
तेलंगाना में कम बारिश और पानी की कमी को देखते हुए विधानसभा ने केंद्र सरकार से 20,000 करोड़ रुपये के विशेष सहायता पैकेज की मांग की है. शुक्रवार को विधानसभा में इस संबंध में प्रस्ताव पास किया गया. इस राशि का इस्तेमाल पीने और सिंचाई के पानी की व्यवस्था, सूखे से निपटने और प्रभावित किसानों और परिवारों को राहत देने के लिए करने की मांग की गई है. प्रस्ताव पेश करते हुए डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने बताया कि 1 जून से 16 सितंबर के बीच राज्य में सामान्य तौर पर 664.5 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस बार सिर्फ 536.6 मिमी बारिश हुई. यानी सामान्य से करीब 128 मिमी कम बारिश दर्ज की गई. उन्होंने बताया कि तेलंगाना के 33 में से 19 जिलों में बारिश की कमी रही है. कम बारिश का असर खेती पर भी पड़ा है.
डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क के मुताबिक, राज्य में मॉनसून के दौरान सामान्य खेती का रकबा करीब 139.29 लाख एकड़ रहता है. लेकिन इस बार इसका करीब 88 फीसदी हिस्सा ही खेती के तहत आ पाया है. कम बारिश और पानी की कमी के कारण किसानों को फसल लगाने में परेशानी हुई है.
तेलंगाना के बड़े जलाशयों में भी पानी का स्तर काफी कम है. 15 सितंबर तक राज्य के प्रमुख जलाशयों की कुल क्षमता करीब 585 TMC है, लेकिन इनमें सिर्फ 241 TMC पानी उपलब्ध था. वहीं, पिछले साल इसी समय जलाशयों में करीब 497 TMC पानी था. सरकार का कहना है कि उपलब्ध पानी फिलहाल पीने की जरूरतों के लिए ही पर्याप्त है. ऐसे में रबी सीजन की फसलों के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है.
विधानसभा में पेश प्रस्ताव में कहा गया कि पानी की कमी बढ़ने पर पीने के पानी का संकट पैदा हो सकता है. साथ ही इसका असर किसानों, खेतिहर मजदूरों, पशुओं और चारे की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है. इसी को देखते हुए केंद्र से ₹20,000 करोड़ के विशेष सहायता पैकेज की मांग की गई है. इस राशि से पीने और सिंचाई के पानी की व्यवस्था और सूखे से निपटने के उपाय किए जाने की बात कही गई है.
प्रस्ताव में केंद्र से तालाबों और दूसरे जल स्रोतों के कायाकल्प के लिए सहायता देने की मांग की गई है. साथ ही, राज्य में चल रही सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए केंद्रीय योजनाओं के तहत पर्याप्त आर्थिक मदद देने की बात कही गई है.
तेलंगाना विधानसभा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए FRBM के तहत राज्य की उधार लेने की सीमा बढ़ाने की मांग भी की है. प्रस्ताव में इसे GSDP के 3 फीसदी से बढ़ाकर 3.5 फीसदी करने की मांग की गई है, ताकि राहत और बचाव कार्यों पर अतिरिक्त खर्च किया जा सके. इसके अलावा, कमजोर वर्ग के किसानों और परिवारों को तत्काल राहत देने के लिए केंद्रीय और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने की मांग की गई है. प्रस्ताव में जरूरत पड़ने पर इसके लिए संबंधित नियमों में छूट देने की बात भी कही गई है. (PTI)