
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब सीधे भारत के गांवों तक पहुंचने लगा है. गुजरात के जामनगर और कच्छ जिलों में किसान इन दिनों डीजल संकट से जूझ रहे हैं. जामनगर जिले के ध्रोल में डीजल की कथित कमी को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिली. ध्रोल के त्रिकोण बाग के पास स्थित पेट्रोल पंप पर बड़ी संख्या में किसानों की लंबी लाइनें लग गईं. बताया जा रहा है कि खेती के कामकाज के लिए डीजल लेने पहुंचे किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं मिल पा रहा था, जिसके चलते माहौल तनावपूर्ण बन गया.
घंटों तक लाइन में खड़े रहने के बावजूद डीजल नहीं मिलने से कुछ किसान आक्रोशित हो गए. इस दौरान एक किसान ने गुस्से में आकर खुद का डीजल भरने का डिब्बा (गैलन) तोड़ दिया. वहीं, देखते ही देखते पेट्रोल पंप पर हंगामे जैसी स्थिति पैदा हो गई. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया. पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक डीजल की कमी के कारण किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
जामनगर के अलावा कच्छ जिले के भुज तालुका के ग्रामीण इलाकों में भी इन दिनों डीजल की भारी किल्लत होने से किसानों पर एक बड़ा संकट मंडरा रहा है. खरीफ सीजन की खेती के इस महत्वपूर्ण समय पर डीजल न मिलने के कारण किसानों की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं. स्थिति यह है कि डीजल पाने के लिए स्थानीय पेट्रोल पंपों पर वाहनों और किसानों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं, जहां घंटों इंतजार करने के बाद भी उन्हें जरूरत के मुताबिक पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा है.
अपने ही क्षेत्र में डीजल न मिलने के कारण मजबूर होकर किसानों को लगभग 20 किलोमीटर तक का लंबा सफर तय करना पड़ रहा है. किसानों की शिकायत है कि इतने चक्कर काटने के बाद भी उन्हें पंपों पर कभी महज 20 तो कभी 40 लीटर डीजल ही दिया जा रहा है. डीजल की यह सीमित मात्रा इतनी कम है कि उनके खेती की मशीन पूरे हफ्ते में बमुश्किल 4 घंटे ही चल पा रहे हैं.
ईंधन की इस गंभीर कमी के चलते ट्रैक्टर और अन्य जरूरी कृषि साधन पूरी तरह से बेकार हो गए हैं. समय पर फसलों की बुआई और कटाई न हो पाने के कारण खेतों में खड़ी फसल खराब होने की कगार पर है, जिसने किसानों की चिंता और मानसिक तनाव को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है. इस बदहाली से तंग आकर अब भुज के किसानों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल्द से जल्द डीजल का पर्याप्त जत्था उपलब्ध कराया जाए ताकि उनकी खेती और आजीविका को बचाया जा सके. (दर्शन ठक्कर और कौशिक कांठेचा की रिपोर्ट)