
बिहार के सारण जिले के सोनपुर में 32 दिनों के लिए पशुओं का प्रसिद्ध मेला शुरू हो चुका है. मेले में अलग-अलग जानवरों के बाजार लगे हैं, लेकिन मेले में घोड़ो के बाजार में अलग ही रौनक नजर आ रही है. शुरुआत में ही सोनपुर मेले में अभी तक तक़रीबन 5 हजार घोड़े खरीद-बिक्री के लिए आ चुके हैं, जिन्हें उनकी नस्ल, रंग रूप और खासियत के लिहाज से खरीदा और बेचा जा रहा है. घोड़ों की 20 हजार से लेकर 11 लाख तक है. इनको देखने के लिए लोग दूर-दूर से यहां पहुंच रहे हैं.
बिहार सरकार में कई मंत्री, विधायक जो घुड़सवारी का शौक रखते हैं, वे भी इस मेले में बड़े शौक से अपने नाम का बैनर लगवाकर अपने अपने घोड़ों की प्रदर्शनी लगाते हैं. बिहार सरकार में मंत्री सुमित सिंह और रामसूरत राय ने भी मेले में अपने अपने घोड़े के लिए ख़ास स्टॉल बनवाया तो वहीं, अनंत सिंह खुद अपने पाले हुए घोड़ों के साथ मेले में पहुंच गए. बाहुबली अनंत सिंह का जानवरों से प्रेम जगजाहिर है और मेले में पहुंचे अनंत सिंह सोनपुर के घोड़ा बाजार में घूम-घूम कर अच्छे नस्ल के घोड़ो को परखते दिखे.
ये भी पढ़ें - कृषि और उद्योगों के बीच पुल बनेगी ये योजना, क्लस्टर से जुड़े किसानों को मिलेंगे ये फायदे
मेले में अनंत सिंह की मौजूदगी से मेले में अलग ही माहौल खिल उठा. अनंत सिंह ने कहा कि वे लंबे समय से मेले में आते रहे हैं और सोनपुर का मेला आज भी अपने उसी अंदाज में जमा हुआ है. बस एक बदलाव यह हुआ है कि पुल बन जाने से लोग जल्दी पटना लौट जाते हैं, नहीं तो पहले लोग यहां 15 दिन तक रहते थे. इसके अलावा उन्होंने सरकार से होर्स रेस चालू करने की मांग की. उन्होंने कहा, '’ घोड़ा रेस बंद है, सरकार को चालू करना चाहिए.'’
इस साल मेले में आए घोड़ों में एक से बढ़कर एक नस्ल और खूबी वाले घोड़ों का जमावड़ा लगा है. मेले में काले, सफ़ेद, लम्बे, छोटे हर नस्ल और कीमत के घोड़े पहुंचे हैं, लेकिन इन सब के बीच मेले में आए कुछ ऐसे घोड़े भी हैं, जो मेले में आने वाले लोगों को खूब लुभा रहे हैं. यहां लम्बे-चौड़े माड़वार नस्ल के घोड़े से लेकर डेढ़ फुट के बौने घोड़े मौजूद हैं, जिन्हें सभी कौतुहल से देखने पहुंच रहे हैं.
इतिहास की किताबों में भी दर्ज है कि मौर्य वंश के शासक चंदगुप्त मौर्य अपनी सेना के लिए हाथी घोड़ों की खरीद के लिए सोनपुर मेले में आया करते थे, मुग़ल बादशाद अकबर और अंग्रेजो से लोहा लेने वाले वीर कुंवर सिंह भी घोड़ा खरीदने सोनपुर मेले में आए थे. सोनपुर के घोड़े के बड़े बाजार को देख 1803 में राबर्ट क्लाइव ने यंहा घोड़ो का एक बड़ा अस्तबल भी बनवाया था. तब से लेकर आज तक सोनपुर मेले में घोड़ों के इस बाजार की रौनक बरकरार है और यंहा दूर-दूर से घोड़ो के व्यापारी अपने घोड़ों को बेचने के लिए पहुंचते है. (संदीप आनंद की रिपोर्ट)