
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में बुधवार को 'अटल भूजल योजना' के तहत बने खेत-तालाबों (farm ponds) के लिए सब्सिडी के भुगतान को लेकर विरोध कर रहे किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली. इस दौरान उन्होंने पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए और कथित तौर पर पुलिस के साथ उनकी झड़प भी हुई. विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए और रुकी हुई सब्सिडी की रकम तुरंत जारी करने की मांग की.
रैली धन मंडी बाजार से शुरू हुई, जहां पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए थे. प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स हटा दिए, जिसके बाद कुछ किसानों और पुलिसकर्मियों के बीच हाथापाई हुई.
इसके बाद ट्रैक्टर रैली जंक्शन और टाउन इलाकों से गुजरी और भारत माता चौक के पास खत्म हुई.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्होंने 'अटल भूजल योजना' के तहत खेत-तालाब बनाने के लिए लोन लिया था, लेकिन योजना के तहत वादा की गई सब्सिडी का भुगतान "लंबे समय से नहीं किया गया है". उन्होंने कहा कि नतीजतन, उन पर लोन चुकाने और ब्याज का बोझ बढ़ रहा है.
किसान नेताओं रायसाहब पचार और रेशम सिंह मानुका ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है.
उन्होंने कहा कि किसानों के पास अपने आंदोलन को तेज करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है.
नेताओं ने कहा, "किसानों के पास अब आर-पार की लड़ाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है."
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शहरी निकाय और पंचायत चुनावों से पहले यह प्रदर्शन करना उनकी मजबूरी थी और उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार उनकी मांग पूरी नहीं करती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
जब रैली शहर से गुजरी, तो विरोध स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था.
अटल भूजल योजना (अटल जल) केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका मकसद उन इलाकों में भूजल स्तर सुधारना है जहां पानी की कमी तेजी से बढ़ रही है. इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर 2019 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर की थी.
योजना पर कुल 6,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इसमें 3,000 करोड़ रुपये विश्व बैंक से लोन के रूप में मिलते हैं, जबकि 3,000 करोड़ रुपये भारत सरकार देती है.
यह योजना गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के जल-संकट वाले क्षेत्रों में लागू की गई है. इसके तहत 78 जिलों की करीब 8,350 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है.
इस योजना की खास बात यह है कि इसमें स्थानीय लोगों और ग्राम पंचायतों की भागीदारी से पानी बचाने, पानी के बेहतर उपयोग और जल प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाता है, ताकि भविष्य में पानी की कमी की समस्या को कम किया जा सके.(PTI)