ईरान-इजरायल युद्ध का असर: गुजरात के इन जिलों में पेट्रोल पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के लगे बोर्ड, किसान परेशान

ईरान-इजरायल युद्ध का असर: गुजरात के इन जिलों में पेट्रोल पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के लगे बोर्ड, किसान परेशान

गुजरात के कई जिलों में किसान इन दिनों डीजल संकट से जूझ रहे हैं. खेतों में ट्रैक्टर खड़े हैं, सिंचाई का काम प्रभावित हो रहा है और किसान पेट्रोल पंपों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं. इस समय शादी-ब्याह और खेती दोनों का सीजन चल रहा है, इसलिए पेट्रोल और डीजल की मांग काफी बढ़ गई है.

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ईरान-इजरायल युद्ध का असर: गुजरात के इन जिलों में पेट्रोल पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के लगे बोर्ड, किसान परेशानपेट्रोल पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के लगे बोर्ड

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब सीधे भारत के गांवों तक पहुंचने लगा है. गुजरात के वडोदरा और महीसागर जिलों में किसान इन दिनों डीजल संकट से जूझ रहे हैं. खेतों में ट्रैक्टर खड़े हैं, सिंचाई का काम प्रभावित हो रहा है और किसान पेट्रोल पंपों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं. एक तरफ सरकार और तेल कंपनियां दावा कर रही हैं कि ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन दूसरी तरफ गांवों की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. सप्लाई चेन प्रभावित होने की वजह से समय पर डीजल नहीं पहुंच पा रहा, जिसका सबसे ज्यादा असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है. खरीफ सीजन से पहले बढ़ी इस परेशानी ने किसानों की चिंता और भी बढ़ा दी है.

किसानों को हो रही डीजल की कमी

गुजरात के वडोदरा में हालात इतने खराब हो गए हैं कि खेती के सबसे जरूरी समय पर किसानों को सिंचाई और खेत की जुताई के लिए डीजल तक नहीं मिल पा रहा है. एक तरफ प्रशासन और तेल कंपनियां पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रही हैं, लेकिन जमीन पर किसान ईंधन के लिए परेशान घूम रहे हैं. युद्ध की वजह से सप्लाई में देरी होना समझ में आता है, लेकिन जब स्टॉक मौजूद है तो किसानों तक समय पर डीजल क्यों नहीं पहुंच रहा, यह बड़ा सवाल बन गया है. डीजल की कमी से खेती का काम प्रभावित हो रहा है और किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं. अगर जल्द ही डीजल की सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में देश की खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ सकता है.

तेल कंपनियों के पास पर्याप्त मात्रा है स्टॉक

इस बीच, वडोदरा के पेट्रोल-डीजल एसोसिएशन के अध्यक्ष मेहुल पटेल का कहना है कि तेल कंपनियों के पास ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. समस्या स्टॉक की कमी नहीं, बल्कि सप्लाई चेन में हो रही देरी की है. इसी वजह से लोगों तक समय पर पेट्रोल और डीजल नहीं पहुंच पा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का गलत मतलब निकाल रहे हैं. पीएम मोदी ने लोगों से सिर्फ इतना कहा था कि जितनी जरूरत हो, उतना ही ईंधन इस्तेमाल करें, ताकि देश का विदेशी मुद्रा खर्च कम हो और आर्थिक दबाव घटाया जा सके. इसका मतलब यह नहीं है कि देश में पेट्रोल-डीजल खत्म हो रहा है.

डीजल की कम सप्लाई से बढ़ी किसानों की चिंता

पेट्रोल-डीजल की कम सप्लाई के बीच किसानों की मानें तो उनका कहना है कि गर्मियों में खेतों में पानी देना जरूरी हो गया है, और अगर हमें काफी मात्रा में डीजल मिल जाए, तो हम अपनी कीमती फसलों को बचा पाएंगे. बेशक, अभी डीजल की सप्लाई हो रही है, लेकिन वह काफी नहीं है. अगर पेट्रोल पंप के पास स्टॉक है, तो वे हमें उतनी मात्रा देते हैं, लेकिन वह पूरी तरह जरूरत के हिसाब से नहीं है, जिससे खेती में दिक्कतें आ रही हैं.

पेट्रोल पंपों पर 'स्टॉक नहीं है' के लटके बोर्ड

कुछ ऐसा ही माजरा महीसागर जिले में देखने को मिल रहा है,  जहां पिछले कुछ दिनों से जारी ईंधन का संकट अब गहरा गया है. स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि जिले के मुख्य शहर लूणावाड़ा सहित कुल 62 पेट्रोल पंपों में से ज्यादातर पेट्रोल पंप पर 'स्टॉक नहीं है' के बोर्ड लटक गए हैं, जिससे वाहन चालकों में भारी अफरातफरी मची हुई है. पंप संचालकों की ओर से ऑयल कंपनियों को एडवांस पेमेंट भेजा गया हे और रजिस्ट्रेशन करवा दिया है, इसके बावजूद डिपो स्तर से सप्लाई में भारी कटौती की गई है. पिछले कई दिनों से जिले में ईंधन का नया जत्था नहीं पहुंचा है. हालांकि, कंपनियों की ओर से आश्वासन दिया गया है कि आने वाले दो-तीन दिनों में स्थिति सामान्य हो सकती है, लेकिन तब तक जिले में ईंधन की भारी किल्लत बनी रहने की संभावना है.

खेती सीजन की वजह से बढ़ रही डीजल की मांग

इस समय शादी-ब्याह और खेती दोनों का सीजन चल रहा है, इसलिए पेट्रोल और डीजल की मांग काफी बढ़ गई है. लेकिन ईंधन की कमी के कारण लोगों को एक पेट्रोल पंप से दूसरे पंप तक भटकना पड़ रहा है. खेती के काम के लिए ट्रैक्टर और सिंचाई पंपों में डीजल बेहद जरूरी है, लेकिन कई इलाकों में स्टॉक खत्म होने से किसान परेशान हैं. कडाणा, खानपुर, बालासिनोर और वीरपुर के बाद अब लूणावाड़ा में भी पेट्रोल-डीजल की कमी देखने को मिल रही है. जिले के मुख्य शहर लूणावाड़ा में जैसे ही पेट्रोल या डीजल की सप्लाई पहुंचती है, पंपों पर लंबी लाइन लग जाती है. हालात ऐसे हैं कि बुजुर्ग लोग भी घंटों लाइन में खड़े होकर ईंधन लेने को मजबूर हैं. लगातार हो रही परेशानी से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और वे सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर कर रहे हैं. (त्रुशर पटेल और विरन कुमार जोशी की रिपोर्ट)

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