप
  • karnal,
  • Sep 17, 2026,
  • Updated Sep 17, 2026, 10:11 AM IST

हरियाणा में धान की कटाई शुरू होने वाली है. इसे देखते हुए करनाल जिले में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है. इस बार कृषि विभाग ने पराली जलाने की घटनाओं को बिल्कुल जीरो करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए अलग-अलग विभागों के 700 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी अगले दो महीने तक खेतों में जाकर किसानों को जागरूक करेंगे और पराली प्रबंधन की निगरानी करेंगे.

4.50 लाख एकड़ में धान की फसल

कृषि विभाग के मुताबिक, करनाल जिले में इस साल करीब 4.50 लाख एकड़ में धान की खेती हुई है. इससे लगभग 9 लाख मीट्रिक टन फसल अवशेष निकलने का अनुमान है. इतनी बड़ी मात्रा में फसल अवशेष के प्रबंधन के लिए कृषि विभाग ने पहले से ही तैयारी कर ली है. विभाग का कहना है कि जिले में पराली प्रबंधन के लिए पर्याप्त कृषि मशीनें उपलब्ध हैं. किसानों को पराली जलाने के बजाय इन मशीनों और अन्य तरीकों से पराली का प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

किसानों को मिल रही प्रोत्साहन राशि

कृषि अधिकारी जसविंदर सिंह ने किसानों से अपील की है कि वे पराली को खेत में न जलाएं. इससे खेत की मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान होता है. साथ ही धुएं से लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है. किसानों को पराली प्रबंधन के लिए सरकार की ओर से प्रति एकड़ 1,200 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है. इसके अलावा पराली प्रबंधन से जुड़े कृषि मशीनों पर सब्सिडी का भी प्रावधान है.

700 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी रखेंगे नजर

धान की कटाई का सीजन शुरू होने को देखते हुए कृषि विभाग के साथ कई अन्य विभागों के 700 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है. ये कर्मचारी अगले दो महीने तक फील्ड में रहेंगे. इनका काम किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक करना और फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों की जानकारी देना होगा. अगर कोई किसान पराली जलाता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना भी लगाया जा सकता है. अधिकारियों का कहना है कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है. इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है.

पिछले साल 23 मामले आए थे सामने

पिछले साल करनाल जिले में पराली जलाने के 23 मामले सामने आए थे. इनमें से 21 किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे और उनकी जमीन की रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी की गई थी. वहीं, इस बार कृषि विभाग का लक्ष्य है कि पराली जलाने की एक भी घटना सामने न आए. विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे पराली को आग लगाने के बजाय फसल अवशेष प्रबंधन के उपलब्ध तरीकों का इस्तेमाल करें. इससे किसान, खेत और पर्यावरण तीनों को फायदा होगा.

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